
दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने पश्चिम बंगाल स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (SRFTI) के छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है। संस्थान में हुई कथित हिंसा के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे विद्यार्थियों का समर्थन करते हुए शाह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी विचारधारा और नीतियों से असहमति रखने वाले लोगों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।
नसीरुद्दीन शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब SRFTI परिसर में हुई हिंसा और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विद्यार्थी संस्थान के कुलपति संतोष अजमेरा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिसर में हुई घटनाओं के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो के जरिए छात्रों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को उठाने वाले विद्यार्थियों को कारण बताओ नोटिस, निगरानी और धमकियों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिनेता ने देश के नागरिकों से भी अपील की कि वे छात्रों की मांगों का समर्थन करें।
नसीरुद्दीन शाह ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो संदेश में BJP की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद पार्टी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने SRFTI के छात्रों को इस कथित बदले की राजनीति का नया निशाना बताया।
अभिनेता के मुताबिक, संस्थान के विद्यार्थी प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों को कारण बताओ नोटिस दिए गए, उनकी निगरानी की गई और उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा। शाह ने यह भी कहा कि छात्रों को छात्रावास खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, ये आरोप अभिनेता के बयान पर आधारित हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब और स्वतंत्र पुष्टि अलग से देखना जरूरी है।
शाह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल की नीतियों से असहमति रखने वाले लोगों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करना उचित नहीं है। उनके बयान ने SRFTI विवाद को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
फिल्म संस्थान के छात्रों के समर्थन में उतरे अभिनेता
नसीरुद्दीन शाह ने अपने संदेश में कहा कि देश के युवा फिल्मकार भविष्य में समाज, देश और मौजूदा परिस्थितियों को अपनी फिल्मों के जरिए सामने लाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने और अपनी बात रखने वाले युवाओं के रूप में पेश किया।
अभिनेता ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल अपने पक्ष में प्रचार को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के फिल्मकारों को प्रभावित करने या डराने की कोशिश भी कर रहा है। उनके अनुसार, युवाओं को डराकर उनकी आवाज दबाना आसान नहीं होगा।
शाह ने देश के उन नागरिकों से भी छात्रों के समर्थन में आगे आने की अपील की, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास रखते हैं। उनका कहना था कि विद्यार्थियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उनके इस बयान के बाद संस्थान में चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत में चर्चा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, विवाद के सभी पहलुओं को समझने के लिए छात्रों, संस्थान प्रशासन और संबंधित संगठनों के पक्षों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
12 अक्टूबर से कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दे रहे छात्र
सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के विद्यार्थी 12 अक्टूबर से कुलपति संतोष अजमेरा के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर प्रशासन की जवाबदेही तय कराना है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुलपति के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि परिसर में सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान होना चाहिए और हिंसा की घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
विद्यार्थियों का विरोध ऐसे समय जारी है, जब संस्थान ने नियमित शैक्षणिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने और छात्रावास खाली करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।
छात्रों का कहना है कि जब तक परिसर में सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में क्या हुआ था?
SRFTI परिसर में विवाद की शुरुआत सितंबर के अंत में हुई घटनाओं से जुड़ी बताई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर को एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) के सदस्यों के बीच झड़प हुई थी। ABGP को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध उपभोक्ता जागरूकता संगठन बताया गया है।
इसके बाद 4 अक्टूबर को संस्थान परिसर में एक और विवाद सामने आया। इस बार बंगीय हिंदू जागरण मंच के सदस्यों की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान झड़प होने की खबर आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के बाद कुछ लोगों ने संस्थान का गेट जबरन खोलने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और बाहरी समूहों की गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े किए।
इन घटनाओं के बाद छात्रों ने परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासन से जवाब मांगने पर जोर दिया। हालांकि, दोनों घटनाओं में शामिल सभी पक्षों की भूमिका और विवाद के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
SRFTI ने 13 नवंबर तक शैक्षणिक गतिविधियां रोकीं
संस्थान की ओर से 16 अक्टूबर को जारी एक नोटिस में फिल्म, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया विभागों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां 13 नवंबर तक स्थगित करने की जानकारी दी गई थी। नोटिस में विद्यार्थियों को 24 घंटे के भीतर परिसर स्थित छात्रावास खाली करने का निर्देश भी दिया गया।
संस्थान में दुर्गा पूजा की छुट्टियां 21 अक्टूबर तक निर्धारित थीं। लेकिन छात्रों का धरना छुट्टियों के बाद भी जारी रहा। विद्यार्थियों ने परिसर की सुरक्षा और हिंसा की घटनाओं पर जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को अपनी मांगों का प्रमुख हिस्सा बताया है।
शैक्षणिक गतिविधियों के स्थगन और छात्रावास खाली करने के निर्देशों से विवाद और गंभीर हो गया है। छात्रों के लिए यह केवल पढ़ाई का मामला नहीं, बल्कि परिसर में सुरक्षित माहौल और प्रशासन के साथ संवाद का मुद्दा भी बन गया है।
हालांकि, संस्थान की ओर से जारी नोटिस के पीछे प्रशासनिक कारणों का पूरा विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस कदम को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संस्थान का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कैंपस सुरक्षा पर बहस
SRFTI विवाद ने शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, प्रशासन की जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज कर दी है। फिल्म और मीडिया संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भविष्य में समाज, राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। ऐसे में परिसर में स्वतंत्र माहौल और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण का महत्व बढ़ जाता है।
नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में इसी संदर्भ में छात्रों का समर्थन किया है। उन्होंने युवाओं की आवाज को दबाने के प्रयासों का विरोध करते हुए नागरिकों से उनके साथ खड़े होने की अपील की।
दूसरी ओर, परिसर में हुई झड़पों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच भी आवश्यक है। किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और उचित प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए।
इस विवाद का समाधान तभी संभव होगा, जब छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए, घटनाओं की जांच की जाए और संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल SRFTI के छात्र कुलपति के इस्तीफे और परिसर में हुई हिंसा के मामलों में जवाबदेही की मांग पर अड़े हुए हैं। संस्थान ने नियमित शैक्षणिक गतिविधियां 13 नवंबर तक स्थगित करने और छात्रावास खाली करने के निर्देश जारी किए हैं, जबकि विद्यार्थी अपना धरना जारी रखे हुए हैं।
नसीरुद्दीन शाह के समर्थन से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक ध्यान मिल सकता है। हालांकि, आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थान प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और परिसर में सुरक्षा से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।
कुल मिलाकर, SRFTI में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब केवल परिसर की घटनाओं तक सीमित नहीं रहा है। नसीरुद्दीन शाह के बयान ने इसे राजनीतिक आलोचना, छात्र अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बना दिया है। अब सभी की निगाहें संस्थान प्रशासन के अगले कदम और छात्रों के आंदोलन पर टिकी हैं।



