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Congress protest MGNREGA: ‘काला कानून’ के खिलाफ कांग्रेस का एलान

Congress protest MGNREGA: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करने और उसे “बुलडोजर से कुचलने” का गंभीर आरोप लगाया। एक वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने कहा कि सरकार जिस नए कानून के जरिए MGNREGA को खत्म या बदलना चाहती है, वह एक “काला कानून” है और कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ता देशभर में इसका विरोध करेंगे।

सोनिया गांधी ने कहा कि MGNREGA को कमजोर करके मोदी सरकार ने देश के करोड़ों किसानों, मजदूरों और भूमिहीन गरीबों के हितों पर सीधा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने ग्रामीण गरीबों की जरूरतों और अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया है।

MGNREGA से जुड़ी यादें और मनमोहन सिंह का दौर

ग्रामीण भारत को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें आज भी वह दिन स्पष्ट रूप से याद है, जब करीब 20 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में MGNREGA कानून संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम बताया।

उनका कहना था कि यह कानून देश के सबसे वंचित, शोषित और गरीब तबकों के लिए जीवनरेखा साबित हुआ। इससे न सिर्फ रोजगार का कानूनी अधिकार मिला, बल्कि गांवों में मजबूरी में होने वाला पलायन भी काफी हद तक रुका।

ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ बना MGNREGA

सोनिया गांधी ने कहा कि MGNREGA के जरिए ग्राम पंचायतों को मजबूत किया गया और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिली। ग्रामीण समुदाय को यह भरोसा मिला कि मुश्किल समय में सरकार उनके साथ खड़ी है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया था। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय का प्रतीक थी।

‘बिना चर्चा, बिना सहमति बदला गया कानून’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि हाल ही में सरकार ने MGNREGA पर “बुलडोजर चला दिया”। उन्होंने कहा कि न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम इस कानून से हटा दिया गया, बल्कि इसकी संरचना और स्वरूप को भी मनमाने ढंग से बदल दिया गया।

सोनिया गांधी ने कहा कि यह सब कुछ बिना किसी व्यापक चर्चा, बिना हितधारकों से परामर्श और बिना विपक्ष को विश्वास में लिए किया गया। उनके मुताबिक, यह संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

दिल्ली से होगा फैसला, गांव पीछे छूटेंगे

सोनिया गांधी ने नए कानून पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब यह तय करने की शक्ति कि किसे कितना रोजगार मिलेगा, कहां मिलेगा और कैसे मिलेगा—सब कुछ दिल्ली में बैठे लोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे जमीनी हकीकत से जुड़े गांवों की भूमिका खत्म हो जाएगी।

उनका आरोप था कि इस बदलाव से पंचायतों और स्थानीय निकायों की स्वायत्तता कमजोर होगी और ग्रामीण जरूरतों को समझने की क्षमता और भी घटेगी।

‘MGNREGA किसी एक पार्टी की योजना नहीं’

कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि MGNREGA कभी कांग्रेस की पार्टी-विशेष योजना नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह देश और जनता के हित से जुड़ी योजना थी, जिसे व्यापक राष्ट्रीय सहमति के साथ लागू किया गया था।

उनका कहना था कि इस कानून को कमजोर करना दरअसल देश के ग्रामीण ताने-बाने पर हमला है। इससे किसानों, मजदूरों और भूमिहीन गरीबों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।

कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा

अपने संदेश में सोनिया गांधी ने कहा कि 20 साल पहले उन्होंने गरीबों के रोजगार के अधिकार के लिए संघर्ष किया था और आज भी वह इस “काले कानून” के खिलाफ उसी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी नेता और देशभर के लाखों कार्यकर्ता ग्रामीण जनता के साथ खड़े हैं और इस कानून को चुनौती देंगे। पार्टी ने संकेत दिया है कि यह लड़ाई संसद से लेकर गांव-गांव तक लड़ी जाएगी।

संसद में VB-G RAM G Bill पर हंगामा

गौरतलब है कि संसद ने गुरुवार को Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Bill पारित कर दिया। यह विधेयक 20 साल पुराने MGNREGA कानून की जगह लेने के लिए लाया गया है।

नए कानून में हर साल 125 दिनों के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देने की बात कही गई है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए केंद्र सरकार राज्यों पर वित्तीय बोझ डाल रही है और मूल भावना को कमजोर कर रही है।

विपक्ष का तीखा विरोध

VB-G RAM G Bill के संसद में पेश होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। खासतौर पर महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे देश की विरासत और विचारधारा पर हमला बताया।

राज्यसभा में यह बिल वॉयस वोट के जरिए पारित हुआ, जबकि लोकसभा में भी भारी हंगामे के बीच इसे मंजूरी दी गई।

सरकार का बचाव

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि पुराने कानून में कई खामियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए नया कानून जरूरी था। उन्होंने दावा किया कि नया ढांचा रोजगार और आजीविका दोनों को मजबूत करेगा।

हालांकि, विपक्ष इस दावे से सहमत नहीं है और उसे डर है कि केंद्र सरकार के बढ़ते नियंत्रण से राज्यों और पंचायतों की भूमिका सीमित हो जाएगी।

राजनीतिक टकराव और आगे की राह

MGNREGA को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। कांग्रेस पहले ही साफ कर चुकी है कि वह इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप देगी।

ग्रामीण भारत में MGNREGA की अहमियत को देखते हुए यह बहस सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर राजनीति, चुनाव और नीतिगत फैसलों पर भी पड़ सकता है।

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