
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार, 12 दिसंबर को महाराष्ट्र के लातूर स्थित निवास पर निधन हो गया। 90 वर्षीय पाटिल पिछले कुछ समय से बीमार थे और परिवार के अनुसार उनका देहांत घर पर ही हुआ।
सात बार के सांसद और कई अहम जिम्मेदारियों के धनी
लातूर से सात बार लोकसभा सांसद रहे शिवराज पाटिल ने अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। वे लोकसभा अध्यक्ष भी रह चुके थे और यूपीए सरकार के दौरान केंद्र में कई प्रमुख मंत्रालयों का नेतृत्व किया।
गृह मंत्री के रूप में यादगार लेकिन चुनौतीपूर्ण कार्यकाल
2004 में चुनाव हारने के बावजूद पाटिल को राज्यसभा भेजा गया और उसी साल वे केंद्रीय गृह मंत्री बने। उनका कार्यकाल कई गंभीर आतंकी घटनाओं से प्रभावित रहा, जिनमें सबसे बड़ा झटका था 26/11 मुंबई आतंकी हमला। इस हमले के बाद गृह मंत्रालय की भूमिका पर उठे सवालों के चलते शिवराज पाटिल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
कांग्रेस के अंदर उस समय हुई बैठकों में भी गृह मंत्रालय की जवाबदेही पर तीखी चर्चा हुई। वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने बैठक में साफ कहा था, “शिवराज पाटिल जी, पार्टी को बचाने के लिए आपका जाना ज़रूरी है।” इसके बाद ही पाटिल ने पद छोड़ने का फैसला किया।
इंदिरा और राजीव सरकारों में भी निभाई बड़ी भूमिकाएँ
इंदिरा गांधी सरकार में उन्हें रक्षा राज्य मंत्री (1980–82) बनाया गया। इसके बाद वे क्रमशः वाणिज्य मंत्री, और फिर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, समुद्री विकास और परमाणु ऊर्जा विभागों की जिम्मेदारी संभालते रहे।
राजीव गांधी के दौर में उन्होंने कार्मिक, रक्षा उत्पादन, तथा बाद में नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार भी संभाला।
सजधा और गरिमामयी व्यक्तित्व
शिवराज पाटिल अपनी बेहद सलीकेदार पोशाक, शांत व्यक्तित्व और अनुशासित कार्यशैली के लिए भी जाने जाते थे। कांग्रेस के भीतर उन्हें सोनिया गांधी का करीबी माना जाता था। उनके पूरे राजनीतिक जीवन में उनकी सादगी और विनम्रता अक्सर चर्चा में रहती थी।



