
Vijay Jana Nayagan Controversy: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और राजनेता विजय की चर्चित फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
क्या होता है U/A सर्टिफिकेट
U/A सर्टिफिकेट का अर्थ होता है कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे यह फिल्म माता-पिता या अभिभावक की निगरानी में देख सकते हैं। फिल्म निर्माताओं के लिए यह सर्टिफिकेट व्यावसायिक रूप से भी अहम माना जाता है, क्योंकि इससे दर्शकों का दायरा बढ़ता है। ‘जन नायकन’ के निर्माता भी इसी सर्टिफिकेट की मांग कर रहे थे।
दो जजों की पीठ ने क्यों रद्द किया आदेश
मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया, जबकि आरोप गंभीर प्रकृति के थे।
मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा गया
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस पूरे मामले को फिर से एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.टी. आशा के पास ताजा विचार के लिए भेज दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और आरोपों को देखते हुए सभी पक्षों को सुनना जरूरी है, ताकि निष्पक्ष फैसला लिया जा सके।
विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है ‘जन नायकन’
‘जन नायकन’ को अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद उनके पूरी तरह राजनीति में सक्रिय होने की चर्चा है। इसी वजह से फिल्म को लेकर दर्शकों और राजनीतिक हलकों में खास उत्सुकता बनी हुई है। यह फिल्म तमिलनाडु के प्रमुख पर्व पोंगल से पहले 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सर्टिफिकेशन में देरी के कारण रिलीज टल गई।
निर्माताओं ने क्यों खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेट जारी करने में हो रही देरी के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था। निर्माताओं का कहना था कि बोर्ड ने उन्हें सूचित किया था कि कुछ संशोधनों के बाद फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जरूरी बदलाव किए जाने के बावजूद सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
रिवाइजिंग कमेटी को भेजे जाने पर उठे सवाल
निर्माताओं ने फिल्म बोर्ड की अध्यक्ष द्वारा फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेजने के फैसले पर भी सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि जब पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया जाएगा, तो उसके बाद दोबारा समीक्षा के लिए भेजना अधिकार क्षेत्र से बाहर का फैसला है।
CBFC ने अदालत में क्या दलील दी
फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अदालत को बताया कि एक्ज़ामिनिंग कमेटी के एक सदस्य ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उसकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फिल्म के कुछ दृश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि फिल्म में सशस्त्र बलों को अनुचित तरीके से दर्शाया गया है।
एकल न्यायाधीश का पहले का फैसला
9 जनवरी को एकल न्यायाधीश की पीठ ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए CBFC को फिल्म का सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि बोर्ड की अध्यक्ष का दोबारा समीक्षा के लिए भेजने का निर्णय अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही, यह भी टिप्पणी की गई थी कि बोर्ड को अपनी सिफारिशें देने के बाद समिति के सदस्यों की शिकायतों पर विचार नहीं करना चाहिए था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ की कड़ी टिप्पणियां
हालांकि, इस आदेश के तुरंत बाद CBFC की अपील पर दो जजों की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई की और एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी। इस दौरान अदालत ने निर्माताओं पर ‘कृत्रिम तात्कालिकता’ पैदा करने और न्यायिक प्रणाली पर दबाव बनाने जैसी टिप्पणियां भी की थीं।
गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
मंगलवार को दिए गए ताजा आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ज़ामिनिंग कमेटी के सदस्य द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर थे। ऐसे में फिल्म बोर्ड की अध्यक्ष द्वारा फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेजने का फैसला स्वाभाविक था। अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में CBFC को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए था।
याचिका में संशोधन का निर्देश
अदालत ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश को बिना किसी स्पष्ट याचिका के अध्यक्ष के आदेश के गुण-दोष पर नहीं जाना चाहिए था। अंत में, कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी याचिका में संशोधन कर फिल्म को दोबारा समीक्षा के लिए भेजे जाने के आदेश को सीधे चुनौती दें।
आगे क्या होगी प्रक्रिया
अब यह मामला एक बार फिर एकल न्यायाधीश के समक्ष जाएगा, जहां सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। इस फैसले के बाद ‘जन नायकन’ की रिलीज को लेकर असमंजस बना हुआ है और दर्शकों को आगे के आदेश का इंतजार करना होगा।



