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Rahul Gandhi ‘Chhatron Ki Goonj’: कोटा रैली के बाद राहुल गांधी ने लॉन्च किया देशव्यापी अभियान ‘छात्रों की गूंज’, कहा— ‘एक्सटॉर्शन मशीन बन चुका है एजुकेशन सिस्टम’

18 जून, 2026 | नई दिल्ली/कोटा | Rahul Gandhi ‘Chhatron Ki Goonj: कोटा में छात्रों के महासम्मेलन को संबोधित करने के ठीक एक दिन बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने देश के युवाओं और छात्रों के हक में एक बहुत बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को राहुल गांधी ने आधिकारिक तौर पर ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) नामक एक देशव्यापी डिजिटल और जमीनी अभियान की शुरुआत की।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली, शिक्षा की आसमान छूती लागत और लगातार बढ़ती बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर देश के करोड़ों छात्रों की आवाज को सरकार के कानों तक सीधे पहुंचाना है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस मुहिम से जुड़ा एक ऑनलाइन लिंक साझा करते हुए देश के युवाओं से इस डिजिटल याचिका (Petition) पर हस्ताक्षर करने और अपने सुझाव सीधे भेजने की अपील की है।

“अगर इस सिस्टम ने आपके सपने तोड़े हैं, तो यह आपकी आवाज है” — राहुल गांधी

राहुल गांधी ने इस अभियान को सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम मानने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के लिए एक ऐसा मजबूत मंच है जहां वे सस्ती शिक्षा, पारदर्शी व निष्पक्ष परीक्षाएं और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों के लिए अपनी मांग बुलंद कर सकते हैं।

युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ते हुए राहुल गांधी ने ‘X’ पर लिखा:

“यदि आप कभी भी पेपर लीक, परीक्षा घोटालों या भारी-भरकम फीस के शिकार हुए हैं; अगर इस मौजूदा शिक्षा व्यवस्था ने आपके और आपके परिवार के सुनहरे सपनों को बेरहमी से कुचला है; और अगर आपके माता-पिता ने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई आपकी पढ़ाई में झोंक दी है, तो मानकर चलिए कि ‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि आपकी अपनी खुद की आवाज है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस आंदोलन से जुड़ना बेहद आसान है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें, अपना नाम भरें, अपने विचार साझा करें और इस याचिका पर दस्तखत करें। जितने ज्यादा हस्ताक्षर होंगे, हमारे छात्रों की गूंज उतनी ही दमदार और तेज होगी।”

कोटा महावैली का असर: “यह सिलेक्शन नहीं, रिजेक्शन सिस्टम है”

इस नेशनल कैंपेन की लॉन्चिंग बुधवार को राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में हुई राहुल गांधी की विशाल रैली के ठीक बाद हुई है। कोटा में देश भर से आए लाखों मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्रों से सीधे संवाद करते हुए राहुल गांधी ने वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यवस्था की खामियों का बेहद कड़ा और तार्किक विश्लेषण किया था।

राहुल गांधी ने कोटा की जनसभा में सीधे तौर पर आरोप लगाया कि आज का एजुकेशन सिस्टम छात्रों को चुनने (Selection) के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बाहर निकालने (Rejection System) के लिए डिजाइन किया गया है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों पर असहनीय आर्थिक और मानसिक बोझ डाल रहा है।

राहुल गांधी के भाषण के मुख्य अंश:

  • एजुकेशन सिस्टम नहीं, जबरन वसूली की मशीन: राहुल गांधी ने कहा, “भारत की शिक्षा व्यवस्था आज एक ‘एक्सटॉर्शन मशीन’ (जबरन वसूली का जरिया) बनकर रह गई है। हम एक ऐसा सिस्टम चाहते हैं जो आपको बिना किसी डर के बड़े सपने देखने की आजादी दे। आज हमारे देश का युवा बहुत अधिक तनाव, दर्द और मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहा है।”

  • सफलता की कोई गारंटी नहीं: उन्होंने कहा कि यह ढांचा बच्चों को सिर्फ कुछ सीमित करियर विकल्पों की तरफ धकेलता है। स्कूल, महंगे कोचिंग सेंटरों और प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर परिवारों से लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं, लेकिन इतनी बड़ी कीमत चुकाने के बाद भी भविष्य या सफलता की कोई गारंटी नहीं मिलती।

