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Delhi Blast Investigation: कानपुर-लखनऊ में कश्मीरी छात्रों की जांच तेज़

दिल्ली में 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच अब नए मोड़ पर पहुँच गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उन छात्रों की पहचान शुरू कर दी है जो जम्मू-कश्मीर से हैं और यूपी के विभिन्न शहरों—खासकर कानपुर और लखनऊ—में मेडिकल व तकनीकी कोर्स कर रहे हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इनमें से कुछ छात्रों का संबंध उन लोगों से हो सकता है जिन्हें हाल ही में धमाके की साजिश में गिरफ्तार किया गया है।

डॉ. शाहीन सईद, जिन्हें कुछ दिन पहले फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया था, इस जांच का अहम हिस्सा हैं। शाहीन, जो लाल किले के पास हुए धमाके से पहले गिरफ्तार हुईं थीं, पहले कानपुर के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में नौकरी करती थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एजेंसी के अधिकारी पिछले दो दिनों से कानपुर में कैंप कर रहे हैं, और उन छात्रों का डेटा जुटा रहे हैं जो कश्मीर से यहाँ आकर पढ़ रहे थे या अब भी पढ़ रहे हैं।

रामा यूनिवर्सिटी के छात्रों की पहचान शुरू

कानपुर के बिठूर स्थित रामा यूनिवर्सिटी भी जांच के दायरे में है। स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर प्रेम नारायण विश्वकर्मा ने बताया कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के छात्रों की पहचान और सत्यापन कर लिया है। इनमें पाँच बीडीएस, एक एमबीबीएस और एक एमडी के छात्र शामिल हैं। इनमें चार छात्राएँ और तीन छात्र हैं। पिछले दो वर्षों में यहाँ से 13 कश्मीरी छात्र ग्रेजुएट भी हुए हैं, जिनकी जानकारी भी एजेंसियों को सौंप दी गई है।

पुलिस का कहना है कि जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं इन छात्रों का संपर्क डॉ. शाहीन से तो नहीं था, या उन्होंने किसी को यहाँ दाखिला दिलाने में मदद की थी। एक अधिकारी ने कहा,
“अब तक की जांच में यह साफ दिख रहा है कि कई मेधावी छात्रों को गुमराह कर आतंक की ओर मोड़ा गया। जिन लोगों ने ब्रेनवॉश किया, उनका ध्यान उन छात्रों पर था जो मेरिट के आधार पर चयनित थे, न कि उन पर जिन्होंने भारी दान देकर सीट हासिल की।”

लखनऊ और अन्य शहरों में भी विस्तृत पड़ताल

कानपुर के बाद जांच लखनऊ तक पहुँची है, जहाँ दो निजी मेडिकल कॉलेजों में जम्मू-कश्मीर के कई छात्र पढ़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि नॉएडा, बरेली, कानपुर और लखनऊ के मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज कश्मीर के छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। अब एजेंसियाँ इन संस्थानों में पिछले कुछ वर्षों के एडमिशन रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी,
“हमें इनपुट मिले हैं कि गिरफ्तार किए गए कुछ डॉक्टरों ने कुछ छात्रों को एडमिशन दिलाने में मदद की थी। यह भी जांच हो रही है कि क्या इन छात्रों के शुल्क और खर्चों का कोई संदिग्ध स्रोत था।”

जांच एजेंसियों ने छात्रों की फीस, फंडिंग और उनके बैंक लेनदेन की भी जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी बाहरी या संदिग्ध संगठन से आर्थिक सहयोग तो नहीं मिला।

डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने बढ़ाई चिंताएँ

डॉ. शाहीन के अलावा उनकी बहन और भाई, डॉ. परवेज़ अंसारी, भी जांच के दायरे में हैं। परवेज़ लखनऊ के एक निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ा रहे थे और धमाके के एक दिन बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। धमाके से पहले और बाद में करीब आधा दर्जन डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया है, जिससे यह शक गहरा गया है कि किसी मेडिकल नेटवर्क का इस्तेमाल छात्रों की भर्ती और फंडिंग के लिए किया गया हो सकता है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े कई लोगों की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि गिरफ्तार डॉक्टरों ने किन-किन छात्रों से संपर्क किया, किनसे मुलाकात हुई, और किन लोगों को उन्होंने देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने में मदद की।

क्या है एजेंसी की सबसे बड़ी चिंता?

दिल्ली धमाके की जांच अब इस दिशा में बढ़ रही है कि कहीं देश के शिक्षा संस्थानों—विशेषकर मेडिकल कॉलेजों—का इस्तेमाल किसी संगठित नेटवर्क द्वारा भर्ती और फंडिंग के लिए तो नहीं किया गया। ATS और NIA दोनों का मानना है कि भारत के बड़े शहरों में पढ़ रहे युवा, खासकर वे जो घर से दूर रहते हैं, गलत संगत या संगठनों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या डॉ. शाहीन और उनके संपर्कों ने छात्रों के लिए सिफारिश की, आर्थिक मदद जुटाई या एडमिशन प्रक्रिया में सीधा दखल दिया।

UP में सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी हलचल

उत्तर प्रदेश के महानगरों में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियाँ तेज़ हैं। कॉलेजों में छात्र रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की पृष्ठभूमि की जाँच हो रही है, और कई संस्थानों को नोटिस भेजकर विस्तृत डेटा माँगा जा चुका है।

लखनऊ पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार,
“यह जांच केवल दिल्ली धमाके तक सीमित नहीं है। यह पता लगाना ज़रूरी है कि क्या देशभर में किसी बड़े नेटवर्क ने शिक्षा संस्थानों का इस्तेमाल अपने उद्देश्यों के लिए किया है।”

आगे क्या?

जांच एजेंसियों का फोकस अब तीन बिंदुओं पर है:

  • छात्रों का कनेक्शन

  • डॉक्टरों की भूमिका

  • एडमिशन और फंडिंग में अनियमितताएँ

आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियाँ और पूछताछ होने की संभावना है। पुलिस और NIA का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और परतें खुल सकती हैं।

निष्कर्ष

दिल्ली धमाके की जांच अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है, जिसमें छात्र, डॉक्टर और शिक्षा संस्थान भी शामिल हो सकते हैं। कानपुर और लखनऊ में कश्मीरी छात्रों की गहन जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया है। ATS और NIA की टीमें लगातार सुराग जुटा रही हैं और आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण खुलासों की उम्मीद है।

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