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धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, युद्ध छिड़ा तो बम-गोले भी दागूंगा’, वाराणसी में CM योगी का बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक संन्यासी का जीवन राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन के लिए धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए और यदि राष्ट्र की रक्षा के लिए युद्ध की स्थिति पैदा हो जाए, तो उसके लिए भी तैयार रहना चाहिए। देश और धर्म के लिए किया गया त्याग ही सबसे बड़ा त्याग है और इसी भावना के साथ काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने संघ की राष्ट्रवादी विचारधारा, आध्यात्मिक परंपरा और समाजसेवा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। संस्था ने राष्ट्र की उन्नति को ही अपनी साधना और आत्मोन्नति का माध्यम बनाया है।

भारत सेवाश्रम संघ के 100 साल पूरे होने पर बोले CM योगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1926 में स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने काशी में भारत सेवाश्रम संघ की शाखा की शुरुआत की थी। उस समय भारत अंग्रेजों की गुलामी में था। स्वामी प्रणवानंद जी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को जागरूक करने और राष्ट्रभावना को मजबूत बनाने का काम किया।

योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, स्वामी प्रणवानंद जी ने आध्यात्मिक साधना को केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे राष्ट्र जागरण और देश की उन्नति से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज भारत सेवाश्रम संघ भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और ऋषि-मुनियों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी संस्था की असली पहचान उसके कठिन समय में सामने आती है। भारत सेवाश्रम संघ ने अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने मूल सिद्धांतों को बनाए रखा है। यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

राष्ट्र की रक्षा के साथ विरासत और संस्कृति को बचाना भी जरूरी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट में होता है, तो उसका असर केवल उसकी सीमाओं पर नहीं पड़ता, बल्कि उसकी ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक स्थलों, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान पर भी पड़ता है। इसलिए राष्ट्र की रक्षा के साथ अपनी विरासत और संस्कृति की सुरक्षा करना भी जरूरी है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में राम जन्मभूमि और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों के दौरान भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विदेशी आक्रांता अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होते, तो काशी विश्वनाथ मंदिर को नुकसान पहुंचाने और अयोध्या में राम जन्मभूमि पर लंबे समय तक विवादित ढांचे के बने रहने जैसी परिस्थितियां नहीं पैदा होतीं।

उन्होंने कहा कि समाज को विभाजित होने के बजाय एकजुट रहना चाहिए। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, संतों ने अलग-अलग समय में धार्मिक और सामाजिक जागरण के जरिए समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और राष्ट्रहित को अपनी साधना का हिस्सा बनाया।

12-13 साल की उम्र में गुरु की तलाश में गोरखपुर पहुंचे थे स्वामी प्रणवानंद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी प्रणवानंद जी महाराज के जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका गोरखपुर की गोरक्षपीठ से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1912-13 के आसपास स्वामी प्रणवानंद जी ने गोरखपुर में सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ जी के सानिध्य में दीक्षा ली और साधना की।

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि स्वामी प्रणवानंद जी का जन्म वर्तमान बांग्लादेश के मेमनसिंह क्षेत्र के पास हुआ था। बचपन में उनका नाम विनोद था। स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने अपने शिक्षक से गोरखपुर जाने की इच्छा जताई थी। उनके अनुसार, उस समय वह छठी या सातवीं कक्षा में पढ़ते थे और अपने गुरु की तलाश में गोरखपुर पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गंभीरनाथ जी के सामने पहुंचने पर उनकी आध्यात्मिक प्रतिभा को पहचाना गया। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद जी की साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आध्यात्मिक उन्नति और राष्ट्र जागरण के लिए समर्पित रहा।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी प्रणवानंद जी ने काशी से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक आध्यात्मिक चेतना को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने का काम किया। उनका संदेश था कि व्यक्ति की उन्नति तभी सार्थक है, जब उससे समाज और राष्ट्र को भी लाभ मिले।

पूजा के साथ राष्ट्र रक्षा के लिए भी तैयार रहना चाहिए: योगी

भारत सेवाश्रम संघ की परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में पूजा केवल धूप और दीप तक सीमित नहीं है। मां भगवती की आराधना में अस्त्र-शस्त्र का भी विशेष महत्व रहा है।

उन्होंने कहा कि शस्त्र केवल धारण करने या पूजा करने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्र की रक्षा के लिए उनका इस्तेमाल करने का संकल्प भी होना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने अपने समय में समाज को इसी भावना से प्रेरित किया था।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ आज भी सेवा, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है। उन्होंने संस्था के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे संगठनों की भूमिका समाज में जागरूकता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी बोले मुख्यमंत्री

अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पहले की सरकार के दौरान भारत सेवाश्रम संघ के संन्यासियों को धमकाने की कोशिश की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने उस समय भी संन्यासियों के सामने अपना पक्ष रखा था और उनसे पूछा था कि क्या उन्हें किसी प्रकार का भय महसूस होता है। उनके मुताबिक, संन्यासियों का जवाब था कि वे देश और धर्म के लिए जीते हैं और जरूरत पड़ने पर उसके लिए अपना जीवन भी समर्पित कर सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सच्ची प्रतिबद्धता है। उन्होंने संन्यासियों के साहस और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि इसी प्रकार के जज्बे ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

100 गरीब कन्याओं को सिलाई मशीनें देने के कार्य की सराहना

योगी आदित्यनाथ ने भारत सेवाश्रम संघ की ओर से किए जा रहे सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि संस्था गरीब परिवारों की बेटियों को सिलाई मशीनें उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले भी संघ के कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं और संस्था के सेवा कार्यों को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भी भारत सेवाश्रम संघ की ओर से भोजन वितरण और अन्य सहायता संबंधी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को सहायता देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलती है, तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

योगी आदित्यनाथ ने इस सामाजिक पहल के लिए भारत सेवाश्रम संघ का आभार जताया और कहा कि ऐसे कार्य समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।

भारत सेवाश्रम संघ से जुड़ी है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने भारत सेवाश्रम संघ के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्था का संबंध कई प्रमुख व्यक्तित्वों और राष्ट्रवादी विचारधाराओं से रहा है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ उनके वैचारिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रेरणाओं में शामिल रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने राष्ट्रहित और सांस्कृतिक चेतना को महत्व दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में अलग राजनीतिक संगठन खड़ा करने की प्रेरणा देने में भी स्वामी प्रणवानंद जी की भूमिका रही।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी वर्ष में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिनमें देश के महापुरुषों, संतों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के विचारों पर चर्चा हो। इससे नई पीढ़ी को देश के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

समारोह में कई मंत्री और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मंत्री रविंद्र जायसवाल और दयाशंकर मिश्र दयालु सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य और विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम और सुनील पटेल भी शामिल हुए।

इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ के जनरल सेक्रेटरी स्वामी विश्वात्मानंद महाराज, सहायक सेक्रेटरी स्वामी धनेशानंद जी महाराज और स्वामी अम्बरीशानंद जी महाराज सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी, संन्यासी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

समारोह में संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसकी आध्यात्मिक परंपरा और समाजसेवा के कार्यों को याद किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्था के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित भाव से काम करने का संदेश दिया।

निष्कर्ष: वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रसेवा, धर्म और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद जी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की और संघ के सामाजिक कार्यों की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए समर्पण की भावना ही राष्ट्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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