
Mumbai Mayor Election 2026: मुंबई की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। इसी बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के एक लग्ज़री होटल में ठहराने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मुंबई का अगला मेयर कौन होगा, इसे लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ अपने चरम पर है।
शिंदे गुट की शिवसेना ने इस बार नगर निगम चुनाव में 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से पार्टी को 29 सीटों पर जीत मिली। चुनाव परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, लगातार चली चुनावी भागदौड़ के बाद पार्षदों को “रिफ्रेश” करने के उद्देश्य से होटल में ठहराया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह व्यवस्था कितने दिनों तक चलेगी।
वहीं पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि होटल में ठहराने का मकसद नए पार्षदों का ओरिएंटेशन और संगठनात्मक प्रशिक्षण है और वे केवल दो-तीन दिनों के लिए वहां रहेंगे। लेकिन राजनीतिक जानकार इस कदम को महज़ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं मान रहे। उनका कहना है कि मुंबई मेयर चुनाव से पहले यह रणनीतिक कदम हो सकता है ताकि किसी भी संभावित टूट या दबाव से पार्षदों को दूर रखा जा सके।
इस फैसले का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि उसी दिन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक रहस्यमय बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर “भगवान की इच्छा रही” तो उनकी पार्टी अब भी मुंबई में मेयर बना सकती है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हो गईं।
अगर संख्या बल की बात करें तो स्थिति बेहद दिलचस्प है। 227 सदस्यीय BMC में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में शिंदे गुट के 29 पार्षद भाजपा के लिए बेहद अहम हो जाते हैं। अगर भाजपा और शिंदे गुट साथ आते हैं तो पहली बार मुंबई में भाजपा का मेयर बनने का रास्ता साफ हो सकता है।
दूसरी ओर शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को 6 सीटें मिली हैं। कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ते हुए 24 सीटें हासिल कीं। AIMIM को 8, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और NCP (शरद पवार गुट) को 1 सीट मिली है।
चुनाव नतीजों के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि उनका सपना मुंबई में शिवसेना (UBT) का मेयर बनाना है और यह सपना अभी अधूरा नहीं हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि भाजपा यह समझ रही है कि उसने शिवसेना (UBT) को खत्म कर दिया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी ने शिंदे गुट से ज्यादा सीटें जीती हैं और भाजपा शिवसेना (UBT) को जनता के बीच खत्म नहीं कर पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता के दम पर हर संभव कोशिश की, लेकिन वह वफादारी नहीं खरीद सकी।
उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुंबई को “गिरवी रखकर” जीत हासिल की गई है और मराठी मानूस इस “पाप” को कभी माफ नहीं करेगा। ठाकरे ने कहा कि यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब असली संघर्ष शुरू हुआ है।
एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने उन्हें “गद्दार” करार दिया और कहा कि जिन लोगों ने पार्टी तोड़ी, उन्हें यह सोचना चाहिए कि उन्होंने कितना बड़ा पाप किया है।
बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने भाजपा को “कागज़ों पर मजबूत लेकिन सड़कों पर कमजोर” पार्टी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को चुनाव जीतने के लिए दूसरी पार्टियों को तोड़ना पड़ा, चुनाव में मिटने वाली स्याही का इस्तेमाल किया गया और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ।
यह बयान मतदान के दिन सामने आए उस विवाद की पृष्ठभूमि में आया, जिसमें विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि वोट डालने के बाद उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही आसानी से मिटाई जा सकती थी, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।
उद्धव ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को पैसों का लालच दिया गया, उन्हें धमकाया गया और उनकी पार्टी को मानसिक रूप से तोड़ने की हर कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद शिवसेना (UBT) ने मजबूती से मुकाबला किया।
उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (UBT), MNS और NCP (SP) के पार्षद मिलकर BMC में हुए कथित घोटालों को उजागर करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि मुंबई की ज़मीन और संसाधनों का इस्तेमाल केवल “मुम्बईकरों” के हित में ही हो।
विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा कि वह हार मानने वाली मानसिकता के नहीं हैं। उनके अनुसार, उनकी पार्टी ने भाजपा को करारा जवाब दिया है और आने वाले समय में राजनीतिक तस्वीर और भी बदलेगी।
कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की कुर्सी को लेकर चल रहा यह सियासी संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज़ होने वाला है। शिंदे गुट के पार्षदों को होटल में ठहराने का फैसला हो या उद्धव ठाकरे की आक्रामक रणनीति—दोनों ही संकेत देते हैं कि मुंबई की राजनीति में अभी कई बड़े मोड़ आने बाकी हैं।



