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NASA Artemis ii Launch Pad: 50 साल बाद इंसानों की चाँद की ओर वापसी | SLS Rocket Launch

NASA Artemis ii Launch Pad: करीब पाँच दशकों के लंबे इंतज़ार के बाद इंसान एक बार फिर चाँद की ओर उड़ान भरने के बेहद करीब पहुँच गया है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेट, स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS), को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित लॉन्च पैड पर पहुँचा दिया है। यह ऐतिहासिक कदम नासा के Artemis II मिशन की अंतिम तैयारियों की ओर इशारा करता है, जो 50 वर्षों में पहली बार इंसानों को चाँद के पास तक ले जाएगा।

लगभग 98 मीटर ऊँचे इस विशाल रॉकेट को वाहन असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च पैड 39B तक पहुँचाने में करीब 12 घंटे लगे। यह दूरी लगभग 4 मील यानी 6.5 किलोमीटर की थी। रॉकेट को एक विशेष विशाल मशीन, जिसे क्रॉलर-ट्रांसपोर्टर कहा जाता है, की मदद से बेहद धीमी गति से ले जाया गया। इसकी अधिकतम रफ्तार महज 0.82 मील प्रति घंटा रही, लेकिन यह नज़ारा लाखों लोगों के लिए बेहद रोमांचक था।

नासा ने इस पूरी यात्रा का लाइव प्रसारण किया, जिसमें दर्शकों ने इंसानी इतिहास की एक अहम तैयारी को अपनी आँखों से देखा। स्थानीय समयानुसार सुबह 7:04 बजे रॉकेट ने अपनी यात्रा शुरू की और शाम 6:41 बजे यह लॉन्च पैड पर सुरक्षित पहुँच गया।

अब जबकि रॉकेट अपनी जगह पर खड़ा है, नासा अगले कुछ दिनों में कई अहम परीक्षण करेगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है “वेट ड्रेस रिहर्सल”, जिसमें रॉकेट को पूरी तरह ईंधन से भरा जाएगा और लॉन्च काउंटडाउन की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाएगा। यह परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि असली लॉन्च के दिन कोई तकनीकी कमी न रह जाए।

नासा के अनुसार, अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो Artemis II मिशन का सबसे पहले संभावित लॉन्च 6 फरवरी को हो सकता है। इसके अलावा फरवरी, मार्च और अप्रैल में भी लॉन्च विंडो उपलब्ध हैं।

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे—नासा के रीड वाइज़मैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच, और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसन। ये सभी केनेडी स्पेस सेंटर में मौजूद थे और उन्होंने अपने रॉकेट को लॉन्च पैड पर पहुँचते हुए देखा। यह पल उनके लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों था।

कुछ ही हफ्तों में ये चारों अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर रॉकेट के शीर्ष पर बैठेंगे और चाँद की दिशा में उड़ान भरेंगे। यह मिशन दिसंबर 1972 में हुए Apollo 17 के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा के आसपास ले जाएगा।

हालांकि Artemis II मिशन में चाँद पर लैंडिंग नहीं होगी, लेकिन यह भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद अहम है। यह मिशन नासा के अगले बड़े लक्ष्य Artemis III की नींव रखेगा, जिसमें इंसानों को चाँद की सतह पर, खासतौर पर दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की योजना है।

नासा ने स्पष्ट किया है कि Artemis III मिशन “2027 से पहले नहीं” होगा, हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 से पहले चंद्र लैंडिंग संभव नहीं है।

Artemis II मिशन की शुरुआत में अंतरिक्ष यात्री पहले दो दिन पृथ्वी की कक्षा में रहेंगे। इसके बाद वे एक ऐसी कक्षा में प्रवेश करेंगे, जो पृथ्वी से करीब 40,000 मील दूर होगी—यानी चाँद की दूरी का लगभग पाँचवाँ हिस्सा। इस दौरान उन्हें पृथ्वी एक नीले गोले के रूप में दिखाई देगी, जैसा दृश्य इससे पहले किसी इंसान ने नहीं देखा।

इसके बाद Orion स्पेसक्राफ्ट करीब 2.5 लाख मील की यात्रा करते हुए चाँद की ओर बढ़ेगा। जब अंतरिक्ष यात्री चाँद के दूरस्थ हिस्से (far side) से गुजरेंगे, तो उन्हें तीन घंटे विशेष रूप से चंद्र अवलोकन के लिए दिए जाएंगे। इस दौरान वे चाँद की सतह की तस्वीरें लेंगे, उसकी भूगर्भीय संरचना का अध्ययन करेंगे और भविष्य की लैंडिंग के लिए महत्वपूर्ण डेटा जुटाएंगे।

इस मिशन का एक बेहद अहम हिस्सा यूरोप में तैयार किया गया है। Orion स्पेसक्राफ्ट का यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल (ESM) जर्मनी के ब्रेमेन शहर में बनाया गया है। यह मॉड्यूल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की ओर से योगदान है और इसे एयरबस ने तैयार किया है।

एयरबस की अंतरिक्ष इंजीनियर सियान क्लीवर के अनुसार, यह मॉड्यूल Orion को चाँद तक पहुँचाने के लिए आवश्यक प्रोपल्शन प्रदान करता है। इसके विशाल सोलर पैनल पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान को बिजली देते हैं। इसके अलावा, इसमें ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और पानी के बड़े टैंक मौजूद हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं।

एयरबस की टीम फिलहाल भविष्य के Artemis मिशनों के लिए और भी सर्विस मॉड्यूल तैयार कर रही है। एक मॉड्यूल को बनाने में करीब 18 महीने लगते हैं और इसके पीछे हजारों इंजीनियरिंग घंटे होते हैं। हर एक सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

नासा को इस मिशन को लेकर काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि Artemis कार्यक्रम पहले ही कई सालों की देरी झेल चुका है। इसके बावजूद, नासा का कहना है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा

Artemis मिशन मैनेजमेंट टीम के चेयरमैन जॉन हनीकट ने साफ शब्दों में कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य सभी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित चाँद तक पहुँचाना और फिर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है।

उन्होंने कहा, “हम तभी उड़ान भरेंगे जब हम पूरी तरह तैयार होंगे। अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा हमारी पहली और आखिरी प्राथमिकता है।”

जैसे-जैसे लॉन्च की तारीख नज़दीक आ रही है, पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर चाँद की ओर टिकी हैं। Artemis II मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि इंसानी इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है।

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