
Baruipur Encounter News: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है। इस घटना ने राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है। जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पुलिस की कार्रवाई को अपराध के खिलाफ सख्त संदेश बताया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
घटना के बाद राज्य में कानून व्यवस्था, पुलिस की कार्यशैली और एनकाउंटर की वैधता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
कैसे हुई प्रभास मंडल की मौत?
पुलिस के मुताबिक, प्रभास मंडल को घटनास्थल पर अपराध की पुनर्निर्माण प्रक्रिया (Crime Reconstruction) के लिए ले जाया गया था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और वहां से भागने की कोशिश की।
पुलिस का दावा है कि आरोपी ने भागते समय फायरिंग भी की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। गंभीर रूप से घायल प्रभास मंडल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालांकि इस पुलिस कार्रवाई को लेकर कई राजनीतिक दलों ने अलग-अलग सवाल उठाए हैं।
टीएमसी ने पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस एनकाउंटर की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी की मौत पुलिस कार्रवाई के दौरान होना बेहद गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) हाल ही में बारुईपुर गए थे और मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। ऐसे में रिपोर्ट आने से पहले आरोपी की मौत कई सवाल खड़े करती है।
रॉय ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी की इस तरह मौत हो जाती है तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की अलग से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस एनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था का तरीका बदलता दिखाई दे रहा है और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन होना चाहिए।
बीजेपी ने पुलिस कार्रवाई का किया समर्थन
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। बीजेपी का दावा है कि चुनाव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो वादे किए गए थे, सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि अपराधियों को कानून से बचने का कोई मौका नहीं मिलना चाहिए और पुलिस ने परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की है।
कमदुनी केस फिर चर्चा में क्यों?
प्रभास मंडल मामले के बीच बीजेपी ने वर्ष 2013 के चर्चित कमदुनी गैंगरेप और हत्या मामले को भी फिर से उठाया है।
पार्टी का कहना है कि उस मामले में पीड़िता को पूरा न्याय नहीं मिल सका। बीजेपी ने सरकार से मांग की है कि पुराने केस की फाइल दोबारा खोली जाए और जिन आरोपियों को राहत मिली थी या जिनकी सजा कम हुई थी, उनके मामलों की फिर से समीक्षा की जाए।
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई थी और अब नए सिरे से कार्रवाई की जरूरत है।
कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग उठाई
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को कानून के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि पुलिस एनकाउंटर जैसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में न्यायालय और कानून की प्रक्रिया सर्वोपरि है और किसी भी विवादित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष क्या है?
पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने सरकारी हथियार छीन लिया था और पुलिस पर फायरिंग की थी। ऐसे हालात में जवाबी कार्रवाई करना मजबूरी बन गया।
पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विभागीय प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी और सभी तथ्यों को रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
क्या एनकाउंटर पर उठेंगे कानूनी सवाल?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस एनकाउंटर के हर मामले में विस्तृत जांच जरूरी होती है। यदि आरोपी पुलिस हिरासत में था तो उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह जांच का अहम विषय बनता है।
ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल के सबूत और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी पक्ष को पुलिस की कार्रवाई पर संदेह होता है तो अदालत भी स्वतंत्र जांच के आदेश दे सकती है।
बंगाल की राजनीति में नया विवाद
प्रभास मंडल की मौत ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में कानून-व्यवस्था को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। एक ओर बीजेपी इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। यदि न्यायिक जांच होती है तो उससे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
बारुईपुर रेप और हत्या के आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बता रही है, जबकि विपक्ष इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस पूरे मामले में आगे कोई नई कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई होती है।



