
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच विदेशी समर्थन को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विपक्ष पर देश को अस्थिर करने के लिए विदेशी ताकतों से मदद लेने और सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने का आरोप लगाए जाने के बाद राहुल गांधी ने पलटवार किया है। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री को खुले मंच पर बहस करने की चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी खुद विदेशी मदद के सहारे प्रधानमंत्री बने और अब भी उसी के दम पर सत्ता में बने हुए हैं।
राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी को देश से झूठ बोलना बंद करना चाहिए। राहुल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की आर्थिक व्यवस्था विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन पर निर्भर है तथा विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी उनका समर्थन करते हैं।
कांग्रेस नेता ने इन आरोपों पर प्रधानमंत्री को किसी भी मंच पर, किसी भी समय खुली बहस करने की चुनौती दी। राहुल गांधी के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री ने गुजरात में राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम के दौरान विपक्ष की भूमिका और विदेशी संपर्कों को लेकर सवाल उठाए थे।
राहुल गांधी ने X पर PM मोदी को दी बहस की चुनौती
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी विदेशी मदद के कारण प्रधानमंत्री बने और उसी तरह के समर्थन से अब तक पद पर बने हुए हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन से चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री के पक्ष में खड़े हैं।
अपने आरोपों को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह इस पूरे मुद्दे पर प्रधानमंत्री के साथ सार्वजनिक बहस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने किसी भी मंच और किसी भी समय चर्चा करने की बात कही। राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस चुनौती को स्वीकार करने से बचेंगे, क्योंकि उन्हें उन बातों का डर है, जिनकी जानकारी राहुल गांधी होने का दावा करते हैं।
हालांकि, राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में विदेशी मदद से जुड़े आरोपों के समर्थन में विस्तृत दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक नहीं किए। इसलिए उनके बयान को फिलहाल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गुजरात में PM मोदी ने विपक्ष को बताया था ‘अवरोध पक्ष’
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम को संबोधित किया था। यह आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष की राजनीति और उसकी कार्यशैली पर तीखा हमला बोला।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों का विरोध करना और उनकी कमियों को सामने लाना है। लेकिन उनके अनुसार, देश में विपक्ष अपनी भूमिका निभाने के बजाय विकास कार्यों में बाधा डालने वाली ताकत बन गया है।
मोदी ने विपक्ष के लिए ‘विरोध पक्ष’ के बजाय ‘अवरोध पक्ष’ शब्द का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि विपक्ष अपनी निराशा और हताशा के कारण देश के विकास में रुकावट पैदा कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक विरोध के बजाय बाधा डालने वाली राजनीति बताया।
उन्होंने विपक्ष पर संविधान की मर्यादाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, कुछ ताकतें देश को बांटने और समाज में विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी गतिविधियों और उनके पीछे काम कर रहे लोगों को पहचानने की अपील की।
विदेश में किससे मिल रहे हैं लोग? PM मोदी ने उठाए सवाल
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं के विदेश दौरों और विदेशी संपर्कों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना पूछा कि विदेशों में कौन किससे गुप्त रूप से मुलाकात कर रहा है और भारत विरोधी ताकतें किसका समर्थन कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी सवाल किया कि कौन लोग भारत के दुश्मनों की भाषा बोल रहे हैं। उनके इस बयान को राहुल गांधी के विदेशी दौरों के संदर्भ में देखा गया। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में राहुल गांधी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था।
मोदी ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल भारत की छवि खराब करने और देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश बाहरी चुनौतियों का समाधान खोजने में लगा था, तब कुछ आंतरिक ताकतें झूठ और अफवाहों के जरिए अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही थीं। उनके मुताबिक, देश के नागरिकों ने एकजुट होकर ऐसी कोशिशों का सामना किया।
विदेशी समर्थन को लेकर आमने-सामने आए मोदी और राहुल
प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के ताजा बयानों में विदेशी समर्थन का मुद्दा सबसे प्रमुख है। मोदी ने विपक्ष के कुछ नेताओं के विदेशी संपर्कों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारत विरोधी ताकतें उन्हें समर्थन दे रही हैं। इसके जवाब में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर ही विदेशी समर्थन के सहारे सत्ता में बने रहने का आरोप लगा दिया।
दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं। अभी तक इन दावों के समर्थन में इस बहस के दौरान कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया गया है। ऐसे में इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित नेताओं के बयानों के रूप में देखना जरूरी है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को सार्वजनिक बहस की चुनौती देकर विवाद को और आगे बढ़ा दिया है। अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित हो सकती है कि क्या दोनों नेता विदेशी समर्थन और राजनीतिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर किसी साझा मंच पर चर्चा के लिए तैयार होंगे।
2019 में भी राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे पर दी थी बहस की चुनौती
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सार्वजनिक बहस की चुनौती का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2019 में भी राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री को आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी थी।
उस समय राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थे। उन्होंने 2 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री मोदी से राफेल सौदे पर करीब 20 मिनट की व्यक्तिगत बहस करने की मांग की थी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की तरह दोनों नेताओं के बीच सीधी चर्चा का सुझाव भी दिया था।
राहुल गांधी ने उस समय राफेल विमान सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस का आरोप था कि इस सौदे में अनियमितताएं हुई हैं और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और विमान निर्माता कंपनी दसॉ ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया था।
इस विवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री को राफेल सौदे पर सार्वजनिक रूप से सवालों का जवाब देना चाहिए। हालांकि, उस समय भी दोनों नेताओं के बीच इस तरह की कोई औपचारिक बहस नहीं हुई थी।
2014 में आडवाणी ने भी किया था PM उम्मीदवारों की बहस का समर्थन
भारत में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों के बीच सार्वजनिक बहस कराने का विचार केवल कांग्रेस की ओर से ही नहीं आया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी इस तरह की बहस के विचार का समर्थन किया था।
2 मई 2014 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आडवाणी ने सुझाव दिया था कि चुनाव आयोग को प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के बीच चर्चा आयोजित करनी चाहिए।
उनका मानना था कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की रैलियों के बजाय प्रमुख दावेदारों के बीच सार्वजनिक चर्चा होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो सकती है। आडवाणी ने कहा था कि यदि पहले आम चुनाव के बाद से ही ऐसी व्यवस्था लागू होती, तो भारतीय लोकतंत्र और मजबूत हुआ होता।
इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि चुनावी राजनीति में सार्वजनिक बहस का विचार पहले भी अलग-अलग राजनीतिक नेताओं के बीच चर्चा का विषय रहा है। हालांकि, भारत में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के बीच अमेरिका की तरह नियमित और आधिकारिक टेलीविजन बहस कराने की कोई स्थापित परंपरा नहीं है।
क्या PM मोदी स्वीकार करेंगे राहुल गांधी की चुनौती?
राहुल गांधी की ताजा चुनौती के बाद अब सबकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की प्रतिक्रिया पर रहेगी। कांग्रेस नेता चाहते हैं कि विदेशी समर्थन और राजनीतिक प्रभाव को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंच पर जवाब दें।
वहीं, प्रधानमंत्री पहले ही विपक्ष के विदेशी संपर्कों, सोशल मीडिया पर कथित दुष्प्रचार और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर अपनी बात रख चुके हैं।
फिलहाल दोनों नेताओं के बीच खुली बहस को लेकर कोई सहमति या आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। ऐसे में यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या आगे किसी सार्वजनिक चर्चा का रूप लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



