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DGCA Airspace Advisory: DGCA का बड़ा फैसला, इन देशों के एयरस्पेस से बचें भारतीय एयरलाइंस

DGCA Airspace Advisory: भारत के विमानन नियामक Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए DGCA ने भारतीय एयरलाइंस को वेस्ट एशिया के कई देशों के हवाई क्षेत्र से बचने का निर्देश दिया है।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और फ्लाइट ऑपरेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाल के दिनों में हुए सैन्य हमलों और संभावित जवाबी कार्रवाई ने इस पूरे क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जिससे नागरिक उड्डयन पर भी खतरा मंडरा रहा है।


किन-किन देशों के एयरस्पेस से दूर रहने का निर्देश?

DGCA ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एयरलाइंस को कुछ विशेष देशों के एयरस्पेस में उड़ान भरने से बचना चाहिए। इनमें बहरीन, ईरान, इराक, इज़राइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।

हालांकि, ओमान और सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है। लेकिन यहां भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।


क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान में किए गए सैन्य हमलों के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। इसके जवाब में ईरान की ओर से संभावित कार्रवाई की आशंका भी बनी हुई है।

DGCA के अनुसार, इन हालातों ने पूरे क्षेत्र में नागरिक विमानों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। खासकर ऐसे समय में जब हवाई क्षेत्र में मिसाइल या सैन्य गतिविधियों की संभावना रहती है, तब यात्री विमानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है।


उड़ान ऊंचाई पर भी लगाया गया प्रतिबंध

DGCA ने सिर्फ एयरस्पेस से बचने की ही सलाह नहीं दी, बल्कि कुछ क्षेत्रों में उड़ान की ऊंचाई को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। एयरलाइंस को सऊदी अरब और ओमान के कुछ हिस्सों में FL320 (यानी 32,000 फीट) से नीचे उड़ान भरने से मना किया गया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान संभावित खतरे वाले ज़ोन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।


एयरलाइंस को तैयार रहना होगा हर स्थिति के लिए

DGCA ने एयरलाइंस को यह भी कहा है कि वे किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। इसमें फ्लाइट रीरूटिंग, डायवर्जन और इमरजेंसी प्लानिंग शामिल है।

एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे अपने ऑपरेशन को इस तरह प्लान करें कि अगर अचानक कोई बदलाव करना पड़े तो यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर असर न पड़े।


NOTAM अपडेट रखना जरूरी

फ्लाइट क्रू को हर समय अपडेट रहना बेहद जरूरी है। DGCA ने खास तौर पर कहा है कि सभी पायलट और संबंधित स्टाफ को NOTAM (Notice to Airmen) की ताजा जानकारी मिलती रहनी चाहिए।

NOTAM के जरिए एयरस्पेस की स्थिति, प्रतिबंध और अन्य जरूरी सूचनाएं रियल टाइम में मिलती हैं, जो फ्लाइट ऑपरेशन के लिए बेहद अहम होती हैं।


मौसम भी बना परेशानी की वजह

जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय हालात चिंता बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत के कई शहरों में खराब मौसम ने भी एयर ट्रैफिक को प्रभावित किया है।

एयरलाइंस जैसे इंडिगो और एयर इंडिया ने पहले ही यात्रियों को अलर्ट कर दिया है कि दिल्ली, बेंगलुरु और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और आंधी के कारण उड़ानों में देरी या बदलाव हो सकता है।


यात्रियों पर क्या होगा असर?

इस एडवाइजरी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ सकता है। कई फ्लाइट्स को लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है, जिससे यात्रा का समय बढ़ सकता है। इसके अलावा, कुछ फ्लाइट्स के शेड्यूल में बदलाव या रद्द होने की भी संभावना है।

हालांकि, DGCA और एयरलाइंस का कहना है कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, इसलिए थोड़ी असुविधा के बावजूद यह जरूरी है।


कब तक लागू रहेगा यह आदेश?

DGCA का यह निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और फिलहाल 28 मार्च तक लागू रहेगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार इसमें बदलाव भी किया जा सकता है।


निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल एविएशन सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। भारत ने समय रहते एहतियात बरतते हुए एयरलाइंस को सतर्क किया है। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का एक अहम उदाहरण है।

आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहती है, इस पर नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल एयरलाइंस और यात्रियों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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