
नई दिल्ली | 19 मई, 2026 | Congress On Fuel Price Hike: देश के रिटेल फ्यूल मार्केट (खुदरा ईंधन बाजार) से आम उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने मंगलवार को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की एक और बड़ी बढ़ोतरी कर दी है।
यह ध्यान देने योग्य बात है कि पिछले पांच दिनों के भीतर भारतीय जनता को लगा यह दूसरा बड़ा वित्तीय झटका है। इससे पहले बीते शुक्रवार, 15 मई को भी तेल कंपनियों ने देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त वृद्धि की थी। कुल मिलाकर देखा जाए तो महज 96 घंटों के भीतर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹4 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
चारों महानगरों में ईंधन के दाम: एक नजर में (19 मई, 2026 की स्थिति)
तेल कंपनियों द्वारा जारी की गई नई मूल्य सूची के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में आज से पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार लागू हो चुके हैं:
सीएनजी (CNG) उपभोक्ताओं पर भी दोहरी मार
ईंधन के मोर्चे पर महंगाई की मार सिर्फ पेट्रोल-डीजल गाड़ियों तक सीमित नहीं है। ग्रीन फ्यूल यानी सीएनजी का इस्तेमाल करने वाले मध्यम वर्ग को भी पिछले हफ्ते बड़ा झटका लगा था। 15 मई को दिल्ली और मुंबई सहित प्रमुख मेट्रो शहरों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी, जिसके ठीक बाद रविवार को भी इसमें ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा और कर दिया गया।
आर्थिक विश्लेषण: अचानक क्यों बढ़ने लगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
आर्थिक विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे दो सबसे प्रमुख कारण काम कर रहे हैं:
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता
रूस-यूक्रेन संघर्ष और हाल ही में मध्य पूर्व (Middle East Crisis) में उपजे ताजा तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लंबे समय से ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारतीय तेल कंपनियां काफी समय से घाटे (Under-recoveries) का सामना कर रही थीं, जिसकी भरपाई के लिए अब खुदरा कीमतों में बदलाव किया जा रहा है।
2. अप्रैल 2022 से रुका हुआ था दैनिक संशोधन
भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक बाजार के झटकों से बचाने के लिए अप्रैल 2022 से दैनिक मूल्य संशोधन (Daily Price Hike) की नीति को अस्थायी रूप से रोक दिया था। हालांकि, देश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद, कंपनियों ने अपने घाटे को कम करने और आर्थिक संतुलन बनाने के लिए दोबारा कीमतों को बढ़ाना शुरू कर दिया है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, लगाया ‘चुनावी रणनीति’ का आरोप
इस बीच, ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर देश में एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि यह पूरी तरह से एक “चुनावी पैटर्न” है। विपक्ष का कहना है कि जब तक देश में चुनाव चल रहे थे, तब तक सरकार ने जानबूझकर तेल कंपनियों को कीमतें बढ़ाने से रोके रखा और जैसे ही चुनाव समाप्त हुए, सारा आर्थिक बोझ आम नागरिकों और देश के नौकरीपेशा वर्ग पर डाल दिया गया।
पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई इस लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आने वाले दिनों में माल ढुलाई (Freight Charges) पर पड़ेगा। इसके कारण फल, सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है, जो देश की खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) को और बढ़ा सकती है। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने मासिक बजट को इसी अनुसार प्लान करें।
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