देश

भारत की GDP में धमाकेदार उछाल! सितंबर तिमाही में 8.2% की रिकॉर्ड ग्रोथ, त्योहारों और उपभोक्ता खर्च ने बढ़ाया रफ्तार

भारत की GDP में धमाकेदार उछाल: भारत की अर्थव्यवस्था ने सितंबर तिमाही में एक बार फिर अपनी मजबूती का दम दिखाया है। जुलाई से सितंबर 2025 के बीच देश की GDP में 8.2% की तेजी दर्ज की गई है, जो उम्मीदों से कहीं अधिक है। अर्थशास्त्रियों ने इस अवधि के लिए 7.3% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़ों ने न केवल इस अनुमान को पीछे छोड़ा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत को भी वैश्विक स्तर पर रेखांकित किया।

इस तिमाही में GDP वृद्धि के पीछे कई कारण रहे, जिनमें प्रमुख हैं—मजबूत घरेलू मांग, त्योहारों से पहले बढ़ा उत्पादन, और निर्यातकों द्वारा अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से पहले तेजी से शिपमेंट भेजना। इसके अलावा सरकार द्वारा लागू की गई टैक्स कटौती ने भी उपभोक्ता मांग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उपभोक्ता खर्च ने बढ़ाई GDP की रफ्तार

GDP का लगभग 57% हिस्सा निजी उपभोग व्यय यानी प्राइवेट कंजम्पशन स्पेंडिंग से आता है। इस तिमाही में उपभोक्ता खर्च में 7.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही के 7% की तुलना में काफी अधिक है।

त्योहारों से पहले बाजार में मांग तेज होती है, और इस बार भी देशभर में नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के चलते खरीदारी में भारी बढ़ोतरी देखी गई। इससे न केवल रिटेल सेक्टर बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स उद्योग को भी बड़ा लाभ मिला।

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद निर्यात में तेजी

सितंबर तिमाही में भारत को एक बड़ा झटका तब लगा जब अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त 25% टैक्स लगाकर कुल टैरिफ 50% कर दिया। हालांकि, भारतीय निर्यातकों ने इस प्रभाव को कम करने के लिए अगस्त के आखिर तक भारी मात्रा में निर्यात भेजे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘फ्रंट-लोडिंग ऑफ एक्सपोर्ट्स’ GDP वृद्धि का एक अहम कारण रहा।

एलारा सिक्योरिटीज की इक्विटी इकॉनॉमिस्ट गरिमा कपूर के मुताबिक, “यह एक ब्लॉकबस्टर GDP नंबर है, जिसमें निर्यातकों ने समय रहते शिपमेंट बढ़ाकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस तिमाही के आधार पर FY26 की ग्रोथ 7.5% के आसपास जा सकती है, जो सरकारी अनुमान से अधिक है।”

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का शानदार प्रदर्शन

भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने सालाना आधार पर 9.1% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछली तिमाही के 7.7% से बेहतर है। बढ़ती फेस्टिव डिमांड, ऑटो और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में उछाल और निर्यात में बढ़ोतरी ने इस क्षेत्र को मजबूती दी।

हालांकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में कुछ धीमापन देखने को मिला। इस क्षेत्र में 7.2% की वृद्धि दर्ज हुई, जो पिछले आंकड़े 7.6% से थोड़ी कम है। इसके बावजूद, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में जारी निवेश ने सेक्टर को स्थिर रखा।

सरकारी खर्च में गिरावट

इस तिमाही का एक चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि सरकारी खर्च, जो GDP का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, 2.7% घट गया। इससे पहले की तिमाही में इसमें 7.4% की वृद्धि देखी गई थी।
यह संकेत देता है कि सरकार ने खर्च की गति को थोड़ा धीमा किया है, संभवतः वित्तीय अनुशासन के तहत या निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए।

मुद्रास्फीति में बड़ी राहत—RBI कर सकता है दरों में कटौती

अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई घटकर मात्र 0.25% रह गई, जो एक ऐतिहासिक गिरावट है। इससे आम लोगों के लिए जहां राहत मिली, वहीं RBI पर भी ब्याज दरें कम करने का दबाव बढ़ गया है।

कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा बैठक में RBI रेपो रेट में कटौती कर सकता है, जिससे उपभोक्ता लोन और कॉरपोरेट उधारी दोनों सस्ते हो जाएंगे।

अब तक RBI इस वर्ष कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है, और गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि दरों को और घटाने की गुंजाइश अभी भी मौजूद है।

GVA भी मजबूत—आर्थिक गतिविधि जमीन पर तेज

ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (GVA), जिसे अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों का बेहतर सूचक माना जाता है, में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली। यह आंकड़ा 8.1% रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 7.6% था।

कृषि क्षेत्र में 3.5% की वृद्धि हुई, जो पिछले आंकड़े 3.7% से हल्की कम है, लेकिन समग्र रूप से स्थिर प्रदर्शन दर्शाती है।

नाममात्र GDP और कंपनियों के मुनाफे पर असर

नाममात्र GDP (जिसमें मुद्रास्फीति शामिल होती है) 8.7% बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 8.8% से थोड़ा कम है। इसका मतलब है कि कंपनियों के मुनाफे और टैक्स कलेक्शन पर दबाव रहा, क्योंकि वास्तविक ग्रोथ तो बढ़ी लेकिन मुद्रास्फीति बेहद कम रही।

अर्थव्यवस्था को आगे क्या सहारा देगा?

सरकार इस तिमाही के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने का अनुमान लगा रही है।

  • घरेलू मांग मजबूत बनी रह सकती है

  • सार्वजनिक निवेश बढ़ रहा है

  • महंगाई नियंत्रण में है

  • ब्याज दरों में संभावित कटौती से निवेश को बढ़ावा मिलेगा

इन सभी कारणों से वित्त वर्ष 2025-26 के बाकी महीनों में आर्थिक गतिविधि तेज रहने की पूरी संभावना है।

Related Articles

Back to top button