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Adani Group Airport Expansion | 11 Airports के लिए आक्रामक बोली की तैयारी

Adani Group Airport Expansion: भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आदाणी ग्रुप एक बार फिर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। समूह की एयरपोर्ट इकाई Adani Airport Holdings Limited (AAHL) ने संकेत दिया है कि वह केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण के लिए पेश किए जा रहे सभी 11 हवाई अड्डों के लिए आक्रामक बोली लगाएगी। यह कदम अगले पांच वर्षों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 11 अरब डॉलर (लगभग ₹90,000 करोड़) के निवेश की रणनीति का हिस्सा है।

आदाणी ग्रुप पहले ही देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर बन चुका है। इसके नियंत्रण में भारत के कुल यात्री हवाई यातायात का लगभग 23 प्रतिशत और कार्गो ट्रैफिक का करीब 33 प्रतिशत हिस्सा आता है। अब समूह का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को और मजबूत करना है।

सरकार की निजीकरण नीति से आदाणी को बड़ा मौका

भारत सरकार लंबे समय से हवाई अड्डों के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार का उद्देश्य न केवल मौजूदा एयरपोर्ट्स की क्षमता बढ़ाना है, बल्कि नए एयरपोर्ट्स के निर्माण को भी तेज करना है। मौजूदा समय में देश में करीब 163 हवाई अड्डे हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक यह संख्या 350 से 400 तक पहुंचाई जाए।

इसी रणनीति के तहत इस साल की शुरुआत में केंद्र सरकार ने अमृतसर और वाराणसी सहित 11 हवाई अड्डों को निजी क्षेत्र को लंबी अवधि के लिए लीज पर देने की योजना की घोषणा की थी। आदाणी ग्रुप इस मौके को पूरी तरह भुनाने की तैयारी में है।

“हम सभी 11 एयरपोर्ट्स के लिए बोली लगाएंगे” – जीत आदाणी

मुंबई में दिए गए एक इंटरव्यू में जीत आदाणी, जो AAHL के डायरेक्टर हैं, ने साफ कहा कि समूह इन सभी एयरपोर्ट्स के लिए बोली लगाएगा। उन्होंने कहा कि आदाणी ग्रुप एविएशन सेक्टर को लेकर बेहद आशावादी है और अगले चरण के निजीकरण में पूरी आक्रामकता के साथ उतरेगा।

उनके मुताबिक, एयरपोर्ट जैसे लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करना आदाणी ग्रुप की कोर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मजबूत होगी पकड़

आदाणी ग्रुप के एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में इस महीने एक और बड़ा नाम जुड़ने जा रहा है। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसी महीने व्यावसायिक संचालन शुरू करने जा रहा है। यह आदाणी ग्रुप का पहला ऐसा एयरपोर्ट है, जिसे उसने शुरुआत से खुद विकसित किया है।

इस एयरपोर्ट का विकास Navi Mumbai International Airport Ltd (NMIAL) कर रही है, जिसमें आदाणी ग्रुप की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एयरपोर्ट के 25 दिसंबर से कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने की उम्मीद है।

₹19,650 करोड़ की लागत, 2 करोड़ यात्रियों की शुरुआती क्षमता

नवी मुंबई एयरपोर्ट का पहला चरण करीब ₹19,650 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। शुरुआत में इसकी सालाना क्षमता 2 करोड़ यात्रियों की होगी, जिसे आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 9 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है।

इससे मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में एयर ट्रैफिक को सपोर्ट मिलेगा।

मुंबई एयरपोर्ट पहले ही है आदाणी के पास

आदाणी ग्रुप पहले ही GVK ग्रुप से मुंबई एयरपोर्ट का अधिग्रहण कर चुका है। इसके अलावा समूह देश के छह अन्य बड़े एयरपोर्ट्स का संचालन करता है, जिनमें अहमदाबाद, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, जयपुर और मंगलुरु शामिल हैं।

इस तरह आदाणी के पोर्टफोलियो में मेट्रो और रीजनल दोनों तरह के एयरपोर्ट्स शामिल हैं, जो उसे भविष्य की बोली प्रक्रियाओं में मजबूत स्थिति में लाते हैं।

पहले भी निजीकरण में बड़ी जीत हासिल कर चुका है समूह

2019 में हुए पहले बड़े एयरपोर्ट निजीकरण राउंड में आदाणी ग्रुप ने छह एयरपोर्ट्स अपने नाम किए थे। इसके बाद 2021 में मुंबई एयरपोर्ट का अधिग्रहण कर समूह ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।

अब सरकार द्वारा अगले चरण में जिन 11 एयरपोर्ट्स को पीपीपी मॉडल के तहत देने की योजना है, उसमें आदाणी फिर से सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है।

IPO को लेकर क्या है योजना?

AAHL के संभावित IPO (Initial Public Offering) को लेकर भी चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। इस पर जीत आदाणी ने कहा कि फिलहाल किसी निश्चित समयसीमा का फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि लिस्टिंग या डी-मर्जर का फैसला कुछ अहम माइलस्टोन्स पूरे होने के बाद ही किया जाएगा।

फिलहाल कंपनी EBITDA स्तर पर पॉजिटिव है, लेकिन भारी पूंजीगत खर्च के कारण अभी और निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन तय करने के लिए भविष्य में समान कंपनियों के मल्टीपल्स को देखा जाएगा।

भारत में तेजी से बढ़ रहा हवाई सफर

भारत का एविएशन सेक्टर इस समय जबरदस्त ग्रोथ के दौर से गुजर रहा है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में करीब 17.4 करोड़ यात्रियों ने देश के भीतर और बाहर हवाई यात्रा की, जो पिछले साल से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है।

भारतीय एयरलाइंस ने 2023 के बाद से अब तक 1,300 से ज्यादा नए विमानों का ऑर्डर दिया है, जो आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग को और बढ़ाएगा।

एयरलाइन बिजनेस में उतरने का कोई इरादा नहीं

हालांकि एविएशन सेक्टर में मजबूत मौजूदगी के बावजूद आदाणी ग्रुप का एयरलाइन बिजनेस में उतरने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। जीत आदाणी ने साफ कहा कि एयरलाइन बिजनेस में मार्जिन बेहद कम होता है और यह अलग तरह की मानसिकता की मांग करता है।

उनके अनुसार, आदाणी ग्रुप की ताकत हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, लंबी अवधि की परिसंपत्तियों के निर्माण और उनके कुशल संचालन में है, न कि एयरलाइन संचालन में।

आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा मुकाबला

एयरपोर्ट निजीकरण के अगले दौर में आदाणी के साथ-साथ GMR ग्रुप जैसे अन्य बड़े खिलाड़ी भी सक्रिय रहेंगे। ऐसे में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। लेकिन मौजूदा पोर्टफोलियो और वित्तीय क्षमता को देखते हुए आदाणी ग्रुप को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

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