
Ustaad Bhagat Singh Review: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार Ustaad Bhagat Singh सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह था, क्योंकि यह जोड़ी एक बार फिर साथ आई है – Pawan Kalyan और निर्देशक Harish Shankar। इससे पहले दोनों ने 2012 में ब्लॉकबस्टर फिल्म Gabbar Singh दी थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया था।
अब सवाल यह है कि क्या ‘उस्ताद भगत सिंह’ भी उसी तरह का जादू दोहरा पाई है या नहीं? आइए जानते हैं इस फिल्म का पूरा रिव्यू।
कहानी: एक ईमानदार अफसर की लड़ाई
फिल्म की कहानी एक आदर्श शिक्षक से शुरू होती है, जिसका किरदार K. S. Ravikumar निभाते हैं। वह आदिवासी इलाकों में बच्चों की शिक्षा के लिए काम करते हैं और वहीं उनकी मुलाकात एक होनहार लड़के से होती है, जिसे वह ‘भगत’ नाम देते हैं।
यह लड़का बड़ा होकर Pawan Kalyan यानी उस्ताद भगत सिंह बनता है, जो आगे चलकर एक पुलिस अधिकारी बन जाता है। वह अपनी ईमानदारी और बहादुरी से समाज में फैले भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उसका गुरु मुख्यमंत्री बन जाता है और उस पर जानलेवा हमला होता है। इसके पीछे कौन लोग हैं और भगत कैसे इस साजिश का पर्दाफाश करता है, यही फिल्म का मुख्य प्लॉट है।
अभिनय: पवन कल्याण का स्क्रीन प्रेजेंस सबसे बड़ा प्लस
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत Pawan Kalyan का स्क्रीन प्रेजेंस है। उनका लुक, स्टाइल और एंट्री सीन काफी दमदार हैं। उन्होंने एक गाने में शानदार डांस भी किया है और कई जगहों पर अपनी पुरानी कॉमिक टाइमिंग भी दिखाई है।
विलेन के रूप में R. Parthiban ने अच्छा काम किया है। उनका किरदार खतरनाक लगता है और उन्होंने इसे बखूबी निभाया है।
K. S. Ravikumar का किरदार भी फिल्म में अहम है। उन्होंने एक गंभीर और परिपक्व भूमिका निभाई है, जो कहानी को मजबूती देती है।
हीरोइन और अन्य कलाकार
Sreeleela ने फिल्म में एक रेडियो जॉकी का रोल निभाया है। उनकी एनर्जी और एक्टिंग अच्छी है और उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। पवन कल्याण के साथ उनकी केमिस्ट्री भी ठीक-ठाक लगती है।
वहीं Raashii Khanna का रोल ज्यादा बड़ा नहीं है। वह स्क्रीन पर दिखती जरूर हैं, लेकिन उनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ खास नहीं है।
अन्य कलाकारों जैसे राव रमेश, एल.बी. श्रीराम और सत्या राजेश ने अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन कुछ कॉमेडी सीन फिल्म में जबरदस्ती डाले हुए लगते हैं।
म्यूजिक और टेक्निकल पहलू
फिल्म का म्यूजिक Devi Sri Prasad ने दिया है, लेकिन इस बार उनका काम उम्मीद के मुताबिक नहीं है। ‘Dekhlenge Saala’ गाना ठीक है, लेकिन बाकी गाने उतने प्रभावशाली नहीं हैं।
बैकग्राउंड स्कोर S. Thaman ने दिया है, जो औसत लगता है। कई जगहों पर यह फिल्म को और बेहतर बना सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
सिनेमैटोग्राफी की बात करें तो अयानंका बोस ने जंगल और सेट्स को खूबसूरती से फिल्माया है। विजुअल्स अच्छे लगते हैं और फिल्म का प्रोडक्शन वैल्यू भी शानदार है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक Harish Shankar ने फिल्म में कुछ अच्छे मोमेंट्स जरूर दिए हैं, खासकर सेकंड हाफ में। लेकिन पूरी फिल्म में उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं दिखती जितनी ‘गब्बर सिंह’ में थी।
स्क्रीनप्ले काफी हद तक पुराना और टेम्पलेट जैसा लगता है। कई सीन आपको दूसरी फिल्मों की याद दिलाते हैं। कहानी में नया पन नहीं है, जो आज के दर्शकों को बांधे रख सके।
क्या अच्छा है फिल्म में?
फिल्म के सेकंड हाफ में कुछ सीन्स काफी अच्छे हैं, जैसे पुलिस स्टेशन वाला सीन, ओल्ड सिटी वाला एपिसोड और विलेन के बेटे के साथ टकराव। ये सीन्स मास ऑडियंस को पसंद आ सकते हैं।
इसके अलावा फिल्म के कुछ डायलॉग्स भी काफी प्रभावशाली हैं, जो दर्शकों को याद रह सकते हैं।
क्या कमजोरियां हैं?
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका पहला घंटा है। शुरुआत काफी धीमी और बोरिंग लगती है। कॉमेडी और ड्रामा पुराने जमाने जैसा लगता है, जो आज के दर्शकों को कनेक्ट नहीं कर पाता।
गानों की क्वालिटी भी कमजोर है और कुछ सीन ऐसे हैं जो बिना जरूरत के जोड़े गए लगते हैं।
निष्कर्ष: फैंस के लिए ठीक, बाकी दर्शकों के लिए औसत
कुल मिलाकर Ustaad Bhagat Singh एक ऐसी फिल्म है जिसमें कुछ अच्छे मोमेंट्स जरूर हैं, लेकिन यह पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है।
Pawan Kalyan के फैंस के लिए इसमें काफी कुछ है – दमदार एंट्री, एक्शन और डायलॉग्स। लेकिन अगर आप एक नई और फ्रेश कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको थोड़ा निराश कर सकती है।



