
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में इन दिनों संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आगामी कुछ दिनों में 9 राज्यों की 37 खाली सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने वाले हैं। लेकिन इस बार यह केवल एक नियमित चुनावी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत है।
राहुल गांधी का ‘घेराव प्लान’: क्या राज्यसभा में बदलेगा मिजाज?
लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को घेरने के लिए एक आक्रामक शैली अपनाई है। सूत्रों की मानें तो अब राहुल चाहते हैं कि राज्यसभा में भी कांग्रेस का वही ‘तेवर’ नजर आए।
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लोकसभा की तर्ज पर तैयारी: राहुल गांधी का मानना है कि जिस तरह लोकसभा में ‘मार्शल आर्ट्स’ और ‘जिउ-जित्सु’ जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल कर सरकार को ‘पॉलिटिकल चोकहोल्ड’ में फंसाने की कोशिश की गई, वही धार राज्यसभा के भाषणों में भी होनी चाहिए।
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सोशल मीडिया और रील्स का जादू: राहुल गांधी की टीम का मानना है कि संसद में दिए गए उनके आक्रामक और फिल्मी अंदाज वाले भाषण सोशल मीडिया, शॉर्ट्स और रील्स पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहे हैं, जिससे जनता के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत हो रही है।
सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की दुविधा
जहाँ राहुल गांधी सदन में ‘दांव-पेच’ और आक्रामकता चाहते हैं, वहीं पार्टी के पुराने दिग्गजों—सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे—के मन में इसे लेकर कुछ संशय है।
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परंपरा बनाम नया दौर: राज्यसभा को ‘बुद्धिजीवियों का सदन’ माना जाता है, जहाँ बहस की गंभीरता और भाषाई मर्यादा का विशेष महत्व रहा है। पुराने नेताओं को लगता है कि बहुत ज्यादा ‘थिएट्रिकल’ या फिल्मी अंदाज सदन की गरिमा को प्रभावित कर सकता है।
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अनुभव की अनदेखी? वरिष्ठ नेताओं की चिंता यह भी है कि कहीं आक्रामकता के चक्कर में उन अनुभवी चेहरों को दरकिनार न कर दिया जाए जो नीतियों पर गहराई से बहस करने की क्षमता रखते हैं।
अगले 3 साल के लिए ‘चरित्र’ तय करेगी यह लिस्ट
भाजपा और कांग्रेस द्वारा घोषित किए जाने वाले नाम यह तय करेंगे कि अगले तीन सालों तक राज्यसभा का स्वरूप कैसा होगा।
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भाजपा की चुनौती: क्या भाजपा ऐसे अनुभवी और प्रखर वक्ताओं को भेजेगी जो मोदी सरकार की नीतियों का मजबूती से बचाव कर सकें?
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कांग्रेस का लिटमस टेस्ट: क्या राहुल गांधी अपने पसंद के युवाओं और आक्रामक वक्ताओं को तरजीह देंगे या सोनिया गांधी के ‘बैलेंस’ बनाने वाले फॉर्मूले को अपनाया जाएगा?
निष्कर्ष
संसद के गलियारों में चर्चा है कि राहुल गांधी ने 4 फरवरी के अपने भाषण के बाद यह साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब देखना यह है कि क्या राज्यसभा में कांग्रेस के नए उम्मीदवार राहुल गांधी के ‘योद्धा’ (Gherao Gang) साबित होंगे या पार्टी अपने पुराने और सधे हुए अंदाज पर ही कायम रहेगी।



