
Mallikarjun Kharge on Inflation: देश में बढ़ती महंगाई और चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को सवाल उठाया कि जब देश में चीनी का स्टॉक पिछले नौ वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और कीमतों में तेजी देखी जा रही है, तब गन्ने और अनाज से एथेनॉल उत्पादन की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।
खरगे ने कहा कि त्योहारों के मौसम से ठीक पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी के उत्पादन, स्टॉक, आयात और E20 पेट्रोल नीति को लेकर कई सवाल पूछे। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरा और दावा किया कि रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजों की कीमतें बढ़ने से आम आदमी और मध्यम वर्ग का घरेलू बजट बिगड़ गया है।
चीनी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस के सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार से चीनी की कीमतों को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, इसके बावजूद देश में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है।
खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि हालात ऐसे क्यों बने कि चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और करीब 10 लाख टन चीनी को शुल्क मुक्त आयात करने की स्थिति सामने आई। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर त्योहारों के समय आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि जब घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता है और विदेशों से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में करने वाली नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जाती।
E20 नीति को लेकर भी उठाया सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग से जुड़ी E20 नीति को भी चीनी की उपलब्धता और कीमतों के संदर्भ में सवालों के घेरे में रखा। उनका तर्क है कि अगर देश में चीनी का स्टॉक कम हो रहा है और कीमतें बढ़ रही हैं, तो गन्ने के एक हिस्से को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने के प्रभाव पर सरकार को विचार करना चाहिए।
खरगे ने सरकार से पूछा कि एक तरफ चीनी उत्पादन और स्टॉक में कमी की बात सामने आ रही है, दूसरी तरफ विदेश से चीनी आयात करनी पड़ रही है और गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की आत्मनिर्भरता की नीति से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि त्योहारों के दौरान जब चीनी की मांग बढ़ती है, उस समय कीमतों में वृद्धि आम उपभोक्ता के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही है।
जयराम रमेश ने महंगाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना
चीनी की कीमतों के अलावा कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में कथित वृद्धि को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर अब केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि साबुन, डिटर्जेंट, टूथपेस्ट, बिस्किट से लेकर टायर और कारों तक दिखाई दे रहा है।
रमेश ने अपने पोस्ट में कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आटा, चावल, जीरा, हल्दी और विभिन्न प्रकार के खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक, आटे की कीमत 32 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम, चावल 42 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति किलोग्राम और जीरे की कीमत 180 रुपये से बढ़कर 380 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
उन्होंने हल्दी, सरसों तेल, मूंगफली तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी का दावा किया। चीनी की कीमतों में भी उन्होंने पिछले कुछ समय में करीब 40 प्रतिशत तक की वृद्धि का दावा किया।
हालांकि, इन कीमतों को लेकर अलग-अलग बाजारों और क्षेत्रों में वास्तविक खुदरा कीमतें अलग हो सकती हैं। कांग्रेस द्वारा बताए गए आंकड़े पार्टी के राजनीतिक आरोपों का हिस्सा हैं।
‘आम आदमी की थाली पर पड़ रहा महंगाई का असर’
जयराम रमेश ने कहा कि आम लोगों की आय सीमित है, लेकिन हर महीने घरेलू खर्च बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई का सीधा असर मध्यम वर्ग के घरेलू बजट और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए जीवन मुश्किल होता जा रहा है, जबकि सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है।
कांग्रेस नेताओं ने महंगाई के मुद्दे को आगामी त्योहारों से भी जोड़कर उठाया है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ने पर अगर कीमतें भी बढ़ती हैं, तो इसका सबसे ज्यादा असर सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ता है।
Vande Mataram विवाद पर भी खरगे का पलटवार
महंगाई के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे ने Vande Mataram विवाद पर भी केंद्र सरकार और बीजेपी को जवाब दिया। यह विवाद उस समय और तेज हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस द्वारा Vande Mataram के केवल दो अंतरों को गाने के फैसले पर सवाल उठाया और इसे राष्ट्रविरोधी बताया।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस Vande Mataram के उसी संक्षिप्त रूप का पालन कर रही है, जिस पर देश के प्रमुख नेताओं ने सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के बीच इस विषय पर विचार हुआ था।
खरगे ने सवाल किया कि अगर उस समय राष्ट्रीय नेताओं ने Vande Mataram के छोटे संस्करण को स्वीकार किया था, तो आज उसी का पालन करने वालों को राष्ट्रविरोधी कैसे कहा जा सकता है।
’90 साल से कोई विवाद नहीं था, अब मुद्दा क्यों?’
खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि अगर Vande Mataram को लेकर कोई गंभीर समस्या थी तो पिछले कई दशकों में इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसका सेवा दल लंबे समय से Vande Mataram गाते रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रगान Jana Gana Mana का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका भी पूरा स्वरूप लंबा है, लेकिन वर्तमान में उसका निर्धारित हिस्सा ही गाया जाता है। इसी तरह Vande Mataram के दो अंतरों को गाने की परंपरा का पालन किया जा रहा है।
खरगे ने कहा कि अगर राष्ट्रीय नेताओं द्वारा तय किए गए स्वरूप का पालन करना गलत है, तो फिर उन नेताओं के निर्णय पर भी सवाल उठता है। उन्होंने इस पूरे विवाद को देश में ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
‘देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और महंगाई पर ध्यान दे सरकार’
कांग्रेस अध्यक्ष ने Vande Mataram विवाद के बीच सरकार से महंगाई, रोजगार, निवेश और गरीबों की आजीविका जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवाद खड़े करने के बजाय सरकार को शिक्षा, रोजगार और निवेश बढ़ाने तथा गरीबों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर काम करना चाहिए।
खरगे ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
तेलंगाना CM की अमेरिका यात्रा को अनुमति नहीं मिलने पर भी सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा को राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विदेश जाकर निवेशकों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात कर सकते हैं और राज्य में उद्योग तथा रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
खरगे के अनुसार, ऐसी यात्राओं का उद्देश्य राज्य और देश में निवेश लाना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा यात्रा की अनुमति नहीं देना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की यात्रा के जरिए संभावित निवेशकों से बातचीत की जा सकती है और नए उद्योग स्थापित करने के लिए अवसर तलाशे जा सकते हैं।
कांग्रेस ने कहा- महंगाई पर जवाब दे सरकार
महंगाई, चीनी की कीमत, E20 नीति और Vande Mataram विवाद को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि सरकार को राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ आम जनता की आर्थिक परेशानियों पर भी जवाब देना चाहिए।
दूसरी ओर, चीनी की कीमतों और एथेनॉल नीति को लेकर उठाए गए सवालों का व्यापक संदर्भ उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, घरेलू मांग, निर्यात-आयात और सरकारी नीतियों से जुड़ा है। ऐसे में कीमतों में बदलाव के पीछे केवल एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय इन सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।
फिलहाल कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम जनता बढ़ते घरेलू खर्च से परेशान है और सरकार को कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। खरगे ने अपने बयान में कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।



