
17 जून, 2026 | वाशिंगटन/तेहरान | US Iran Peace Deal: पिछले कई महीनों से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) को दहलाने वाले अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध को थामने की दिशा में एक बेहद बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान एक ऐतिहासिक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) पर औपचारिक हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दोनों ही देश इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहे हैं।
हालांकि इस शांति समझौते के पूर्ण दस्तावेज को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सामने आए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के अनुसार, यह डील ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों को हल करने के लिए 60 दिनों की कूटनीतिक वार्ता का रास्ता साफ करेगी। इस बीच, इजरायल के रुख और लेबनान की स्थिति को लेकर अनिश्चितता के बादल अभी भी मंडरा रहे हैं।
बीते 24 घंटे के मुख्य कूटनीतिक घटनाक्रम: बड़ी बातें
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ईरान का सतर्क रुख: अमेरिका और ईरान भले ही समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखने की बात कही है। अराघची ने कहा, “हमारे पास टूटे हुए वादों और समझौतों को फाड़े जाने का एक पुराना इतिहास रहा है। यह सब बातें हमारे दिमाग में आज भी मौजूद हैं।”
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अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में गिरावट: दोनों देशों के बीच प्रारंभिक समझौता होने और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति फिर से शुरू होने की संभावनाओं के बीच मंगलवार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सौदे की पूरी बारीकियां सामने न आने से बाजार अभी भी थोड़ा सतर्क है।
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डोनाल्ड ट्रंप का दावा और 60 दिनों का सीजफायर: समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह अंतरिम समझौता तेहरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। यह नया समझौता बीते अप्रैल महीने में घोषित किए गए अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) को अगले 60 दिनों के लिए और बढ़ा देगा, ताकि एक स्थायी शांति समझौते के लिए मेज पर बातचीत की जा सके।
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$300 बिलियन का युद्ध मुआवजा: ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देश युद्ध के बाद ईरान में पुनर्विकास परियोजनाओं (Redevelopment Projects) पर काम करेंगे। इसके लिए युद्ध मुआवजे के तौर पर कम से कम 300 अरब डॉलर (300 Billion Dollars) का फंड मुहैया कराया जाएगा।
लेबनान की शर्त पर फंसा पेंच: जेडी वेंस और नेतन्याहू के बयानों में टकराव
इस शांति समझौते के बीच सबसे बड़ा कूटनीतिक पेंच इजरायल और लेबनान को लेकर फंसता नजर आ रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने संकेत दिया है कि इस शांति समझौते के दायरे में इजरायल और लेबनान दोनों ही शामिल हैं और यह संधि उन पर भी लागू होती है।
इसके ठीक उलट, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल इस समझौते की किसी भी शर्त को मानने के लिए बाध्य नहीं है। इजरायल ने खुद को अप्रैल के सीजफायर और अमेरिका-ईरान के बीच बनी इस नई समझ, दोनों से ही पूरी तरह अलग कर लिया है। इजरायल के इस कदम ने इस शांति समझौते की मजबूती और टिकाऊपन पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
हटने जा रहा है अमेरिकी प्रतिबंध, समुद्री जहाजों की आवाजाही होगी बहाल
इस समझौते की सबसे बड़ी व्यावहारिक सफलता समुद्र में देखने को मिलेगी, जहां महीनों से दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने थीं:
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ब्लॉक हटाएगा वाशिंगटन: समझौते के तहत अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी सख्त समुद्री नाकेबंदी (Blockade) को पूरी तरह हटा लेगा।
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टैंकरों की आवाजाही: इसके बदले में ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को फिर से बहाल करने पर सहमत हो गया है।
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तेल निर्यात की तुरंत अनुमति: एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही बैंकिंग, परिवहन और बीमा से जुड़ी वैश्विक व्यवस्थाओं के सहयोग से ईरान को तुरंत कच्चे तेल का निर्यात शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी।
हालांकि, दोनों पक्षों ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को आगामी शुक्रवार से खोल दिया जाएगा, लेकिन दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियां अभी भी सतर्क हैं। वे पूरी तरह से परिचालन शुरू करने से पहले यह देखना चाहती हैं कि जमीन पर यह युद्धविराम कितना प्रभावी रहता है।
अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौता 2026: मुख्य बिंदु तालिका
वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह अंतरिम समझौता निश्चित रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल के बाजारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। लेकिन जब तक इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस कूटनीतिक फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं बनते, तब तक मध्य पूर्व में स्थायी शांति का दावा करना जल्दबाजी होगी। 60 दिनों की आगामी बातचीत यह तय करेगी कि यह समझौता एक ऐतिहासिक शांति की शुरुआत है या सिर्फ एक अस्थायी युद्धविराम।
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