
तेहरान/वाशिंगटन | 25 मई, 2026 | US-Iran War: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए चल रही ‘महाडील’ की कूटनीति अब बेहद पेचीदा मोड़ पर पहुंच गई है। जहाँ एक तरफ अमेरिकी खेमा लगातार यह दावा कर रहा है कि युद्ध विराम का समझौता बिल्कुल नजदीक है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इन दावों पर पूरी तरह से ठंडा पानी फेर दिया है। ईरान ने वाशिंगटन की राजनीतिक अस्थिरता, विरोधाभासी बयानों और इजरायली हस्तक्षेप को मुख्य वजह बताते हुए कहा है कि अंतिम समझौते पर पहुंचना अभी भी एक टेढ़ी खीर है।
ईरानी वार्ता दल के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बकाई (Esmaeil Baghaei) ने तेहरान में आयोजित साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि केवल चर्चा आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि समझौता होने ही वाला है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने सोमवार को भी उम्मीद नहीं छोड़ी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अनसुलझे मुद्दों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है।
ईरानी प्रवक्ता का बयान: “बड़े हिस्से पर सहमति, लेकिन दस्तखत अभी दूर”
चर्चा की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा:
“यह कहना बिल्कुल सही है कि हमने बातचीत के एजेंडे में शामिल एक बहुत बड़े हिस्से (Large Portion) पर आपसी निष्कर्ष निकाल लिया है। लेकिन अगर कोई यह दावा कर रहा है कि इसका मतलब समझौते पर हस्ताक्षर होना ही है, तो ऐसा दावा पूरी तरह निराधार है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर चल रही कूटनीतिक अराजकता और बयानों का अंतर्विरोध इस प्रक्रिया को धीमा कर रहा है।”
ईरान ने अपनी शर्तों को बेहद सख्त कर दिया है। तेहरान का रुख साफ है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के इस शुरुआती समझौते (MoU) में लेबनान में पूर्ण युद्धविराम की शर्त को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।
डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो का रुख: “या तो बेहतरीन डील होगी या कुछ नहीं”
इधर वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से दबाव बढ़ता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता ईरान के सामने पूरी तरह घुटने टेकने जैसा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर लिखा:
“ईरान के साथ यह डील या तो बेहद शानदार और दूरगामी होगी, या फिर कोई डील होगी ही नहीं। मैं उन हारने वालों (Losers) की बातें नहीं सुनता जो एक ऐसे संवेदनशील विषय की आलोचना कर रहे हैं जिसके बारे में वे कुछ जानते ही नहीं हैं।”
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को भी उम्मीद जताई कि एक रास्ता निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था से अंतिम मंजूरी आने में समय लगता है। रुबियो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “या तो हमारे पास एक बेहतरीन समझौता होगा, या फिर हम इस मुद्दे से दूसरे तरीके से निपटेंगे। हालांकि हम एक शांतिपूर्ण और अच्छे समझौते को प्राथमिकता देते हैं।”
परमाणु मुद्दा और $12 बिलियन के फंड पर फंसा पेंच
इस प्रस्तावित समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) का कोई जिक्र नहीं है, जो ट्रंप के उस पुराने वादे के बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने ईरान के ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ की बात कही थी।
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परमाणु स्टॉकपाइल पर विवाद: वर्तमान समझौते में परमाणु मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, सिवाय इसके कि दोनों पक्ष अगले 60 दिनों में इस पर बातचीत शुरू करेंगे। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को खत्म करने की प्रतिबद्धता अभी जताए। लेकिन ईरान यूरेनियम को डाउन-ब्लेंड (कम संवर्धित) करने को तो तैयार है, पर उसे अमेरिका या रूस को सौंपने और यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल के प्रतिबंध को मानने से पूरी तरह इनकार कर चुका है। वह अधिकतम 5 साल के निलंबन पर अड़ा है।
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फ्रीज एसेट की बहाली: ईरान की मुख्य मांग कतर के बैंकों में फ्रीज पड़े उसके $12 बिलियन (लगभग 12 अरब डॉलर) के फंड को तुरंत जारी करने की है। इसी सिलसिले में ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्मती सोमवार को कतर पहुंचे हैं। ट्रंप के लिए यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि वे अतीत में बराक ओबामा द्वारा 2015 की परमाणु डील के समय ईरान को $1.7 बिलियन नकद देने की तीखी आलोचना कर चुके हैं।
हॉर्मुज जलमार्ग: “यह टोल टैक्स नहीं, नेविगेशन फीस है”
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान ने एक नया रणनीतिक और भाषाई स्टैंड लिया है। सोमवार को ओमान और ईरान के अधिकारियों के बीच इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर एक अहम बैठक हुई।
ईरानी प्रवक्ता बकाई ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि ईरान एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया:
“हम इस जलमार्ग का उपयोग मुक्त व्यापार और सुरक्षित जहाजरानी के लिए करने के पक्षधर हैं। लेकिन यदि हमारे द्वारा नेविगेशन सेवाएं और पर्यावरण सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं, तो उसके बदले नेविगेशन फीस (सेवा शुल्क) ली जाएगी। मीडिया इसके लिए ‘टोल टैक्स’ शब्द का इस्तेमाल न करे। शब्दों के चयन में सावधानी जरूरी है।”
हालांकि, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों (Gulf States) का मानना है कि यह केवल शब्दों का हेरफेर है, क्योंकि यदि वाणिज्यिक जहाजों के लिए ईरानी सेवाओं को लेना अनिवार्य किया गया, तो यह व्यावहारिक रूप से टोल टैक्स वसूलने जैसा ही होगा।
ईरान-अमेरिका कूटनीतिक गतिरोध 2026: एक नज़र में मुख्य विवाद
मिडल-ईस्ट क्राइसिस, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर हॉर्मुज समझौते के असर और देश-दुनिया की हर निष्पक्ष व सटीक लाइव ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल को फॉलो करना न भूलें।



