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Delhi vs Himachal Police: शिमला हाईवे पर 24 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, खाकी के सामने ‘खाकी’ पर FIR

शिमला/नई दिल्ली: देश में दो राज्यों की पुलिस के बीच टकराव की खबरें कम ही आती हैं, लेकिन पिछले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच ‘युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं’ की गिरफ्तारी को लेकर तीखी नोकझोंक हुई, जो अब एक कानूनी लड़ाई में बदल चुकी है।

क्या है पूरा विवाद?

मामला पिछले हफ्ते दिल्ली में हुए ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस इस मामले में तीन युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं—सौरभ, सिद्धार्थ और अरबाज—की तलाश कर रही थी।

घटनाक्रम की पूरी जानकारी:

  1. चुपके से गिरफ्तारी: बुधवार को दिल्ली पुलिस की एक 20 सदस्यीय टीम सादे कपड़ों में शिमला के रोहड़ू स्थित एक रिसॉर्ट पहुंची। वहां से तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

  2. अपहरण का आरोप: रिसॉर्ट प्रबंधन का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने बिना किसी स्थानीय सूचना या रसीद के उनके मेहमानों को उठाया और सीसीटीवी का DVR भी जब्त कर लिया। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने अज्ञात लोगों (जो बाद में दिल्ली पुलिस निकले) के खिलाफ अपहरण (Kidnapping) का मामला दर्ज कर लिया।

  3. हाईवे पर घेराबंदी: जब दिल्ली पुलिस की टीम आरोपियों को लेकर दिल्ली लौट रही थी, तो शिमला पुलिस ने उन्हें शोघी बैरियर पर रोक लिया। हिमाचल पुलिस का तर्क था कि बिना स्थानीय कोर्ट से ‘ट्रांजिट रिमांड’ लिए आरोपियों को राज्य से बाहर नहीं ले जाया जा सकता।

“आप सरकारी काम में बाधा डाल रहे हैं…”

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दोनों पुलिस बलों के बीच का तनाव साफ दिख रहा है। दिल्ली पुलिस के एसीपी राहुल विक्रम कहते नजर आए कि वे अपना काम कर रहे हैं, जबकि हिमाचल पुलिस के अधिकारी ने जवाब दिया, “हमने आपके खिलाफ केस दर्ज किया है, आप अपहरण कर रहे हैं। आपको जांच में शामिल होना होगा।”

24 घंटे बाद मिली ट्रांजिट रिमांड

गुरुवार सुबह (26 फरवरी, 2026) तक यह ड्रामा चलता रहा। आखिरकार, दिल्ली पुलिस ने स्थानीय अदालत से कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए ट्रांजिट रिमांड हासिल की। इसके बाद ही उन्हें आरोपियों को दिल्ली ले जाने की अनुमति मिली। हालांकि, दिल्ली पुलिस के 20 जवानों को इस प्रक्रिया के दौरान अस्थायी रूप से हिमाचल पुलिस की हिरासत में भी रहना पड़ा।


विवाद के मुख्य बिंदु:

मुद्दा हिमाचल पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का पक्ष
सूचना स्थानीय पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई। हम अपनी जांच और गिरफ्तारी के अधिकार का उपयोग कर रहे थे।
प्रक्रिया बिना ट्रांजिट रिमांड के ले जाना ‘अपहरण’ है। आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, कोई नियम नहीं तोड़ा।
सबूत रिसॉर्ट का DVR बिना कागजी कार्रवाई के ले जाया गया। सबूत जुटाना जांच का हिस्सा है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

यह टकराव केवल पुलिस तक सीमित नहीं है। युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और दो राज्यों (जहां अलग-अलग विचारधाराओं का प्रभाव है) की पुलिस के बीच इस भिड़ंत ने राजनीतिक पारा भी चढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस की इस स्थिति को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

निष्कर्ष: यह घटना दिखाती है कि कैसे दो राज्यों के बीच समन्वय की कमी एक गंभीर कानूनी संकट पैदा कर सकती है। फिलहाल आरोपी दिल्ली लाए जा चुके हैं, लेकिन हिमाचल में दिल्ली पुलिस पर दर्ज ‘किडनैपिंग’ का केस अभी भी उनके लिए गले की फांस बना हुआ है।

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