
शेयर बाजार में तेज गिरावट, निवेशकों की बढ़ी चिंता
Share Market Crash Today: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर रुपये और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव में बाजार बुरी तरह टूट गया। Sensex और Nifty दोनों ही 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे एक ही दिन में निवेशकों की बड़ी रकम साफ हो गई।
Sensex में 1,000 अंक से ज्यादा की गिरावट
कारोबार के दौरान दबाव इतना ज्यादा था कि बीएसई Sensex एक समय 1,200 अंकों से ज्यादा टूट गया। दिन के अंत में यह 1,065 अंकों की गिरावट के साथ 82,180 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले दिन के निचले स्तर पर Sensex 82,010 तक फिसल गया था। यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को और आगे बढ़ाती नजर आई।
Nifty भी नहीं बच पाया, 25,300 के नीचे फिसला
वहीं एनएसई Nifty 50 में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। इंडेक्स करीब 353 अंकों की गिरावट के साथ 25,232 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली का असर मिडकैप और लार्जकैप दोनों सेगमेंट में साफ दिखाई दिया। निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते दिखे।
Reliance, Bajaj Finance और M&M बने गिरावट की बड़ी वजह
इस गिरावट के पीछे बाजार के दिग्गज शेयरों में आई कमजोरी बड़ी वजह रही। Reliance Industries, Bajaj Finance और Mahindra & Mahindra जैसे हैवीवेट शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली।
Sensex की 30 कंपनियों में से ज्यादातर लाल निशान में बंद हुईं। Bajaj Finance में करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Eternal, Sun Pharma, InterGlobe Aviation, Trent, Asian Paints और Bajaj Finserv जैसे शेयरों ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा।
HDFC Bank बना एकमात्र सहारा
पूरे Sensex पैक में अगर किसी शेयर ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी, तो वह था HDFC Bank। यह दिन के अंत में हरे निशान में बंद होने वाला एकमात्र प्रमुख शेयर रहा। हालांकि, अकेले HDFC Bank की मजबूती बाजार की समग्र गिरावट को संभाल नहीं पाई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से टूटा भरोसा
बाजार की कमजोरी के पीछे Foreign Institutional Investors (FII) की लगातार बिकवाली भी एक अहम कारण रही। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 3,200 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच डाले।
हालांकि, Domestic Institutional Investors (DII) ने कुछ हद तक बाजार को संभालने की कोशिश की और उन्होंने 4,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की, लेकिन FII की बिकवाली का असर ज्यादा भारी पड़ा।
कमजोर रुपया और वैश्विक संकेतों का दबाव
रुपये में जारी कमजोरी ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया। डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिससे विदेशी पूंजी का बाहर जाना तेज हुआ है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट
भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का Nikkei, दक्षिण कोरिया का Kospi, चीन का Shanghai Composite और हांगकांग का Hang Seng सभी नुकसान के साथ बंद हुए।
यूरोपीय बाजारों में भी कारोबार के दौरान 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे साफ है कि यह दबाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था।
अमेरिकी टैरिफ नीति से बढ़ी वैश्विक चिंता
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका की आक्रामक और अनिश्चित टैरिफ नीति ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अमेरिका द्वारा बार-बार नए शुल्क लगाने की धमकियों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
खास तौर पर यूरोपीय देशों को लेकर दिए गए हालिया बयानों ने निवेशकों के जोखिम लेने के मूड को कमजोर किया है, जिसका असर सीधे भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा रुझान
जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हुए निवेशकों का रुझान सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर आमतौर पर ऐसा ही देखने को मिलता है, और मौजूदा हालात भी कुछ ऐसे ही संकेत दे रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली बढ़त देखने को मिली। कच्चा तेल करीब 64 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता नजर आया। हालांकि, तेल की कीमतों में यह बढ़त फिलहाल भारतीय बाजार के लिए कोई बड़ी राहत नहीं बन पाई।
पिछले सत्र की कमजोरी का असर जारी
गौरतलब है कि सोमवार को भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। उस दिन Sensex करीब 324 अंक और Nifty करीब 109 अंक गिरा था। मंगलवार की गिरावट ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल बाजार में दबाव बना हुआ है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
आगे क्या? निवेशकों को क्या करना चाहिए
मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक संकेत, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी।
लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने का है, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।



