
NASA Satellite Crash: अंतरिक्ष में भेजे गए कई सैटेलाइट अपने मिशन पूरे करने के बाद धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर लौट आते हैं। ऐसा ही एक सैटेलाइट अब फिर चर्चा में है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने बताया है कि उसका एक पुराना अंतरिक्ष यान Van Allen Probe A करीब 14 साल बाद पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश करने वाला है।
करीब 600 किलोग्राम (1300 पाउंड) वजनी यह अंतरिक्ष यान वर्ष 2012 में लॉन्च किया गया था। उस समय इसे पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन बेल्ट यानी विकिरण पट्टियों का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। अब इसका मिशन खत्म हो चुका है और यह धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर लौट रहा है।
कब होगा सैटेलाइट का री-एंट्री
जानकारी के मुताबिक यह सैटेलाइट मंगलवार को लगभग 19:45 EST (भारतीय समयानुसार करीब सुबह 10:15 बजे के आसपास) पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर सकता है। हालांकि समय को लेकर करीब 24 घंटे की अनिश्चितता बनी हुई है।
अंतरिक्ष से आने वाली वस्तुओं की सटीक समय और स्थान की भविष्यवाणी करना हमेशा आसान नहीं होता। इसलिए वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। अमेरिकी सेना की अंतरिक्ष निगरानी इकाई United States Space Force भी इसके री-एंट्री को ट्रैक कर रही है।
क्या धरती पर गिरने से होगा खतरा?
अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर कोई सैटेलाइट पृथ्वी पर गिरता है तो क्या इससे खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस मामले में खतरे की संभावना बेहद कम है।
NASA के मुताबिक जब यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करेगा तो तेज घर्षण के कारण इसका ज्यादातर हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि कुछ छोटे-मोटे हिस्से बच सकते हैं और वे पृथ्वी की सतह तक पहुंच सकते हैं।
एजेंसी का कहना है कि किसी व्यक्ति के इस मलबे से प्रभावित होने की संभावना 4200 में से सिर्फ 1 है। यानी वैज्ञानिकों के अनुसार जोखिम बहुत कम है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अभी तक पता नहीं कहां गिरेगा मलबा
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के किस हिस्से में प्रवेश करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे यह पृथ्वी के करीब आएगा, उसके गिरने की संभावित जगह के बारे में अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी।
अक्सर ऐसे सैटेलाइट समुद्र या निर्जन क्षेत्रों में गिरते हैं क्योंकि पृथ्वी की सतह का बड़ा हिस्सा समुद्र से ढका हुआ है। इसलिए संभावना यही रहती है कि इसका मलबा भी किसी समुद्री इलाके में गिरे।
क्यों भेजा गया था Van Allen Probe मिशन
Van Allen Probe मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मिशन में दो अंतरिक्ष यान भेजे गए थे – Van Allen Probe A और Van Allen Probe B।
इन दोनों सैटेलाइट का उद्देश्य पृथ्वी के आसपास मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन करना था, जिन्हें Van Allen Radiation Belts कहा जाता है।
ये बेल्ट पृथ्वी के चारों ओर मौजूद ऊर्जा से भरे कणों के विशाल क्षेत्र होते हैं जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा फंसे रहते हैं। इनका अध्ययन इसलिए जरूरी है क्योंकि यह पृथ्वी को अंतरिक्ष से आने वाली खतरनाक विकिरणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अपेक्षा से ज्यादा लंबा चला मिशन
इस मिशन को मूल रूप से सिर्फ दो साल के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन वैज्ञानिकों को इससे इतने महत्वपूर्ण डेटा मिलने लगे कि मिशन को कई बार बढ़ाया गया।
आखिरकार यह मिशन लगभग सात साल तक चला और 2019 में खत्म हुआ। इसके बाद दोनों सैटेलाइट का ईंधन खत्म हो गया और वे अपनी दिशा नियंत्रित करने में सक्षम नहीं रहे।
रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन क्यों जरूरी है
पृथ्वी के आसपास मौजूद ये रेडिएशन बेल्ट कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये सूर्य से आने वाली ऊर्जावान कणों और कॉस्मिक रेडिएशन को काफी हद तक रोकते हैं।
अगर ये बेल्ट न हों तो पृथ्वी पर मौजूद तकनीकी सिस्टम, सैटेलाइट और यहां तक कि इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।
इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से इनका अध्ययन करते रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियां पृथ्वी के आसपास के वातावरण को कैसे प्रभावित करती हैं।
मिशन की सबसे बड़ी खोज
Van Allen Probe मिशन के दौरान वैज्ञानिकों को कई महत्वपूर्ण खोजें मिलीं। उनमें से एक सबसे दिलचस्प खोज यह थी कि पृथ्वी के आसपास तीसरी अस्थायी रेडिएशन बेल्ट भी बन सकती है।
यह तीसरी बेल्ट सामान्य परिस्थितियों में मौजूद नहीं रहती, लेकिन जब सूर्य पर तेज गतिविधि होती है या सोलर स्टॉर्म आता है तब यह कुछ समय के लिए बन जाती है।
यह खोज अंतरिक्ष मौसम यानी Space Weather को समझने में काफी मददगार साबित हुई।
Van Allen Probe B अभी भी कक्षा में मौजूद
जहां Van Allen Probe A अब पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने वाला है, वहीं इसका जुड़वां सैटेलाइट Van Allen Probe B अभी भी अंतरिक्ष में मौजूद है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सैटेलाइट 2030 से पहले पृथ्वी के वातावरण में वापस नहीं आएगा। तब तक यह पृथ्वी की कक्षा में बना रहेगा।
अंतरिक्ष में बढ़ती सैटेलाइट संख्या और चुनौती
आज दुनिया भर के देशों और कंपनियों ने हजारों सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज दिए हैं। इससे अंतरिक्ष में मलबे यानी Space Debris की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।
जब पुराने सैटेलाइट अपने मिशन के बाद कक्षा से बाहर निकलते हैं तो वे धीरे-धीरे पृथ्वी के वातावरण में वापस आते हैं।
इसी वजह से अंतरिक्ष एजेंसियां अब ऐसे सैटेलाइट डिजाइन करने पर जोर दे रही हैं जो मिशन खत्म होने के बाद सुरक्षित तरीके से नष्ट हो जाएं या नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करें।
वैज्ञानिक लगातार कर रहे निगरानी
NASA और United States Space Force दोनों इस सैटेलाइट के री-एंट्री की निगरानी कर रहे हैं। जैसे-जैसे यह पृथ्वी के करीब आएगा, वैज्ञानिक इसकी संभावित दिशा और गिरने की जगह के बारे में अपडेट जारी करते रहेंगे।
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में खतरे की संभावना बेहद कम होती है।



