
Parliament Winter Session 2025:
संसद का शीतकालीन सत्र 2025 अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और 21 दिसंबर को भी लोकसभा व राज्यसभा में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। जहां एक ओर सरकार ने अपने विकास और सुधार एजेंडे को मजबूती से रखा, वहीं विपक्ष ने महंगाई, रोजगार और किसानों से जुड़े सवालों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार की प्राथमिकता कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना रही है। इनमें आर्थिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन कानूनों का मकसद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाना है।
विपक्षी दलों ने सत्र के दौरान यह आरोप लगाया कि सरकार अहम मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। खासकर महंगाई, बेरोजगारी और ग्रामीण संकट जैसे विषयों को लेकर विपक्ष ने बार-बार सदन में हंगामा किया। कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हुआ।
लोकसभा में 21 दिसंबर को हुई चर्चा के दौरान वित्त और गृह से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना था कि जमीनी स्तर पर जनता को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। इसके जवाब में सरकार ने आंकड़ों के साथ अपनी नीतियों का बचाव किया और कहा कि बीते वर्षों में अर्थव्यवस्था में स्थिरता आई है।
राज्यसभा में भी माहौल कुछ अलग नहीं रहा। वहां विपक्ष ने संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग ही विकास की कुंजी है और किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शीतकालीन सत्र 2025 आगामी चुनावी साल को देखते हुए बेहद अहम है। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश में जुटे नजर आए। संसद में दिए गए बयान और बहसें आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को दिशा दे सकती हैं।
21 दिसंबर का दिन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि सत्र समाप्त होने से पहले कई लंबित मुद्दों को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, कुछ विधेयकों पर सहमति बन पाना मुश्किल नजर आया, जिससे यह साफ है कि आने वाले सत्रों में भी राजनीतिक टकराव जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, संसद का शीतकालीन सत्र 2025 सरकार और विपक्ष दोनों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया है। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सत्र के अंत तक कितने अहम फैसले लिए जाते हैं और वे आम लोगों के जीवन को किस तरह प्रभावित करेंगे।



