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Rahul Gandhi targets the central government: यह उत्तर कोरिया नहीं, भारत है” यूथ कांग्रेस पर कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना

Rahul Gandhi ने भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र की Narendra Modi सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे अपराध की तरह देखना उचित नहीं है।

एआई समिट में प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी

यह मामला 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस ने इस सिलसिले में Uday Bhanu Chib (भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष) और Bhudev Sharma (पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता) को हिरासत में लिया था।

कांग्रेस का कहना है कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और संवैधानिक दायरे में रहकर किया गया था।

“लोकतंत्र में असहमति जरूरी”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह उत्तर कोरिया नहीं, भारत है।” उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग खुद को राष्ट्र के बराबर मानने लगते हैं और असहमति को दुश्मन समझते हैं, तो लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सवाल पूछने को साजिश और विरोध दर्ज कराने को देशद्रोह की तरह पेश करना चिंताजनक है।

“संवैधानिक विरोध पर भी कार्रवाई”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यदि कोई नागरिक या संगठन संवैधानिक तरीके से भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे पुलिस कार्रवाई, मुकदमों और जेल का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने हाल के वर्षों में विभिन्न विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया, जिनमें परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन, महिला पहलवानों का धरना और अन्य मुद्दों पर हुए प्रदर्शन शामिल हैं। महिला पहलवानों ने भाजपा नेता Brij Bhushan Sharan Singh पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

इसके अलावा, उन्होंने उन्नाव मामले में पूर्व भाजपा विधायक Kuldeep Singh Sengar को जमानत मिलने के विरोध में हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि सरकार की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों और उन पर होने वाली कार्रवाई को लेकर बहस आगे भी जारी रह सकती है, खासकर तब जब विपक्ष इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जोड़कर उठा रहा है।

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