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Nipah Virus Bengal Alert: दो नर्स ICU में, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

Nipah Virus Bengal Alert: कोलकाता के पास उत्तर 24 परगना जिले से एक बार फिर गंभीर स्वास्थ्य संकट की आशंका सामने आई है। यहां एक निजी अस्पताल में भर्ती दो नर्सों में निपाह वायरस (Nipah Virus) संक्रमणिमशन की आशंका जताई जा रही है। दोनों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली यानी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। इस खबर के सामने आते ही राज्य और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य तंत्र में अलर्ट मोड घोषित कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि ये दोनों नर्स उसी निजी अस्पताल में कार्यरत हैं, जहां वे फिलहाल भर्ती हैं। अस्पताल उत्तर 24 परगना के बारासात इलाके में स्थित है, जो कोलकाता से लगभग 26 किलोमीटर दूर है। मरीजों में एक पुरुष और एक महिला नर्स शामिल हैं, जिनके रक्त नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

AIIMS कल्याणी में जांच, स्वास्थ्य भवन को रिपोर्ट भेजी गई

स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार, दोनों नर्सों के ब्लड सैंपल्स को ICMR से मान्यता प्राप्त वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी में भेजा गया है। यह लैब ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), कल्याणी में स्थित है, जो कोलकाता से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में नादिया जिले में है।

जांच रिपोर्ट राज्य के स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ‘स्वास्थ्य भवन’ को भेज दी गई है। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हालात को बेहद गंभीर मानकर संभाल रहे हैं।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार संपर्क

निपाह वायरस की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी, जिनमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव भी शामिल हैं, पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम के साथ लगातार संपर्क में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नर्स अलग-अलग जिलों से हैं। महिला नर्स नादिया जिले के कल्याणी की रहने वाली हैं, जबकि पुरुष नर्स पूर्व बर्दवान जिले के कटवा इलाके से हैं। इसी वजह से संक्रमण के संभावित फैलाव को रोकने के लिए कई जिलों में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

तीन जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने नादिया, पूर्व बर्दवान और उत्तर 24 परगना जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि संक्रमित संदिग्ध मरीजों के संपर्क में कौन-कौन लोग आए थे और कहीं वायरस आगे तो नहीं फैला।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन सभी स्थानों की पहचान कर रही हैं, जहां मरीजों ने पिछले कुछ दिनों में यात्रा की या संपर्क किया। जरूरत पड़ने पर और लोगों के सैंपल लिए जा सकते हैं।

कैसे बिगड़ी महिला नर्स की हालत

स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार, महिला नर्स करीब 10 दिन पहले अपने घर कटवा गई थीं। वहीं उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआती लक्षणों के बाद उन्हें कटवा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद उन्हें बर्दवान मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां हालत और गंभीर हो गई। अंततः उन्हें बारासात के निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां वह फिलहाल ICU में भर्ती हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

पुरुष नर्स की हालत भी गंभीर

पुरुष नर्स की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। उन्हें भी ICU में रखा गया है और वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जा रहा है। दोनों मरीजों को पूरी तरह से आइसोलेशन में रखा गया है ताकि संक्रमण फैलने की किसी भी आशंका को रोका जा सके।

निपाह वायरस क्या है और क्यों है खतरनाक?

निपाह वायरस एक अत्यंत खतरनाक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसकी मृत्यु दर काफी अधिक होती है, जो 40 प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक हो सकती है। यही कारण है कि निपाह वायरस को विश्व के सबसे घातक वायरसों में गिना जाता है।

इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 से 1999 के बीच मलेशिया और सिंगापुर में हुई थी, जहां सैकड़ों लोग इससे संक्रमित हुए थे। भारत में पहली बार 2001 और फिर 2007 में पश्चिम बंगाल और पड़ोसी बांग्लादेश में इसके मामले सामने आए थे।

चमगादड़ हैं वायरस के प्राकृतिक वाहक

विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस का प्राकृतिक स्रोत ‘प्टेरोपस’ प्रजाति के फल खाने वाले चमगादड़ होते हैं, जिन्हें आम भाषा में फ्लाइंग फॉक्स भी कहा जाता है। ये चमगादड़ वायरस को बिना बीमार हुए अपने शरीर में रखते हैं और फलों या अन्य माध्यमों से इंसानों तक संक्रमण पहुंचा सकते हैं।

निपाह वायरस सूअरों में भी बीमारी फैला सकता है, और वहां से यह इंसानों तक पहुंच सकता है।

लक्षण और खतरे

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे ही होते हैं, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो जाती है। मरीज को बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गले में खराश हो सकती है।

गंभीर मामलों में मरीज को चक्कर आना, अत्यधिक नींद, मानसिक भ्रम, तेज सांस की तकलीफ, मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) और दौरे पड़ने जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।

इलाज क्यों है चुनौतीपूर्ण?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह वायरस को प्राथमिकता वाले रोगों की सूची में रखा है, लेकिन अब तक इसके लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं और कुछ मामलों में रिबाविरिन जैसे ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी तरह के बुखार या गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे के कदम उठाए जाएंगे।

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