  • यह आपके भविष्य की लड़ाई है: राहुल ने अपनी बात की शुरुआत में ही स्पष्ट किया था, “यह कोई पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं है। यह मीटिंग आपके बारे में है, उस युवा पीढ़ी के बारे में है जो एक सुरक्षित भविष्य के लिए हर दिन संघर्ष कर रही है।”

NEET, UPSC और JEE के आंकड़ों से समझाया छात्रों का दर्द

कोटा के मंच से राहुल गांधी ने एसएससी (SSC), यूपीएससी (UPSC), रेलवे (RRB), जेईई (JEE) और नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन कठिन परीक्षाओं को ही सफलता का एकमात्र रास्ता बना दिया गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों या वैकल्पिक प्रतिभाओं को कोई सरकारी सहयोग नहीं मिलता।

उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा का एक बड़ा उदाहरण देते हुए कहा:

“अकेले नीट की परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र बैठते हैं, लेकिन सरकारी या अच्छी सीटों पर सिलेक्शन 1 लाख से भी कम बच्चों का होता है। यह अनुपात बेहद डराने वाला और असमान है। यह पूरी संरचना बच्चों में भयंकर एंग्जायटी (चिंता) और अवसाद पैदा कर रही है, जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।”

राहुल ने व्यवस्था में आमूलचूल (Structural) बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली का पहला काम हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का हौसला देना होना चाहिए और उसका दूसरा काम उस सपने को सच करने में छात्र की मदद करना होना चाहिए—चाहे वह सपना कुछ भी हो।

प्रयागराज, पटना और दिल्ली तक गूंजेगी ‘छात्रों की गूंज’

कांग्रेस पार्टी ने साफ किया है कि यह अभियान केवल कोटा या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI और युथ कांग्रेस (Youth Congress) इस अभियान को देश के हर राज्य, हर यूनिवर्सिटी और हर कोचिंग सेंटर तक लेकर जाएगी।

पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी संपर्क कार्यक्रम (Outreach Programme) के अगले चरणों में राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज), बिहार के पटना और देश की राजधानी दिल्ली में भी इसी तरह के बड़े छात्र सम्मेलनों और कंवेंशनों को संबोधित करेंगे। कांग्रेस इन कार्यक्रमों के जरिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने और कड़े कानून बनाने के लिए मजबूर करने की रणनीति पर काम कर रही है।

‘छात्रों की गूंज’ अभियान 2026: मुख्य बिंदु तालिका

अभियान का नाम मुख्य मुद्दे और एजेंडा राहुल गांधी के मुख्य हमले आगामी कार्यक्रम और शहर
छात्रों की गूंज (Chhatron Ki Goonj) पेपर लीक, महंगी शिक्षा, एग्जाम मिसमैनेजमेंट, और बेरोजगारी। वर्तमान शिक्षा प्रणाली एक ‘एक्सटॉर्शन मशीन’ और ‘रिजेक्शन सिस्टम’ है। इलाहाबाद (प्रयागराज), पटना, और दिल्ली में आगामी छात्र सम्मेलन।

नीट परीक्षा विवाद और देश के विभिन्न राज्यों में हुए पेपर लीक मामलों के बाद युवाओं में पनपे भारी गुस्से को कांग्रेस ने अब एक संगठित राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया है। राहुल गांधी का सीधे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों को उठाना और प्रयागराज व पटना जैसे बड़े छात्र गढ़ों का रुख करना यह संकेत देता है कि विपक्ष आगामी संसद सत्र में शिक्षा के बजट, कोचिंग रेगुलेशन और पेपर लीक विरोधी कानूनों पर सरकार को पूरी तरह से घेरने की तैयारी कर चुका है।

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के ऑनलाइन लिंक्स, प्रयागराज और पटना रैली की लाइव कवरेज, और देश की शिक्षा व्यवस्था व सरकारी नौकरियों से जुड़ी हर निष्पक्ष व सटीक लाइव ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल को फॉलो करना न भूलें।

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