
8 जून, 2026 | यरूशलेम/वाशिंगटन | US-Israel-Iran War Live: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में शांति की तमाम कोशिशों को मटियामेट करते हुए सोमवार (8 जून, 2026) को युद्ध की आग एक बार फिर भड़क उठी है। अप्रैल में हुए अस्थायी संघर्षविराम (Ceasefire) के बाद पहली बार ईरान ने इजरायल पर सीधे मिसाइल दागकर हड़कंप मचा दिया। इस हिमाकत के महज कुछ ही घंटों बाद इजरायली वायुसेना (IAF) ने ईरान के भीतर घुसकर उसके कई सैन्य ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक कर दी है।
इस ताजा और भीषण सैन्य टकराव ने न केवल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बेहद संवेदनशील शांति वार्ता पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक और रणनीतिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
नजरेथ के पास एयरबेस पर ईरान ने दागीं 11 मिसाइलें, इजरायल में स्कूल बंद
इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने उत्तरी इजरायल को निशाना बनाते हुए एक साथ 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। ईरान का मुख्य निशाना नजरेथ के करीब स्थित ‘रमात डेविड’ (Ramat David) एयरबेस था। ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में इजरायली सेना की मनमानी, ईरानी हितों पर हमलों और संघर्षविराम के समझौतों के उल्लंघन का करारा जवाब है।
हालांकि, इजरायली रक्षा तंत्र ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस ने सभी मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया, जिससे कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। लेकिन शेल्टरों की तरफ भागते समय कई नागरिक घायल हो गए। हमले की गंभीरता को देखते हुए पूरे इजरायल में अलर्ट के सायरन गूंज उठे और सरकार ने एहतियात के तौर पर देश भर के सभी स्कूलों को तुरंत बंद करने का आदेश जारी कर दिया।
इजरायल का ताबड़तोड़ पलटवार, तेहरान के पास धमाके; बंद हुआ एयरस्पेस
ईरान के इस कदम को इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने एक “गंभीर भूल” बताते हुए कहा कि तेहरान ने आतंकवाद का रास्ता चुना है और इसका अंजाम उसे भुगतना होगा। इसके कुछ ही घंटों बाद, इजरायली लड़ाकू विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान के मिलिट्री सेंटर्स पर बमबारी शुरू कर दी।
खबरों के मुताबिक, तेहरान के पश्चिम में स्थित ‘करज’ (Karaj) इलाके में भीषण धमाके सुने गए हैं। हमलों के तुरंत बाद ईरान ने इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आस-पास के पूरे एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) को नागरिक उड़ानों के लिए अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। व्हाइट हाउस ने इस बात पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है कि क्या इजरायल ने यह हमला अमेरिका की सहमति या समन्वय से किया है।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: “नेतन्याहू अंतिम फैसला नहीं लेते, शांति समझौता बेहद करीब”
यह सैन्य टकराव ऐसे नाजुक मोड़ पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे एक बड़ी डील पर बात चल रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि इस हिंसा के बावजूद वे तेहरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया को टूटने नहीं देंगे। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ से बातचीत में ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में कहा:
“बेंजामिन नेतन्याहू सारे फैसले नहीं लेते हैं (Netanyahu doesn’t call the shots)। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता अब भी हमारी पहुंच में है। मैंने व्यक्तिगत रूप से नेतन्याहू से बात की है और उन्हें इस मामले को आगे न बढ़ाने (नॉन-रिटालिएशन) की सख्त हिदायत दी है।”
ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ (Axios) से बातचीत में चेतावनी दी कि हम ईरान के साथ अंतिम समझौते के बेहद करीब हैं, और इस मोड़ पर कोई भी नया सैन्य एक्शन महीनों की राजनयिक मेहनत पर पानी फेर सकता है। हालांकि, ट्रंप ने अपना सख्त रुख कायम रखते हुए यह भी साफ कर दिया कि समझौता होने से पहले ईरान पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे और न ही उसकी फ्रीज संपत्तियां रिलीज होंगी। साथ ही, अमेरिका ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को हर हाल में खत्म कराकर रहेगा।
लेबनान में 25 साल बाद सबसे बड़ा इजरायली कब्जा; भड़का हिजबुल्लाह
यह युद्ध अब सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि लेबनान इसका मुख्य अखाड़ा बन चुका है। अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव के बावजूद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत के दक्षिणी उपनगरों (हिजबुल्लाह के गढ़) पर भारी बमबारी जारी रखी है।
वर्तमान में स्थिति यह है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के उन इलाकों पर कब्जा कर लिया है, जिन पर पिछले 25 वर्षों में उसने कभी नियंत्रण नहीं किया था। इसके जवाब में हिजबुल्लाह लगातार इजरायली ठिकानों पर रॉकेट बरसा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने ईरान या लेबनान के खिलाफ अपनी सैन्य आक्रामकता बंद नहीं की, तो उसे ऐसा “करारा और व्यापक जवाब” (Crushing Response) मिलेगा जो उसने कभी सोचा भी नहीं होगा।
ग्लोबल मार्केट में हड़कंप, $95 के पार पहुंचा कच्चा तेल; पाकिस्तान बना मध्यस्थ
युद्ध की इस आहट ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। दुनिया के कुल तेल व्यापार के पांचवें हिस्से (1/5th) के पारगमन मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में सप्लाई ठप होने की आशंका से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
इस बीच, कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने फ्रांस, कतर, ब्रिटेन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की है। वहीं, पाकिस्तान इस पूरे मामले में वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी ने अपने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक खास संदेश लेकर ईरान का दौरा किया है।
मिडल ईस्ट महायुद्ध संकट 2026: मुख्य मोर्चे और मौजूदा स्थिति
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