
Delhi Weather Today: उत्तर भारत में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में पहाड़ी राज्यों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम का असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 22 जनवरी से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी की संभावना है, जिससे ठंड के तेवर एक बार फिर तेज हो सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञ और ‘मौसम तक’ के संस्थापक देवेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ सामान्य नहीं है। जैसे-जैसे यह सिस्टम पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के करीब पहुंचेगा, इसे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से नमी का मजबूत सपोर्ट मिलेगा। इसी वजह से यह सिस्टम ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है और लंबे समय तक असर दिखा सकता है।
देवेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में खासकर पंजाब और आसपास के इलाकों में 22 जनवरी की सुबह घना कोहरा देखने को मिल सकता है। सुबह के समय दृश्यता कम रहने की आशंका है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। वहीं कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक हल्के बादल छाए रहने की संभावना है, जो दिन के समय सूरज की तपिश को सीमित कर सकते हैं।
IMD ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट और ठंड का असर और बढ़ सकता है।
हालांकि, देवेंद्र त्रिपाठी ने साफ किया है कि 22 जनवरी को मैदानी इलाकों में किसी बड़े मौसमीय घटनाक्रम की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि उस दिन गतिविधि मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित रहेगी। मैदानी इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रहेगा, हालांकि बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि 22 जनवरी की रात से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल बढ़ने लगेंगे, लेकिन असली बदलाव 23 जनवरी को देखने को मिलेगा। अगले दिन बारिश, तेज हवाएं और तापमान में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है, खासकर हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों में।
इस बीच, एक राहत की खबर भी सामने आई है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे हाल ही में जारी शीत लहर से कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ के पूरी तरह सक्रिय होते ही तापमान में फिर गिरावट संभव है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां भी मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली में अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दिन के समय हल्की धूप और शाम के वक्त ठंडी हवाओं का असर महसूस किया जा सकता है।
देवेंद्र त्रिपाठी के अनुसार, दोपहर के बाद वायुमंडल में बदलाव देखने को मिलेगा। हल्की ऊंचाई पर हवा की गति बढ़ेगी और करीब 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इससे वायु गुणवत्ता में थोड़ी बहुत सुधार की संभावना है, लेकिन ठंड का एहसास बरकरार रहेगा।
जहां पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे की समस्या बनी हुई है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर ऑफिस जाने वाले और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। बारिश और तेज हवाओं के कारण खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, बर्फबारी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी समस्याओं के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी अहम रहने वाले हैं। पश्चिमी विक्षोभ का असर न केवल तापमान बल्कि जनजीवन, यातायात और कृषि पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखना और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।



