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Donald Trump Claims on India Pakistan War: भारत-पाकिस्तान जंग में गिरे 11 लड़ाकू विमान

Donald Trump Claims on India Pakistan War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मामला परमाणु युद्ध तक पहुंच सकता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान कुल 11 लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे या दोनों देशों के संयुक्त नुकसान की बात कर रहे थे।

ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि भारत सरकार पहले की तरह इस दावे को स्वीकार नहीं करती और साफ कह चुकी है कि संघर्ष विराम का फैसला दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई सीधी बातचीत का परिणाम था, इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।

एयर फोर्स वन में ट्रंप ने दोहराया अपना दावा

बुधवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर दुनिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के आधार पर नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाए तो वह इसके सबसे बड़े हकदार हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव भी शामिल है।

ट्रंप ने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता तो स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष में 11 लड़ाकू विमान गिराए गए थे, लेकिन उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की।

11 लड़ाकू विमानों के दावे पर नहीं दी कोई जानकारी

ट्रंप के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा 11 लड़ाकू विमानों के नुकसान का दावा रहा। उन्होंने यह नहीं बताया कि ये विमान भारत के थे, पाकिस्तान के थे या दोनों देशों के संयुक्त नुकसान की बात कर रहे थे।

इससे पहले भारत की ओर से कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के कई सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा, जिनमें एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान भी शामिल थे। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को अलग-अलग अवसरों पर खारिज किया है।

क्या था ऑपरेशन सिंदूर?

भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। यह सैन्य अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर चार दिनों तक तनावपूर्ण सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। इस दौरान नियंत्रण रेखा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में गोलाबारी और जवाबी कार्रवाई की घटनाएं सामने आईं।

चार दिन तक चला सैन्य तनाव

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच करीब चार दिनों तक लगातार तनाव बना रहा। दोनों देशों की सेनाएं पूरी तरह सतर्क रहीं और कई क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं।

आखिरकार 10 मई को दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। इसके बाद सीमावर्ती इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए।

ट्रंप ने फिर लिया युद्ध रुकवाने का श्रेय

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस बार भी उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि उनके प्रयासों से करोड़ों लोगों की जान बच गई।

ट्रंप के मुताबिक, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी। उन्होंने कहा कि लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

हालांकि ट्रंप ने इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया।

भारत ने फिर दोहराया अपना आधिकारिक रुख

भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का परिणाम था।

नई दिल्ली का कहना है कि दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधे संपर्क के बाद सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति बनी थी। भारत ने बार-बार कहा है कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई।

भारत का यह भी कहना है कि उसकी विदेश नीति में द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान आपसी बातचीत के माध्यम से किया जाता है और किसी बाहरी मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।

भारत की नीति में नहीं बदला कोई रुख

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान से जुड़े मामलों में द्विपक्षीय वार्ता की नीति अपनाता आया है। यही कारण है कि जब भी किसी विदेशी नेता द्वारा मध्यस्थता का दावा किया जाता है, भारत उसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर देता है।

सरकार का कहना है कि भारत की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाती।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनी चर्चा

ट्रंप के नए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अब तक अमेरिका की ओर से ट्रंप के बयान के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक किसी दावे के समर्थन में तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तब तक ऐसे बयानों को राजनीतिक टिप्पणी के रूप में ही देखा जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की रणनीतिक कार्रवाई का अहम हिस्सा

ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति के महत्वपूर्ण अभियानों में गिना जा रहा है। इस अभियान के जरिए भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों का जवाब सख्ती से दिया जाएगा।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था, न कि किसी व्यापक युद्ध को बढ़ावा देना। इसके बाद भी यदि सीमा पर तनाव बढ़ा तो भारतीय सेना ने स्थिति के अनुसार जवाबी कार्रवाई की।

आगे क्या?

ट्रंप के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि भारत अपने पुराने रुख पर कायम है कि संघर्ष विराम दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई प्रत्यक्ष बातचीत का परिणाम था। वहीं ट्रंप लगातार यह दावा दोहरा रहे हैं कि उनके प्रयासों ने बड़े युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई।

आने वाले दिनों में यदि अमेरिका या किसी अन्य पक्ष की ओर से इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो इस पूरे घटनाक्रम पर नई बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई थी।

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