
Sheikh Hasina Return News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। भारत में निर्वासन का जीवन बिता रहीं हसीना ने कहा है कि वह इस साल दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वदेश लौटने के बाद वह अदालत के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण (सरेंडर) करेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तार किया जाए या फिर उनके सामने किसी भी तरह का खतरा क्यों न हो।
करीब एक घंटे तक दिए गए एक साक्षात्कार में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपने जीवन को लेकर कोई भ्रम नहीं है। उनके शब्दों में, “हो सकता है कि मुझे लौटते ही गिरफ्तार कर लिया जाए, यहां तक कि मेरी हत्या भी कर दी जाए। लेकिन मैं अपनी आखिरी सांस अपनी मातृभूमि में लेना चाहती हूं, जहां मेरे माता-पिता की कब्र है और जहां उनके बलिदान की यादें जुड़ी हैं।”
दो साल पहले सत्ता से हटने के बाद भारत आई थीं हसीना
साल 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े छात्र आंदोलन और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। करीब दो दशक तक अलग-अलग कार्यकाल में प्रधानमंत्री रहने के बाद उन्हें देश छोड़कर भारत आना पड़ा।
इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। इसी दौरान बांग्लादेश की अंतरिम व्यवस्था और अदालतों ने उनके खिलाफ कई गंभीर मामलों की सुनवाई की। नवंबर में युद्ध अपराधों से जुड़े एक मामले में उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि शेख हसीना लगातार इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज करती रही हैं।
दिसंबर में वापसी कर अदालत में सरेंडर करने की तैयारी
शेख हसीना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी वापसी की समय-सीमा का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि केवल वह ही नहीं, बल्कि उनकी पार्टी आवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ बांग्लादेश लौटेंगे और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगे।
उनका कहना है कि यदि कानून और न्याय व्यवस्था निष्पक्ष है तो उन्हें अदालत में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद लोगों के सामने पूरी सच्चाई आ जाएगी।
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तारीख को लौटेंगी या किस अदालत में सरेंडर करेंगी।
आवामी लीग पर प्रतिबंध और नेताओं पर कार्रवाई
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग इस समय बांग्लादेश में गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और उसके कई नेताओं पर अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
हसीना का आरोप है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। कई नेता गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपे हुए हैं, जबकि कई कार्यकर्ताओं पर हमले और कानूनी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता को करना चाहिए।
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी रहेगी नजर
शेख हसीना की वापसी केवल बांग्लादेश की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी पड़ सकता है।
हसीना के भारत आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखने को मिला था। बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करता रहा है।
भारत सरकार ने पहले कहा था कि वह इस अनुरोध का कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर अध्ययन कर रही है और नई सरकार के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना चाहती है।
अब यदि हसीना स्वयं लौटती हैं, तो प्रत्यर्पण को लेकर चल रही बहस भी समाप्त हो सकती है।
‘मैं खुद लौटूंगी, किसी समझौते की जरूरत नहीं’
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी वापसी को लेकर किसी विदेशी सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत या किसी अन्य देश के साथ इस विषय पर कोई गुप्त समझौता नहीं हुआ है।
उनके अनुसार, बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनावी अधिकार और उनकी पार्टी के भविष्य जैसे मुद्दे किसी बंद कमरे में होने वाली बातचीत का विषय नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने तय किया है कि वह खुद अपने देश लौटकर कानून का सामना करेंगी।
लंबे राजनीतिक सफर पर भी की चर्चा
शेख हसीना ने अपने राजनीतिक जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 1981 में निर्वासन से लौटने के बाद भी उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया था। सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलनों के दौरान उन्होंने जेल की सजा भी काटी थी।
इसके अलावा वर्ष 2007 में भी उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा होने के बाद उन्होंने चुनाव जीता और फिर प्रधानमंत्री बनीं।
हसीना ने कहा कि जेल जाना उनके लिए नया अनुभव नहीं है। यदि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए फिर जेल जाना पड़े, तो वह इसके लिए भी तैयार हैं।
‘सरकार से गलतियां हो सकती हैं, फैसला जनता करे’
साक्षात्कार के दौरान शेख हसीना ने स्वीकार किया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली किसी भी सरकार से गलतियां हो सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी सरकार का मूल्यांकन अदालतों या राजनीतिक विरोधियों की बजाय जनता को करना चाहिए।
उनका कहना था कि यदि उनकी सरकार ने अच्छा काम नहीं किया, तो जनता चुनाव में इसका फैसला करेगी। लेकिन किसी राजनीतिक दल को पूरी तरह खत्म कर देना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आवामी लीग ने वास्तव में गलतियां की हैं, तो जनता को चुनाव के जरिए निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए।
निर्वासन में भी जारी है राजनीतिक गतिविधियां
भारत में रहने के बावजूद शेख हसीना ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं की हैं। उन्होंने बताया कि वह ऑनलाइन माध्यम से लगातार अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क में हैं।
उनके मुताबिक, अब तक वह बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से लगभग 125 क्षेत्रों के नेताओं के साथ डिजिटल बैठकों में हिस्सा ले चुकी हैं। इन बैठकों का उद्देश्य पार्टी का पुनर्गठन करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि यदि अदालत उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं भी देती, तब भी उनकी पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाती रहेगी।
क्या बांग्लादेश की राजनीति में फिर लौटेंगी शेख हसीना?
दिसंबर में संभावित वापसी की घोषणा के बाद बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर गर्माने लगी है। यदि शेख हसीना वास्तव में अपने देश लौटती हैं और अदालत में आत्मसमर्पण करती हैं, तो यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
उनकी वापसी से एक ओर समर्थकों में नई उम्मीद पैदा हो सकती है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विरोधियों के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बांग्लादेश की सरकार, न्यायपालिका और जनता इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखती है।



