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दिल्ली में CEC-SIR विवाद पर सियासी घमासान, खरगे का मोदी सरकार पर हमला

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं, कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति देने की मांग की है।

इस बीच, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने घोषणा की है कि INDIA गठबंधन सोमवार को दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगा। विपक्ष का कहना है कि उसका आंदोलन मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जारी रहेगा।

मल्लिकार्जुन खरगे का मोदी सरकार पर हमला

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

खरगे ने कहा कि देश के युवा, छात्र, वकील, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले कंटेंट क्रिएटर्स तक को हिरासत में लिया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार की आलोचना करने और सवाल पूछने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में मोदी सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा।

खरगे ने स्पष्ट किया कि हिरासत, गिरफ्तारी और पुलिस की सख्ती से विपक्ष अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

उनके इस बयान से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रही है।

शशि थरूर ने दिल्ली में आवाजाही पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को इसलिए चुना गया था, ताकि लोग राजधानी के केंद्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जाहिर कर सकें। इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई।

थरूर के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के लिए निर्धारित स्थान तक पहुंचने से लोगों को रोकना उचित नहीं है। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग भी की।

कांग्रेस सांसद ने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा आंदोलन करने पहुंचते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा? उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए।

थरूर ने अपने बयान में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जब राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की जरूरत होती है, तब पुलिस की ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती। उनका कहना था कि युवाओं को अपनी बात रखने के लिए बेहतर और लोकतांत्रिक माहौल मिलना चाहिए।

उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

अशोक गहलोत का आरोप, चुनाव आयोग का बचाव कर रही BJP

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस विवाद पर भाजपा को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय विरोध करने वाले नेताओं और संगठनों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

गहलोत ने सोशल मीडिया पर कहा कि विपक्ष के सवालों से असहज होकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन चुनाव आयोग का बचाव करने वाले की तरह बयान दे रहे हैं। उन्होंने भाजपा और RSS पर लोकतांत्रिक विरोध को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसके नेता भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते थे। ऐसे में आज विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को देश को अस्थिर करने की कोशिश के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

गहलोत ने सवाल किया कि जब भाजपा विपक्ष में रहते हुए आंदोलन करती थी, तब क्या उन प्रदर्शनों के पीछे भी विदेशी ताकतें होने का आरोप लगाया जाता था? उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है।

उन्होंने युवाओं को रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति दिए जाने की वकालत की। गहलोत का कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के बजाय सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए।

उन्होंने इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और लोगों को हिरासत में लेने जैसी कार्रवाइयों पर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर संबंधित प्रशासन तथा अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है।

INDIA गठबंधन सोमवार को करेगा बड़ा प्रदर्शन

दिल्ली में जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने घोषणा की कि गठबंधन सोमवार को राजधानी में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगा।

वेणुगोपाल ने अपने लोकसभा क्षेत्र अलाप्पुझा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाने की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का उचित जवाब मिलना चाहिए। विपक्ष इस मुद्दे को मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी व्यवस्था में जनता के भरोसे से जोड़कर देख रहा है।

सोमवार को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, रूट डायवर्जन या अन्य प्रतिबंधों के संबंध में प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों की जानकारी अलग से देखना जरूरी होगा।

क्या है CEC और SIR को लेकर विवाद?

इस पूरे विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया है।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन जांच और पुनरीक्षण करना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल रहें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की मांग, नामों को शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया और मतदाताओं को मिलने वाले अवसरों को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हो सकता है।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस मामले में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, SIR को लेकर किसी भी कथित अनियमितता की पुष्टि के लिए संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची, चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच जरूरी है। राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य मानने से पहले उनकी स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा, कई लोगों को हिरासत में लेने का दावा

यह घटनाक्रम शनिवार को दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष से जुड़े कुछ समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने की कोशिश की। प्रदर्शन का मुद्दा SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर से जुड़ा बताया गया।

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले रोके जाने और कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP से जुड़े कुछ नेताओं और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत कई प्रदर्शनकारियों के नाम बताए गए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है।

हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की संख्या, उनकी कानूनी स्थिति और रिहाई से संबंधित जानकारी की पुष्टि आधिकारिक पुलिस बयानों से की जानी चाहिए।

कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति जैसे मुद्दों को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों पर आगे क्या होगा?

दिल्ली में CEC और SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस तथा INDIA गठबंधन के व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, शशि थरूर और अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति देने की मांग की है।

सोमवार को प्रस्तावित INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। इस दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाता है और प्रशासन प्रदर्शन के लिए क्या व्यवस्था करता है।

फिलहाल, SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। इस विवाद का समाधान तथ्यों की पारदर्शी जांच, संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत उठाए गए सवालों पर स्पष्टता से जुड़ा होगा।

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