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India Oil Crisis: मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का बड़ा फैसला! रूस से बढ़ाई तेल खरीद

India Oil Crisis: मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि भारत जैसे बड़े आयातक देश को अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करना पड़ा है। बढ़ते तनाव के बीच भारत ने फिर से Russia से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है, जो अब उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का अहम स्रोत बनता जा रहा है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब Iran ने Qatar के एक प्रमुख गैस निर्यात केंद्र पर मिसाइल हमला किया, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका और बढ़ गई है।


कतर के LNG प्लांट पर हमला, सप्लाई पर बड़ा असर

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कतर के Ras Laffan इंडस्ट्रियल सिटी पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो दुनिया के सबसे बड़े LNG (Liquefied Natural Gas) एक्सपोर्ट हब में से एक है। यह प्लांट वैश्विक गैस सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।

इस हमले के बाद ईरान ने सऊदी अरब और UAE के तेल और गैस ठिकानों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दहशत का माहौल बन गया है।

भारत हर साल करीब 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें से लगभग 10-11 मिलियन टन कतर से आता है। ऐसे में इस हमले का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ना तय है।


होर्मुज स्ट्रेट में बाधा, सप्लाई चेन प्रभावित

ऊर्जा संकट को और बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण Strait of Hormuz है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है।

इस वजह से पहले ही LNG की सप्लाई पर दबाव था, लेकिन अब कतर के प्लांट पर हमले के बाद हालात और खराब हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्लांट को पूरी तरह ठीक होने में महीनों या साल भी लग सकते हैं।


तेल और गैस की कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमत 7% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि गैस की कीमतों में भी करीब 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।


भारत ने क्यों बढ़ाई रूस से तेल खरीद?

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। ऐसे में जब मिडिल ईस्ट से सप्लाई प्रभावित हुई, तो भारत के पास विकल्प सीमित हो गए।

यही कारण है कि भारत ने फिर से Russia से तेल खरीद बढ़ा दी है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, रूसी तेल इस समय भारत के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बन गया है।

Kpler के विश्लेषक सुमित रितोलिया का कहना है कि मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए रूस से आयात बढ़ाना जरूरी था।


रास्ता बदल रहे तेल टैंकर

इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण Aqua Titan नाम का एक रूसी टैंकर है, जो पहले चीन जा रहा था लेकिन रास्ते में ही अपना रूट बदलकर भारत की ओर आ गया।

यह टैंकर अब New Mangalore पहुंचने वाला है। इसके अलावा कम से कम सात और टैंकर भी चीन से अपना रुख बदलकर भारत की ओर आ चुके हैं।

यह दर्शाता है कि भारत ने तेजी से अपनी ऊर्जा रणनीति बदली है और रूसी तेल पर निर्भरता बढ़ा दी है।


अमेरिका की भूमिका और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

इस पूरे घटनाक्रम में Donald Trump की भूमिका भी अहम रही है। उन्होंने भारत को पहले से समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी से खरीदारी शुरू कर दी।

हालांकि अब जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी रूसी तेल खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यह प्रतिस्पर्धा बढ़ी, तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।


भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी।

इसके अलावा भारतीय रुपया पहले ही कमजोर स्थिति में है और महंगे तेल से उस पर और दबाव पड़ सकता है। कुछ अर्थशास्त्रियों ने तो भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को भी घटाना शुरू कर दिया है।


उद्योग और आम जनता पर असर

ऊर्जा संकट का असर अब उद्योगों पर भी दिखने लगा है। गैस सप्लाई कम होने के कारण कई उद्योगों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है।

वहीं सरकार घरेलू उपयोग और ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दे रही है। LPG की सप्लाई पर भी दबाव है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी हो सकती है।


भारत की कूटनीतिक रणनीति

भारत इस संकट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह रूस से तेल खरीद बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है।

S. Jaishankar लगातार ईरान के विदेश मंत्री से संपर्क में हैं। वहीं Narendra Modi ने भी ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत की है।

भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से दो LPG टैंकरों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई है और और भी जहाजों के लिए बातचीत जारी है।


निष्कर्ष: चुनौती और अवसर दोनों

मिडिल ईस्ट का यह संकट भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है, लेकिन साथ ही यह अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने का अवसर भी है।

Russia से बढ़ती तेल खरीद भारत को फिलहाल राहत दे सकती है, लेकिन लंबे समय में उसे अपने ऊर्जा स्रोतों को और विविध बनाना होगा।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस संकट से कैसे निपटता है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को कैसे मजबूत करता है।

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