
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि दो दशकों बाद की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) केवल पुरानी मतदाता सूची को दोहराने जैसी प्रक्रिया नहीं हो सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग जब मतदाता सूची का नया सत्यापन कर रहा है, तो इसमें नागरिकता से जुड़े सवालों की जांच होना स्वाभाविक है, हालांकि इसका अर्थ नागरिकता का निर्धारण नहीं है।
EC को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना होगा: सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने कहा:
“चुनाव आयोग को संविधान ने चुनावों की निगरानी और नियंत्रण का अधिकार दिया है। इसका मतलब है कि EC को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों। क्या आयोग हर शिकायत का इंतजार करे, या स्वयं संक्षिप्त जांच करके संदेहास्पद प्रविष्टियों को देखे? शिकायत का इंतजार करने से बेहतर है कि EC खुद सत्यापन करे।”
याचिकाकर्ता की दलील: नागरिकता जांच का आधार गलत
वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन, जिन्होंने SIR की वैधता को चुनौती दी है, ने कहा कि EC का मतदाता सत्यापन “अविश्वास” के आधार पर शुरू नहीं हो सकता।
उन्होंने तर्क दिया कि:
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नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं, बल्कि कानून के तहत अन्य एजेंसियों का दायित्व है।
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EC ने SIR के लिए जो कारण बताए — बड़े पैमाने पर पलायन और तेज शहरीकरण — वह बिहार की स्थिति थी, जिसे पूरे देश पर लागू नहीं किया जा सकता।
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आयोग ने विस्तृत तर्क नहीं दिए कि अखिल भारतीय स्तर पर SIR क्यों जरूरी है।
कोर्ट ने कहा: पलायन सिर्फ राज्य के भीतर नहीं, सीमा पार भी हो सकता है
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि SIR नोटिफिकेशन में दिए गए ‘migration’ शब्द का अर्थ केवल राज्यों के बीच पलायन नहीं है — यह सीमा पार (cross-border) migration को भी दर्शा सकता है।
CJI ने कहा:
“पलायन हमेशा देश के भीतर नहीं होता। सीमा पार से भी लोग आते हैं। ऐसे में नागरिकता की जांच अस्वाभाविक नहीं है।”
ECI को अगली सुनवाई में जवाब देना होगा
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है। तब चुनाव आयोग याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर अपना जवाब दाखिल करेगा।
सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में लागू SIR को चुनौती देने वाली याचिकाएँ भी सुनेगा।
कई राज्यों से याचिकाएँ — SIR पर बढ़ती चिंता
पिछले कुछ हफ्तों से सुप्रीम कोर्ट विभिन्न राजनीतिक दलों, सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि:
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SIR के जरिए बिना ठोस आधार के मतदाताओं को ‘संदिग्ध’ बताया जा सकता है
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इससे वंचित वर्गों का नाम हटने का जोखिम है
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EC के निर्देशों में नागरिकता जांच का उद्देश्य साफ नहीं किया गया



