
Dawood Ibrahim Property Auction 2026: Mumbai से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां फरार अंडरवर्ल्ड डॉन Dawood Ibrahim की पुश्तैनी संपत्तियों की नीलामी आखिरकार सफल होती नजर आ रही है। 5 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा आयोजित एक आधिकारिक नीलामी में इन संपत्तियों के लिए एक खरीदार सामने आया है, जिसने सभी चार कृषि भूमि के प्लॉट के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई है।
यह जमीनें Ratnagiri जिले के खेड़ तालुका के मुम्बाके गांव में स्थित हैं, जो दाऊद इब्राहिम का पैतृक स्थान माना जाता है।
सरकार की कार्रवाई और SAFEMA कानून की भूमिका
इन संपत्तियों की नीलामी केंद्र सरकार द्वारा Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act यानी SAFEMA कानून के तहत की गई। यह कानून उन लोगों की संपत्तियों को जब्त करने के लिए बनाया गया है, जो तस्करी और अवैध गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
दाऊद इब्राहिम और उनके परिवार से जुड़ी ये संपत्तियां 1990 के दशक में जब्त की गई थीं। बाद में इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार के कब्जे में ले लिया गया और अब इन्हें बेचने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी।
चारों जमीनों के लिए एक ही खरीदार
नीलामी में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मुंबई के एक ही व्यक्ति ने सभी चार कृषि भूमि के प्लॉट के लिए बोली लगाई और उन्हें जीत लिया। हालांकि अभी तक इस खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस खरीदार को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी रकम जमा करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकरण द्वारा अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इन संपत्तियों का ट्रांसफर पूरा होगा।
पहले क्यों नहीं बिक पाई थीं ये संपत्तियां?
इन जमीनों को बेचने की कोशिश पिछले कई सालों से की जा रही थी, लेकिन हर बार या तो बोलीदाता नहीं मिले या फिर प्रक्रिया अधूरी रह गई।
2017, 2020, 2024 और 2025 में भी इन संपत्तियों की नीलामी की गई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। नवंबर 2025 में भी रिजर्व प्राइस को करीब 30% तक घटाया गया, फिर भी कोई खरीदार सामने नहीं आया।
इसकी एक बड़ी वजह इन संपत्तियों से जुड़ा “स्टिग्मा” यानी सामाजिक छवि और लोकेशन मानी जाती है। लोग दाऊद इब्राहिम से जुड़ी संपत्ति खरीदने से हिचकते रहे हैं।
किस जमीन पर लगी सबसे ज्यादा बोली?
इन चार प्लॉट्स में से एक प्रमुख जमीन, जिसका सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B) है, उसकी रिजर्व कीमत ₹9.41 लाख रखी गई थी। इस पर ₹10 लाख से ज्यादा की बोली लगी, जो सबसे ज्यादा रही।
इस प्लॉट के लिए दो बोलीदाता सामने आए थे, जिनमें एक मुंबई का खरीदार और दूसरा रत्नागिरी का स्थानीय व्यक्ति था। अंत में मुंबई के खरीदार ने यह जमीन जीत ली।
बाकी तीन प्लॉट्स – सर्वे नंबर 533, 453 और 617 – के लिए केवल एक ही बोलीदाता आया, जिसने सभी को अपने नाम कर लिया।
पुश्तैनी जमीन और परिवार से जुड़ाव
इन संपत्तियों में से कई जमीनें पहले दाऊद इब्राहिम की मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं। यह जमीनें कास्कर परिवार की पुश्तैनी संपत्ति का हिस्सा हैं।
सरकार ने इन्हें 1990 के दशक में जब्त किया था, खासकर उन मामलों के तहत जिनका संबंध संगठित अपराध और 1993 के मुंबई बम धमाकों से था।
कानूनी विवाद और पिछली नीलामियों की कहानी
इन संपत्तियों की नीलामी से जुड़ा इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। Ajay Srivastava नाम के एक वकील ने पिछले दो दशकों में कई बार इन नीलामियों में हिस्सा लिया।
उन्होंने 2001 में नागपाड़ा की दो औद्योगिक यूनिट्स खरीदी थीं, लेकिन बाद में हसीना पारकर के वारिसों के साथ उनका कानूनी विवाद शुरू हो गया, जो अभी भी Bombay High Court में लंबित है।
2020 में उन्होंने दाऊद के पुश्तैनी बंगले को खरीदा था और वहां एक ट्रस्ट भी स्थापित किया। वहीं 2024 में उन्होंने एक छोटे प्लॉट के लिए ₹2.01 करोड़ की बोली लगाई थी, जिसकी रिजर्व कीमत सिर्फ ₹15,440 थी। हालांकि भुगतान न करने के कारण वह बोली रद्द कर दी गई थी।
क्या इस बार पूरी होगी प्रक्रिया?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस बार प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद ज्यादा है, क्योंकि सभी प्लॉट्स के लिए सफल बोली लग चुकी है।
हालांकि अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बाद ही होगा। अगर खरीदार तय समय पर भुगतान कर देता है, तो रत्नागिरी की इन संपत्तियों का निपटारा पूरी तरह हो जाएगा।
निष्कर्ष
Dawood Ibrahim से जुड़ी संपत्तियों की नीलामी हमेशा से चर्चा में रही है। इस बार एक ही खरीदार द्वारा सभी चार प्लॉट खरीदना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
यह न केवल सरकार के लिए एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अब लोग इन संपत्तियों को निवेश के नजरिए से देखने लगे हैं, भले ही उनका अतीत विवादित क्यों न रहा हो।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह डील पूरी होती है और क्या भविष्य में भी ऐसी संपत्तियों की नीलामी आसानी से हो पाएगी।



