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Mojtaba Khamenei Iran Supreme Leader: अयातुल्ला खामेनेई के बाद बेटे मोजतबा बने उत्तराधिकारी

Mojtaba Khamenei Iran Supreme Leader:

मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह फैसला ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई की मौत एक हवाई हमले में हुई थी। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक विचार-विमर्श चला और अंततः 56 वर्षीय मोजतबा को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया। इस फैसले को ईरान की राजनीति में हार्डलाइनर यानी कट्टरपंथी धड़े की मजबूत पकड़ के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।


असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने किया उत्तराधिकारी का चयन

ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन देश की धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। इस परिषद में वरिष्ठ इस्लामिक विद्वान शामिल होते हैं जो देश के सर्वोच्च नेता के चयन की जिम्मेदारी निभाते हैं।

इस परिषद के एक सदस्य अयातुल्ला मोहसेन हेदरी अलेकासिर ने एक वीडियो संदेश में बताया कि नए नेता का चयन अली खामेनेई के मार्गदर्शन को ध्यान में रखकर किया गया है। उनके अनुसार, ईरान के शीर्ष नेता में ऐसी क्षमता होनी चाहिए कि वह देश के दुश्मनों के लिए चुनौती बने।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति का चयन किया गया है, उसका नाम पहले से ही अमेरिका जैसे विरोधी देशों में चर्चा में रहा है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मोजतबा खामेनेई को लेकर आपत्ति जताई थी और उन्हें स्वीकार्य नहीं बताया था।


पिता के शासनकाल में बढ़ा मोजतबा का प्रभाव

मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि उन्होंने कभी औपचारिक रूप से सरकार में कोई बड़ा पद नहीं संभाला, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और शक्तिशाली संस्थाओं के साथ उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं।

विशेष रूप से ईरान की सैन्य शक्ति मानी जाने वाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके मजबूत रिश्ते रहे हैं। माना जाता है कि इसी नेटवर्क के जरिए उन्होंने राजनीति और सुरक्षा तंत्र में अपनी पकड़ मजबूत की।

विशेषज्ञों के अनुसार मोजतबा को अक्सर उनके पिता का “गेटकीपर” कहा जाता था, क्योंकि कई महत्वपूर्ण फैसलों और बैठकों तक पहुंच उन्हीं के माध्यम से होती थी।


पश्चिमी देशों के साथ संवाद के विरोधी

मोजतबा खामेनेई को ईरान के कट्टरपंथी धड़े का समर्थक माना जाता है। वह लंबे समय से उन नेताओं के विरोध में रहे हैं जो पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश करते रहे हैं।

खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के साथ चल रहे तनाव में मोजतबा का रुख सख्त माना जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देश लंबे समय से ईरान पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि ईरान लगातार यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है।


जनता के विरोध का भी सामना कर सकते हैं

मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना ईरान के अंदर विवाद का कारण भी बन सकता है। देश में पहले भी कई बार सरकार और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो चुके हैं।

विशेष रूप से 2022 में एक युवती की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय कई प्रदर्शनकारियों ने मोजतबा खामेनेई की भी आलोचना की थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नए सुप्रीम लीडर के तौर पर उनकी नीतियां बहुत सख्त रहीं तो उन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।


धार्मिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के पवित्र शिया शहर मशहद में हुआ था। उनका बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता शाह के खिलाफ चल रहे आंदोलन में सक्रिय थे।

युवा अवस्था में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेना में सेवा भी दी थी। बाद में उन्होंने धार्मिक शिक्षा के लिए ईरान के प्रमुख धार्मिक केंद्र क़ोम में अध्ययन किया।

मोजतबा के पास इस्लामी धर्मशास्त्र में होज्जतोलइस्लाम की उपाधि है, जो धार्मिक पदक्रम में अयातुल्ला से नीचे मानी जाती है।


अमेरिका ने लगा रखे हैं प्रतिबंध

मोजतबा खामेनेई पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है। वर्ष 2019 में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे।

अमेरिका का आरोप था कि मोजतबा बिना किसी आधिकारिक पद के भी देश की नीतियों को प्रभावित करते रहे हैं और अपने पिता की ओर से कई अहम जिम्मेदारियां निभाते थे।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा था कि वह IRGC की कुद्स फोर्स और बसीज मिलिशिया के साथ मिलकर ईरान की क्षेत्रीय रणनीतियों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते रहे हैं।


धार्मिक योग्यता को लेकर उठते रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाए जाने पर कुछ आलोचकों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि इस पद के लिए आमतौर पर अयातुल्ला स्तर के वरिष्ठ धार्मिक विद्वान को चुना जाता है।

चूंकि मोजतबा के पास अभी अयातुल्ला की उपाधि नहीं है, इसलिए उनके चयन को लेकर विवाद पैदा हो सकता है। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि उनका राजनीतिक अनुभव और प्रभाव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है।


पहले भी राष्ट्रपति चुनाव में निभा चुके हैं अहम भूमिका

ईरान की राजनीति में मोजतबा का नाम पहले भी कई बार सामने आया है। माना जाता है कि 2005 में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति बनने के पीछे भी उनकी भूमिका थी।

2009 के विवादित चुनाव में भी उन्होंने अहमदीनेजाद का समर्थन किया था। उस चुनाव के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे जिन्हें सुरक्षा बलों ने सख्ती से दबा दिया था।


आगे क्या होगा

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद अब दुनिया की नजरें ईरान की भविष्य की नीतियों पर टिक गई हैं। खासकर परमाणु कार्यक्रम, अमेरिका के साथ रिश्ते और मध्य पूर्व की राजनीति में ईरान की भूमिका पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनकी नीतियां पहले की तरह सख्त रहती हैं तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि नई परिस्थितियों में ईरान कूटनीतिक रास्ते भी तलाश सकता है।

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