
SSC Exam Controversy 2026: देशभर में लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए कानूनी दौर में प्रवेश कर चुका है। हाल ही में परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी Eduquity Technologies Pvt. Ltd. ने यूट्यूबर नितीश राजपूत के खिलाफ दिल्ली की अदालत में ₹2.5 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
इस मामले ने एक बार फिर SSC परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सोशल मीडिया से निकलकर अब यह मुद्दा अदालत तक पहुंच गया है।
वीडियो से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह विवाद उस समय चर्चा में आया जब नितीश राजपूत ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने आरटीआई (RTI) के जरिए प्राप्त दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए SSC की टेंडर प्रक्रिया और परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनियों के चयन पर सवाल उठाए।
राजपूत ने अपने वीडियो में दावा किया कि नियमों में किए गए बदलाव, तकनीकी समस्याएं और व्यवस्थागत खामियां परीक्षा की पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती हैं।
उम्मीदवारों में वीडियो को मिली बड़ी प्रतिक्रिया
यह वीडियो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं तक तेजी से पहुंचा। कई उम्मीदवारों ने कमेंट और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने अनुभव साझा किए।
पिछले कुछ वर्षों में SSC परीक्षाओं के दौरान तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन, परीक्षा में देरी, सेंटर बदलने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में नितीश राजपूत का वीडियो कई छात्रों की भावनाओं से जुड़ गया।
Eduquity का जवाब: आरोपों को बताया गलत
Eduquity Technologies ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि नितीश राजपूत के वीडियो में कई भ्रामक जानकारियां दी गई हैं, जिससे कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
कंपनी का दावा है कि वीडियो के कारण उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है और इससे व्यापारिक नुकसान भी हो सकता है। इसी आधार पर कंपनी ने ₹2.5 करोड़ के हर्जाने की मांग की है और वीडियो हटाने की अपील की है।
नितीश राजपूत का पक्ष: रिकॉर्ड पर आधारित है वीडियो
इस विवाद में नितीश राजपूत ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका वीडियो सार्वजनिक दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारियों पर आधारित है।
उन्होंने वीडियो हटाने से इनकार कर दिया है और कहा है कि उन्होंने वही मुद्दे उठाए हैं, जिनसे लाखों छात्र पहले से परेशान हैं। उनके अनुसार, यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्रों के हितों से जुड़ा हुआ है।
अब सोशल मीडिया से कोर्ट तक पहुंचा मामला
शुरुआत में यह विवाद केवल सोशल मीडिया तक सीमित था, लेकिन अब यह पूरी तरह कानूनी लड़ाई में बदल गया है।
दिल्ली की अदालत में मामला दर्ज होने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले समय में इस केस का असर परीक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है।
छात्र संगठनों की बढ़ती सक्रियता
इस मामले के बाद कई छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षा समूह सक्रिय हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ संगठन इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने पर भी विचार कर रहे हैं।
छात्र संगठन SSC की पूरी भर्ती प्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के चयन और संचालन प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।
भर्ती व्यवस्था पर बढ़ती निगरानी
बीते कुछ वर्षों में देश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी और फर्जीवाड़े जैसे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी हस्तक्षेप कर चुका है।
इसी वजह से कई उम्मीदवारों को उम्मीद है कि इस मामले में भी न्यायिक समीक्षा हो सकती है, जिससे भविष्य में सुधार होगा।
पारदर्शिता और सुधार की मांग तेज
Nitish Rajput–Eduquity केस अब सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं रह गया है। यह सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बनता जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष, तकनीकी रूप से मजबूत और भरोसेमंद होनी चाहिए, ताकि मेहनती उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले सरकार और परीक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी हैं। उन्हें तकनीकी ढांचे को मजबूत करना होगा और पारदर्शिता बढ़ानी होगी।
साथ ही, सोशल मीडिया पर उठने वाले सवालों का समय रहते जवाब देना भी जरूरी है, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और दस्तावेज पेश करेंगे।
अगर अदालत किसी बड़े सुधार या जांच के आदेश देती है, तो इसका असर पूरे SSC सिस्टम पर पड़ सकता है।
उम्मीदवारों के लिए क्या है संदेश?
इस विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें।
साथ ही, अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहना भी आज के समय की जरूरत बन गया है।



