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Delhi NCR UP Monsoon Update: बारिश क्यों रुकी और कब लौटेगा मानसून? जानें IMD का अपडेट

Delhi NCR UP Monsoon Update: जुलाई की शुरुआत होते ही उत्तर भारत के कई राज्यों में झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी थी। दिल्ली-NCR से लेकर उत्तर प्रदेश तक आसमान में घने बादल छाए रहे और लगातार बारिश के बाद तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। लोगों को लगा कि अब मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहेगा।

लेकिन कुछ ही दिनों में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से घने बारिश वाले बादल गायब हो गए हैं। आसमान साफ दिखाई देने लगा है और तापमान एक बार फिर ऊपर जाने लगा है। बारिश रुकने के साथ ही गर्मी और उमस ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मानसून अचानक कमजोर क्यों पड़ गया? दिल्ली में बारिश कब होगी और उत्तर प्रदेश में मानसून दोबारा कब सक्रिय होगा?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे ‘ब्रेक मानसून’ की स्थिति और मानसून ट्रफ की दिशा में हुआ बड़ा बदलाव जिम्मेदार है। इसके अलावा El Nino का असर भी इस बार मानसून के लंबे ब्रेक की एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है।

दिल्ली-NCR और यूपी में अचानक क्यों रुक गई बारिश?

उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की गतिविधियां कमजोर होने के पीछे मौसम वैज्ञानिक एक खास स्थिति को जिम्मेदार मान रहे हैं। इसे ‘Break Monsoon Condition’ यानी ब्रेक मानसून कहा जाता है।

आमतौर पर मानसून के पूरे सीजन में बारिश लगातार एक जैसी नहीं होती। कुछ दिनों तक तेज बारिश होने के बाद मानसून कमजोर पड़ सकता है। इस दौरान कई इलाकों में बारिश पूरी तरह रुक जाती है और आसमान साफ होने लगता है।

मौजूदा समय में दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसके कारण बारिश कराने वाली हवाओं और नमी का रास्ता बदल गया है।

यही वजह है कि जिन इलाकों में जुलाई की शुरुआत में भारी बारिश हो रही थी, वहां अब गर्म और शुष्क मौसम दिखाई दे रहा है।

क्या है Monsoon Trough और बारिश से इसका क्या कनेक्शन?

मानसून के मौसम को समझने के लिए ‘Monsoon Trough’ यानी मानसून ट्रफ को समझना बेहद जरूरी है।

मौसम विज्ञान में ट्रफ कम वायुदाब वाला एक लंबा क्षेत्र होता है। आसान भाषा में कहें तो यह बारिश लाने वाली हवाओं के लिए एक तरह के रास्ते का काम करता है।

जब गर्म और नमी वाली हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र में पहुंचती है तो ऊपर उठने लगती है। इसके बाद बादलों का निर्माण होता है और बारिश की संभावना बढ़ जाती है।

भारतीय मौसम विभाग मुख्य रूप से मानसून ट्रफ और ऑफशोर ट्रफ जैसी मौसम प्रणालियों पर नजर रखता है।

मानसून ट्रफ देश के बड़े हिस्से में फैली कम दबाव की पट्टी होती है। इसकी स्थिति में बदलाव होते ही बारिश का पूरा पैटर्न बदल सकता है।

अगर मानसून ट्रफ किसी इलाके के करीब होती है तो वहां बादल बनने और बारिश की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, इसके दूर चले जाने पर बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं।

दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी में फिलहाल यही स्थिति देखने को मिल रही है।

हिमालय की तलहटी की ओर खिसकी मानसून ट्रफ

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून ट्रफ उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों से हटकर उत्तर की ओर खिसक गई है।

IMD लखनऊ के वैज्ञानिक एम दानिश के मुताबिक, मानसून बेल्ट उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में स्थित तराई क्षेत्र की ओर चली गई है। इसी कारण प्रदेश के उत्तरी जिलों में बारिश की गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल रही हैं।

पिछले सप्ताह बने एक कम दबाव के क्षेत्र ने मौसम प्रणाली को उत्तर की ओर खिसकाने में भूमिका निभाई। इसके साथ मानसून ट्रफ की स्थिति भी बदल गई।

मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर जाने के कारण बारिश का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के उत्तरी इलाकों और पूर्वी भारत की ओर केंद्रित हो गया है।

गोरखपुर, बलरामपुर और कुशीनगर जैसे जिलों में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं। वहीं दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मौसम काफी हद तक शुष्क हो गया है।

यानी मानसून पूरी तरह गायब नहीं हुआ है। बारिश का मुख्य क्षेत्र सिर्फ एक इलाके से दूसरे इलाके की ओर खिसक गया है।

Break Monsoon ने रोकी बारिश, चलने लगीं सूखी हवाएं

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल क्लासिक ‘ब्रेक मानसून’ की स्थिति बनी हुई है।

स्काईमेट वेदर में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत का मौसम लगभग पूरी तरह शुष्क बना हुआ है।

इसके पीछे मानसून ट्रफ की धुरी का हिमालय की तलहटी की ओर जाना प्रमुख कारण है।

जब मानसून ट्रफ उत्तर की ओर खिसकती है तो इसके दक्षिणी हिस्से में पश्चिम दिशा से हवाएं चलने लगती हैं। ये हवाएं अपेक्षाकृत शुष्क होती हैं और इनमें नमी की मात्रा कम रहती है।

हवा में नमी कम होने से बादलों का निर्माण कमजोर पड़ जाता है। जब पर्याप्त बादल नहीं बनते तो बारिश की गतिविधियां भी रुक जाती हैं।

इसके साथ ही तेज धूप जमीन को गर्म करने लगती है और तापमान तेजी से ऊपर जाने लगता है।

यही कारण है कि दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश रुकने के बाद गर्मी फिर से बढ़ने लगी है।

दिल्ली-UP की नमी आखिर कहां चली गई?

दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश कमजोर जरूर हुई है, लेकिन देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में मौसम पूरी तरह अलग है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर-पूर्व बिहार, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर असम के आसपास कई चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं।

ये मौसम प्रणालियां बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की ओर खींच रही हैं।

इसके कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी का बड़ा हिस्सा उत्तर-पश्चिम भारत तक नहीं पहुंच पा रहा है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिस्से अपेक्षाकृत शुष्क बने हुए हैं।

मौसम के इस बदलाव ने एक बार फिर दिखाया है कि मानसून के दौरान ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति बारिश के वितरण में कितनी बड़ी भूमिका निभाती है।

इस बार 11 से 12 दिन लंबा हो सकता है Monsoon Break

ब्रेक मानसून भारत में कोई असामान्य मौसम घटना नहीं है। जुलाई और अगस्त के दौरान एक या दो बार मानसून ब्रेक की स्थिति बनना सामान्य माना जाता है।

आमतौर पर ब्रेक मानसून चार से छह दिनों तक रहता है। इसके बाद मानसून ट्रफ दोबारा अपनी सामान्य स्थिति में लौटती है और मैदानी इलाकों में बारिश शुरू हो जाती है।

लेकिन इस बार मौसम वैज्ञानिक मानसून ब्रेक की अवधि को लेकर चिंतित हैं।

महेश पलावत के अनुसार, मौजूदा ब्रेक मानसून की स्थिति 11 से 12 दिनों तक बनी रह सकती है। यह सामान्य मानसून ब्रेक की तुलना में काफी लंबी अवधि है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे El Nino का प्रभाव हो सकता है।

जुलाई के दूसरे हिस्से में El Nino का असर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देने लगा है। यही कारण हो सकता है कि मानसून की गतिविधियां सामान्य से ज्यादा समय तक कमजोर बनी हुई हैं।

El Nino का मानसून पर कैसे पड़ रहा असर?

El Nino एक वैश्विक मौसम घटना है जिसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है।

इस स्थिति में प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। समुद्र के तापमान में होने वाला यह बदलाव वैश्विक हवा और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

भारत में El Nino को अक्सर कमजोर मानसून या बारिश में कमी से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि हर El Nino वर्ष में मानसून कमजोर हो, यह जरूरी नहीं है।

लेकिन मौजूदा मौसम परिस्थितियों में विशेषज्ञ El Nino के बढ़ते प्रभाव को मानसून के लंबे ब्रेक से जोड़कर देख रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई के दूसरे हिस्से में इसका प्रभाव साफ दिखाई देने लगा है।

अगर El Nino का प्रभाव और मजबूत होता है तो आने वाले दिनों में मानसून की बारिश के वितरण में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

तीन दिन में फिर बढ़ गया मानसून बारिश का घाटा

मानसून की रफ्तार धीमी होने का असर देश के कुल बारिश के आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 9 जुलाई तक देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। तेज बारिश के कारण मानसून सीजन का बारिश घाटा घटकर करीब 12 प्रतिशत रह गया था।

लेकिन इसके बाद मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ गईं।

सिर्फ तीन दिनों के भीतर बारिश का घाटा बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गया।

यह बदलाव दिखाता है कि मानसून की बारिश में कुछ दिनों की कमजोरी भी देश के कुल वर्षा आंकड़ों पर तेजी से असर डाल सकती है।

भारत में कृषि का एक बड़ा हिस्सा मानसून की बारिश पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक बारिश का ब्रेक किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

हालांकि मौसम वैज्ञानिक फिलहाल आने वाले मौसम सिस्टम पर नजर बनाए हुए हैं।

दिल्ली में बारिश कब होगी? IMD ने दिया अपडेट

दिल्ली-NCR के लोगों के लिए राहत की खबर यह है कि मौजूदा मानसून ब्रेक स्थायी नहीं है।

मौसम विभाग और निजी मौसम एजेंसियों के अनुसार मानसून ट्रफ आने वाले दिनों में धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसक सकती है।

IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

हालांकि दिल्ली में फिलहाल आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है और तत्काल किसी बड़ी बारिश की संभावना कम है।

IMD लखनऊ के वैज्ञानिक एम दानिश का कहना है कि उत्तर की ओर मौजूद ट्रफ लाइन अब धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू कर रही है।

अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है तो मानसून की गतिविधियों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।

इसे मानसून के ‘Revival’ यानी पुनः सक्रिय होने के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

20 जुलाई के बाद फिर झमाझम बारिश के आसार

मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार 20 जुलाई के बाद मानसून ट्रफ की धुरी दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू कर सकती है।

जैसे ही मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति की ओर लौटेगी, उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दोबारा बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

बारिश लौटने के साथ तापमान में भी गिरावट आने की उम्मीद है। इससे गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।

फिलहाल दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को कुछ दिनों तक गर्म, उमस भरे और ज्यादातर शुष्क मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

लेकिन जुलाई के आखिरी दस दिनों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। अगर मानसून ट्रफ दक्षिण की ओर लौटती है तो दिल्ली और यूपी के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

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