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Maharashtra Municipal Election Results: मुंबई से पुणे तक BJP का परचम, ठाकरे-पवार परिवारों को बड़ा झटका

Maharashtra Municipal Election Results: करीब चार साल पहले हुए शिवसेना विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में जो बदलाव शुरू हुआ था, उसकी सबसे बड़ी तस्वीर अब नगर निकाय चुनावों के नतीजों में साफ नजर आ रही है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रचते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। 227 सीटों वाली देश की सबसे अमीर नगर पालिका में BJP की यह जीत न सिर्फ प्रतीकात्मक है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में उसके बढ़ते वर्चस्व को भी दर्शाती है।

इन नतीजों के साथ ही दशकों से मुंबई पर पकड़ बनाए हुए ठाकरे परिवार का गढ़ दरकता नजर आया। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव से ठीक पहले हाथ मिलाकर ‘मराठी मानूस’ के नारे के साथ मैदान में उतरने की कोशिश की थी, लेकिन यह प्रयोग उन्हें मुंबई में सत्ता के करीब नहीं ला सका। वहीं दूसरी ओर, शरद पवार और अजित पवार की जोड़ी भी अपने पारंपरिक गढ़ पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में BJP के बढ़ते प्रभाव को रोकने में नाकाम रही।

29 नगर निगमों में BJP-महा‍युति का दबदबा

15 जनवरी को महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में चुनाव हुए थे। इनमें से अधिकतर नगर निकायों का कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच समाप्त हो चुका था, जिसके बाद लंबे अंतराल के बाद ये चुनाव कराए गए। खास बात यह रही कि इनमें से 9 नगर निगम मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आते हैं, जो देश का सबसे अधिक शहरीकृत इलाका माना जाता है।

चुनाव नतीजों में BJP के नेतृत्व वाली महायुति ने 29 में से 25 नगर निगमों में जीत दर्ज की। इस शानदार प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “महाराष्ट्र मजबूती से भाजपा के साथ खड़ा है।” पार्टी नेतृत्व ने इन नतीजों को ‘मिशन मुंबई’ की बड़ी सफलता बताया है, जिसके जरिए BJP ने खुद को आर्थिक राजधानी में एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित किया है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और NDA की मजबूती

नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महाराष्ट्र की जनता का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि राज्य की जनता ने NDA के जनकल्याण और सुशासन के एजेंडे पर भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन नतीजों से यह साफ है कि महाराष्ट्र और NDA के बीच का रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है।

BJP नेताओं का मानना है कि यह जीत सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी राजनीतिक धारा का ही विस्तार है, जिसमें पार्टी ने लगातार अपनी स्थिति मजबूत की है।

शिवसेना का बदला समीकरण और शिंदे गुट की बढ़त

एक समय तक BMC को ठाकरे-नेतृत्व वाली शिवसेना का अभेद्य किला माना जाता था। ‘मराठी अस्मिता’ के विचार पर खड़ी यह पार्टी दशकों तक मुंबई की राजनीति की धुरी रही। लेकिन शिवसेना में टूट के बाद हालात तेजी से बदले। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, ठाकरे परिवार पर भारी पड़ती दिखी।

एकनाथ शिंदे ने NDTV से बातचीत में कहा कि उनकी राजनीति विकास पर केंद्रित है, जबकि विरोधियों ने भावनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, मुंबई के मतदाता अब बदलाव और सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पूरी तरह नया नहीं है, क्योंकि BJP पहले भी अविभाजित शिवसेना के साथ मिलकर सत्ता में रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब BJP खुद को अधिक प्रभावशाली स्थिति में पा रही है।

‘हिंदुत्व’ और चुनावी रणनीति

BJP नेताओं ने इस जीत को अपने वैचारिक एजेंडे से भी जोड़ा है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और BJP नेता नितेश राणे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो हिंदुओं की बात करेगा, वही महाराष्ट्र पर राज करेगा। इस बयान को पार्टी के चुनावी संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में असर दिखाया।

RSS के गढ़ नागपुर में भी BJP का प्रदर्शन मजबूत रहा। 151 सदस्यीय नागपुर नगर निगम में पार्टी अपने पिछले रिकॉर्ड को पार करने की ओर बढ़ती दिखी, जबकि कांग्रेस वहां खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई।

नितिन गडकरी का बयान और पार्टी का आत्मविश्वास

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इन नतीजों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र की विकास यात्रा और तेज होगी। गडकरी ने राज्य BJP अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और अन्य नेताओं की भी सराहना की।

विवादों के बीच निर्दलीय जीत

इन चुनावों में एक विवादास्पद चेहरा भी सामने आया। 2017 में पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रिकांत पांगारकर जलना नगर निगम से निर्दलीय पार्षद चुने गए। वार्ड नंबर 13 से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 2,661 वोट हासिल किए और BJP उम्मीदवार को मामूली अंतर से हराया। शिवसेना को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख दलों ने उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे, फिर भी उनकी जीत चर्चा का विषय बन गई।

कांग्रेस की स्थिति और लातूर में राहत

मुंबई की नगर राजनीति में कांग्रेस की मौजूदगी इन चुनावों में बेहद सीमित रह गई। BJP और शिंदे गुट की शिवसेना के आगे पार्टी हाशिये पर जाती नजर आई। हालांकि कांग्रेस के लिए एकमात्र राहत लातूर से आई, जो दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का गढ़ माना जाता है।

लातूर नगर निगम में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यहां BJP 22 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। बाकी सीटें वंचित बहुजन आघाड़ी और NCP को मिलीं। स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के पीछे चुनाव प्रचार के दौरान राज्य BJP अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के एक बयान की भी भूमिका रही, जिसमें उन्होंने विलासराव देशमुख की यादों को “मिटाने” की बात कही थी। इस बयान को लेकर स्थानीय मतदाताओं में नाराजगी देखी गई।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि BJP राज्य की शहरी राजनीति में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरी केंद्रों में पार्टी का प्रदर्शन यह दिखाता है कि सत्ता का संतुलन तेजी से बदल रहा है। वहीं ठाकरे और पवार परिवारों के लिए यह नतीजे एक बड़ा राजनीतिक झटका माने जा रहे हैं।

आने वाले समय में इन नतीजों का असर राज्य की राजनीति और भविष्य की चुनावी रणनीतियों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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