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Ali Larijani Assassination: ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव

Ali Larijani Assassination: ईरान की राजनीति एक बार फिर बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अगर यह पुष्टि होती है कि देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी की हत्या इज़राइल द्वारा की गई है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक गहरा झटका होगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ईरान के लिए उतनी ही बड़ी या उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है, जितनी किसी शीर्ष नेता के शुरुआती दौर में खोने से होती।


क्यों इतने अहम थे अली लारीजानी?

अली लारीजानी को ईरान की राजनीति का एक ऐसा चेहरा माना जाता था, जो अलग-अलग शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने में माहिर थे। उनकी खासियत यह थी कि वे न सिर्फ सत्ता के भीतर मजबूत पकड़ रखते थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका प्रभाव था। चीन और रूस जैसे देशों के साथ उनके रिश्ते ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते थे।

उनकी भूमिका सिर्फ एक नेता की नहीं थी, बल्कि वे एक ऐसे “संतुलनकारी” थे जो कट्टरपंथियों और उदारवादी नेताओं के बीच संवाद बनाए रखते थे। यही कारण था कि किसी भी नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में उन्हें सबसे मजबूत विकल्प माना जाता था।


ईरान के लिए सबसे बड़ा नुकसान?

विशेषज्ञ मानते हैं कि लारीजानी की मौत, अगर साबित होती है, तो यह ईरान के लिए 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद सबसे बड़ा झटका होगा। उस समय अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाई ने ईरान की सैन्य रणनीति को प्रभावित किया था, और अब लारीजानी की अनुपस्थिति राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।

यह घटना यह भी दिखाती है कि इज़राइल और संभवतः अमेरिका ने उन्हें कभी भी “वैकल्पिक नेता” के रूप में स्वीकार नहीं किया। यानी अगर ईरान की सत्ता में बदलाव होता, तो लारीजानी उस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते थे।


अमेरिका की रणनीति और दुविधा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि वे ईरान में एक “व्यावहारिक नेता” की तलाश में हैं, जो संकट के समय देश को स्थिर कर सके। लेकिन लारीजानी की संभावित हत्या से यह साफ होता है कि अमेरिका के पास ऐसे विकल्प बहुत सीमित हैं।

ट्रंप ने अभी तक ईरान के निर्वासित नेता रज़ा पहलवी का खुलकर समर्थन नहीं किया है। वे देश के अंदर से किसी नेता को उभरते देखना चाहते हैं, लेकिन लगातार हो रही हत्याओं और दमन के कारण ऐसे नेताओं की संख्या घटती जा रही है।


सत्ता संघर्ष: मोजतबा खामेनेई बनाम अन्य नेता

ईरान में एक बड़ा सवाल यह भी है कि देश का अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा। मौजूदा परिस्थितियों में मोजतबा खामेनेई, जो कि अली खामेनेई के बेटे हैं, एक प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। लेकिन लारीजानी इस प्रक्रिया को धीमा करने और किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को आगे लाने की कोशिश कर रहे थे।

पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ मिलकर वे यह तर्क दे रहे थे कि युद्ध के बाद की स्थिति को देखते हुए जल्दबाजी में फैसला लेना देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन अब उनके न रहने से यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।


एक विचारक और रणनीतिकार

अली लारीजानी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक गहरे विचारक भी थे। उन्होंने दर्शनशास्त्र में पढ़ाई की थी और जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट पर शोध किया था। उनकी सोच में एक खास बात यह थी कि वे इस्लामी विचारधारा को पश्चिमी दर्शन के साथ जोड़कर समझाने की कोशिश करते थे।

उनका मानना था कि समाज की अपनी एक अलग पहचान होती है, जो व्यक्तियों से मिलकर बनती है, और उसी के आधार पर देश आगे बढ़ता है। यह सोच उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी।


राजनीतिक उतार-चढ़ाव और वापसी

लारीजानी का राजनीतिक करियर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जैसे संसद अध्यक्ष और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख। हालांकि, 2021 और 2024 के चुनावों में उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, जिससे उनकी लोकप्रियता को झटका लगा।

फिर भी, 2025 में उन्हें दोबारा एक अहम पद पर लाया गया, जो उनकी क्षमता और अनुभव का प्रमाण था। उनकी वापसी को ईरान की रणनीतिक मजबूरी भी माना गया, क्योंकि देश को एक अनुभवी नेता की जरूरत थी।


अंतरराष्ट्रीय असर और भविष्य की चिंता

लारीजानी की संभावित हत्या का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे मध्य पूर्व की राजनीति प्रभावित हो सकती है। खासकर खाड़ी देशों और अमेरिका के साथ ईरान के संबंधों में नया तनाव पैदा हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान इस नुकसान से उबर पाएगा? क्या देश में कोई नया नेता उभरेगा जो इस खालीपन को भर सके? या फिर यह घटना ईरान को और ज्यादा अस्थिरता की ओर धकेल देगी?


निष्कर्ष

अली लारीजानी की भूमिका ईरान की राजनीति में बेहद अहम थी। उनकी अनुपस्थिति न सिर्फ सत्ता संतुलन को बिगाड़ सकती है, बल्कि देश की भविष्य की दिशा भी बदल सकती है। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि मध्य पूर्व की राजनीति कितनी जटिल और संवेदनशील है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान इस संकट से कैसे बाहर निकलता है और क्या वह एक नया नेतृत्व विकसित कर पाता है या नहीं।

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