
Delhi Terror Attack Plot: देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ऐसे मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जिसके तार कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मॉड्यूल का मकसद दिल्ली और आसपास के इलाकों में बड़े हमले कर दहशत फैलाना था।
सूत्रों के मुताबिक इस नेटवर्क के निशाने पर दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर, दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक लोकप्रिय ढाबा और हरियाणा का सैन्य कैंप शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में कई राज्यों में छापेमारी कर बड़ी संख्या में संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी और संवेदनशील इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी है।
ISI से जुड़े मॉड्यूल का कैसे हुआ खुलासा?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में ‘गैंग बस्ट ऑपरेशन 2.0’ नाम से एक बड़ा अभियान चलाया था। इस अभियान के दौरान कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई। पुलिस के अनुसार इस ऑपरेशन में कुल 482 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे इनपुट मिले जिनसे पता चला कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ लोग पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी और वहां की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीमा पार भेजे थे।
दिल्ली के ऐतिहासिक मंदिर को बनाया गया था निशाना
मंदिर परिसर की रेकी कर भेजी गई तस्वीरें
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों में से एक ने दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर की रेकी की थी। उसने मंदिर परिसर की कई तस्वीरें और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी थी।
सूत्रों का कहना है कि मॉड्यूल की योजना मंदिर में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाने की थी। इसके लिए फायरिंग कर अफरा-तफरी मचाने की तैयारी की जा रही थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले की तारीख और तरीका क्या तय किया गया था।
धार्मिक स्थल को निशाना बनाने के पीछे क्या थी मंशा?
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि धार्मिक स्थल पर हमला कर सामाजिक तनाव और डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा सकती थी। ऐसे हमलों का उद्देश्य आम लोगों में भय फैलाना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना होता है।
दिल्ली-सोनीपत हाईवे के ढाबे पर ग्रेनेड हमले की योजना
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मॉड्यूल ने दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर मौजूद एक प्रसिद्ध ढाबे को भी निशाना बनाया था। यह ढाबा रोजाना हजारों लोगों से भरा रहता है और यहां यात्रियों की भारी भीड़ रहती है।
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को यहां ग्रेनेड हमला करने का जिम्मा दिया गया था ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके। जांच एजेंसियों का कहना है कि अगर यह साजिश सफल हो जाती तो बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती थी।
इस खुलासे के बाद हाईवे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। पुलिस लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
हरियाणा के सैन्य कैंप की भी हुई थी रेकी
हिसार सैन्य कैंप की वीडियो भेजने का आरोप
दिल्ली पुलिस की जांच में हरियाणा के हिसार स्थित एक सैन्य कैंप का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि मॉड्यूल से जुड़े लोगों ने कैंप के आसपास की वीडियो रिकॉर्डिंग की और उसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाया।
सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या सैन्य ठिकानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही थी। यदि ऐसा है तो मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से और गंभीर हो सकता है।
उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशन भी थे निशाने पर
सूत्रों के अनुसार कुछ पुलिस थाने भी इस मॉड्यूल की टारगेट लिस्ट में शामिल थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि इन हमलों का मकसद क्या था और किन इलाकों को निशाना बनाया जाना था।
‘गैंग बस्ट ऑपरेशन 2.0’ में पुलिस को क्या मिला?
दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे तक चले इस विशेष अभियान में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में करीब 1000 स्थानों पर छापेमारी की। पुलिस ने बताया कि इस दौरान बड़ी मात्रा में हथियार, नकदी और नशीले पदार्थ बरामद किए गए।
पुलिस के मुताबिक ऑपरेशन में 141 पिस्टल, 212 कारतूस, 79 चाकू, 24 वाहन, करीब 19 लाख रुपये नकद और 19 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। यह बरामदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियां क्यों हुईं सतर्क?
राजधानी में बढ़ाई गई निगरानी
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों, धार्मिक स्थलों और सैन्य परिसरों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीमा पार से मॉड्यूल संचालित करने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। यही वजह है कि साइबर ट्रैकिंग और खुफिया निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है।
आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां अब मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश के भीतर सक्रिय नेटवर्क किस तरह सीमा पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क में काम कर रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मॉड्यूल सिर्फ आतंकी हमलों की साजिश नहीं रचते, बल्कि समाज में डर और अस्थिरता फैलाने का भी प्रयास करते हैं।
दिल्ली पुलिस की समय रहते कार्रवाई से एक बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती भी बनकर सामने आया है।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस द्वारा ISI से जुड़े कथित मॉड्यूल का खुलासा देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि मंदिर, ढाबा और सैन्य कैंप जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की तैयारी की जा रही थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा खतरा टल गया, लेकिन इस घटना ने यह भी साफ कर दिया कि आतंकी नेटवर्क लगातार नए तरीकों से सक्रिय रहने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच और तेज होने की संभावना है।



