
28 मई, 2026 | नई दिल्ली | Rahul Gandhi on Dharmendra Pradhan: कक्षा 12वीं के नतीजों के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी महासंग्राम में बदल चुका है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा परीक्षा परिणामों में “बड़े पैमाने पर हेरफेर और छेड़छाड़” (Massive Tampering) के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद, अब इस मामले में खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सीधे तौर पर मैदान में उतर आए हैं।
गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग (War of Words) देखने को मिली। जहाँ राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के सीधे इस्तीफे और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए विपक्ष के नेता को “हताश” और देश की तकनीकी प्रगति का विरोधी करार दिया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख सरकार ने पहली बार इस डिजिटल सिस्टम में कुछ गड़बड़ियों की बात को स्वीकार भी किया है।
राहुल गांधी का सीधा हमला: ‘प्रधान को बहुत पहले ही बर्खास्त कर देना चाहिए था’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर लिया। राहुल ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री सीधे तौर पर कक्षा 12वीं के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के जिम्मेदार हैं।
राहुल गांधी ने सरकार को घेरते हुए तीखे लहजे में कहा:
“अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सचमुच देश के छात्रों की परवाह होती, तो उन्होंने लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को बहुत पहले ही कैबिनेट से बर्खास्त (Sack) कर दिया होता।”
Dharmendra Pradhan ji, you can attack me all you want but it won’t absolve you of your crimes. Nor will it stop me from demanding answers for 18.5 lakh children.
Why was the CBSE OSM contract handed to COEMPT – a company already mired in controversy under its old name,… https://t.co/Xy8MbBTnTL
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 28, 2026
राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के सामने फिर से वही सवाल दोहराए कि आखिर क्यों ‘कोएम्प्ट’ (COEMPT) नाम की विवादित कंपनी— जो पहले तेलंगाना में ‘ग्लोबारेना’ के नाम से बड़े घपले में शामिल थी— को बिना बैकग्राउंड चेक किए सीबीएसई का इतना बड़ा ठेका दे दिया गया? राहुल ने कहा कि या तो शिक्षा मंत्री ने सब जानते हुए भी आंखें मूंद लीं, या फिर वे पूरी तरह नाकाम रहे; दोनों ही सूरतों में उनकी मिलीभगत साफ है।
शिक्षा मंत्री का पलटवार: ‘राहुल गांधी तकनीकी प्रगति के विरोधी हैं’
राहुल गांधी के इस चौतरफा हमले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने राहुल गांधी के 27 मई के बयानों और आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा।
धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए कहा:
“राहुल गांधी पूरी तरह से हताश और निराश (Frustrated) हो चुके हैं। वे भारत की तकनीकी प्रगति और डिजिटल बदलावों के सख्त खिलाफ हैं। इसीलिए वे देश की आधुनिक ऑन-स्क्रीन मार्किंग जैसी उन्नत व्यवस्था पर बेबुनियाद सवाल उठा रहे हैं।”
सरकार ने पहली बार मानी ‘गड़बड़ी’, छात्रों को दिया पूर्ण समाधान का भरोसा
भले ही राजनीतिक मोर्चे पर शिक्षा मंत्री आक्रामक दिखे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उन्होंने माना कि इस नए सिस्टम में कुछ तकनीकी कमियां आई हैं। शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वर्तमान में चल रही सीबीएसई कक्षा 12वीं की पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) प्रक्रिया में “कुछ विसंगतियां” (Some Discrepancies) पाई गई हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि सरकार इस तकनीकी चूक की पूरी जिम्मेदारी लेती है और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
सीबीएसई अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक:
गुरुवार को ही शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई के आला अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग की। बैठक के बाद उन्होंने आश्वासन दिया:
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हर शिकायत का होगा निपटारा: मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन को लेकर छात्रों या अभिभावकों की एक भी शिकायत (Grievance) को अनसुना नहीं छोड़ा जाएगा।
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तय होगी जवाबदेही: डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (OSM) में जिस भी स्तर पर लापरवाही या तकनीकी खामी पाई जाएगी, वहां जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कितना बड़ा है सीबीएसई का यह डिजिटल ऑपरेशन?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बार लागू किए गए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के विशाल पैमाने के आंकड़े भी सामने रखे, जिससे इसके प्रबंधन की चुनौतियों का अंदाजा लगाया जा सके:
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कुल छात्र: इस साल कक्षा 12वीं की परीक्षा में लगभग 17 लाख छात्र शामिल हुए थे।
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उत्तर पुस्तिकाएं: इन छात्रों की कुल मिलाकर करीब 98 लाख आंसर कॉपियां थीं।
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स्कैन किए गए पन्ने: डिजिटल जांच के लिए इस बार कुल 40 करोड़ पन्नों को स्कैन किया गया था, जिनका मूल्यांकन कंप्यूटर स्क्रीन पर किया गया।
सीबीएसई डिजिटल मार्किंग विवाद 2026: क्या हैं दोनों पक्षों के तर्क?
| विवादित बिंदु | राहुल गांधी (विपक्ष) का स्टैंड | धर्मेंद्र प्रधान (शिक्षा मंत्री) का जवाब | वर्तमान प्रशासनिक एक्शन |
| शिक्षा मंत्री की भूमिका | भविष्य बर्बाद करने का आरोप, पीएम मोदी से धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की मांग। | आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया; राहुल गांधी को तकनीक-विरोधी करार दिया। | शिक्षा मंत्री ने स्वयं जिम्मेदारी ली, सीबीएसई अधिकारियों के साथ की आपात बैठक। |
| अनुबंध (Contract) विवाद | तेलंगाना में विवादों में रही ग्लोबारेना (अब कोएम्प्ट) को ठेका देने पर तीखे सवाल। | टेंडर प्रक्रियाओं के तहत काम होने की बात; तकनीकी विकास को अवरुद्ध न करने की सलाह। | री-इवैल्युएशन में आ रही तकनीकी खामियों को सुधारने के कड़े निर्देश जारी। |
| मूल्यांकन का पैमाना | 18.5 लाख छात्रों के भविष्य और अंकों में बड़ी हेरफेर का दावा। | 17 लाख छात्रों की 98 लाख कॉपियों (40 करोड़ पन्ने) की सुरक्षा और पारदर्शिता का दावा। | सभी विसंगतियों को दूर करने और हर एक शिकायत को हल करने का लिखित भरोसा। |
सीबीएसई परीक्षा परिणाम और कॉपियों की डिजिटल जांच (OSM) का यह मामला अब पूरी तरह से ‘पॉलिटिकल हॉट पोटैटो’ बन चुका है। जहां राहुल गांधी इस मुद्दे के जरिए सीधे शिक्षा मंत्रालय और मोदी सरकार की प्रशासनिक पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, वहीं शिक्षा मंत्री ने कुछ गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। अब देखना यह होगा कि 40 करोड़ पन्नों के इस विशाल डिजिटल मूल्यांकन चक्र में सीबीएसई छात्रों की शिकायतों का निपटारा कितनी पारदर्शिता और तेजी के साथ करता है।
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