
Amit Shah on Naxalism: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवाद अब “आखिरी सांसें” ले रहा है और खासतौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से इसे लगभग खत्म कर दिया गया है। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा था, जिसके करीब पहुंचने का दावा उन्होंने किया।
गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में आंतरिक सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।
बस्तर में बदली तस्वीर, विकास की ओर बढ़ रहा क्षेत्र
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि जो बस्तर कभी नक्सल हिंसा का गढ़ माना जाता था, आज वही क्षेत्र विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस और स्थानीय आदिवासी समुदाय को दिया।
उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सरकार की योजनाओं और सुरक्षा रणनीतियों के चलते हालात में बड़ा सुधार हुआ है। अब वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
हजारों नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
गृह मंत्री ने बताया कि अब तक 4,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और वे सरकार की पुनर्वास योजना से जुड़ चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार की नीति केवल सख्ती ही नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास पर भी केंद्रित है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन वर्षों में 700 से अधिक नक्सली मारे गए हैं, जो सरकार की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है। वर्तमान समय में देश में केवल दो जिले ही ऐसे बचे हैं, जहां नक्सलवाद का प्रभाव है।
कांग्रेस पर निशाना, विचारधारा को बताया कारण
अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में कांग्रेस सरकारें आदिवासी क्षेत्रों तक विकास की योजनाएं पहुंचाने में विफल रहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि एक विचारधारा है। उनके अनुसार, 1970 के दशक में इस विचारधारा को बढ़ावा मिला, जिसके कारण यह समस्या फैली।
उन्होंने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं और सवाल उठाया कि इतने वर्षों में इस समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ और आदिवासी समाज
अमित शाह ने अपने बयान में इतिहास का भी जिक्र किया और कहा कि आदिवासी समाज पहले महान नेताओं जैसे Birsa Munda, Tilka Manjhi और Rani Durgavati से प्रेरित था।
लेकिन समय के साथ प्रशासनिक कमजोरियों और गलत सूचनाओं के कारण कुछ लोग नक्सल विचारधारा की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें आदिवासियों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाईं, जिससे यह समस्या बढ़ती गई।
नक्सलवाद का प्रभाव और नुकसान
गृह मंत्री ने बताया कि नक्सल हिंसा के कारण देश में लगभग 20,000 युवाओं की जान जा चुकी है और करोड़ों लोग इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बताते हुए कहा कि इसका समाधान करना बेहद जरूरी था।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश के 12 राज्य “रेड कॉरिडोर” का हिस्सा थे, जहां कानून व्यवस्था लगभग खत्म हो चुकी थी। इन राज्यों में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र शामिल थे।
2014 के बाद क्या बदला?
अमित शाह ने कहा कि 2014 में Narendra Modi सरकार के आने के बाद कई बड़े फैसले लिए गए, जिनसे देश की सुरक्षा और विकास को नई दिशा मिली।
उन्होंने बताया कि सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी। अब गांव-गांव तक सड़क, स्कूल, अस्पताल और राशन की सुविधा पहुंच रही है। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड मिल रहे हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन्हें मिल रहा है।
गांवों में पहुंच रही बुनियादी सुविधाएं
गृह मंत्री ने कहा कि अब दूरदराज के इलाकों में भी स्कूल बनाए जा रहे हैं, अस्पताल खोले जा रहे हैं और राशन की दुकानों का विस्तार किया जा रहा है। इसके अलावा, लोगों को मुफ्त अनाज और गैस सिलेंडर जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
इन प्रयासों का असर यह हुआ है कि अब स्थानीय लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और नक्सलवाद से दूर हो रहे हैं।
सुरक्षा पर सख्त रुख
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और संविधान को नकारकर हथियार उठाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार बातचीत और समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा तैयार है।
हथियारों को लेकर बड़ा खुलासा
गृह मंत्री ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 92 प्रतिशत हथियार पुलिस से लूटे गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सल आंदोलन कितना संगठित और खतरनाक रहा है।
प्रधानमंत्री ने की सराहना
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अमित शाह के भाषण की तारीफ करते हुए इसे तथ्यपूर्ण और ऐतिहासिक संदर्भों से भरपूर बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सरकार ने नक्सलवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
निष्कर्ष
भारत में नक्सलवाद लंबे समय से एक गंभीर समस्या रहा है, लेकिन अब सरकार के प्रयासों से इसमें काफी कमी आई है। बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा दोनों के क्षेत्र में सुधार देखने को मिल रहा है।
अगर सरकार की मौजूदा रणनीति इसी तरह जारी रहती है, तो आने वाले समय में भारत पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त हो सकता है। यह न केवल देश की सुरक्षा के लिए बल्कि विकास और सामाजिक स्थिरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।



