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Congress on PM Modi’s address to Israeli Parliament: कांग्रेस ने बताया ‘नैतिक पतन’, नेहरू और आइंस्टीन के पत्रों का दिया हवाला

नई दिल्ली/यरूशलेम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को लेकर भारत में सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को इजराइली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) को संबोधित किया, जिस पर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री का भाषण उनके मेजबान बेंजामिन नेतन्याहू का “बेशर्म बचाव” था और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नैतिक छवि को नुकसान पहुंचा है।

‘नेसेट’ में पीएम मोदी का संदेश: “आतंकवाद कहीं भी हो, शांति के लिए खतरा”

अपनी दो दिवसीय यात्रा के पहले दिन पीएम मोदी का इजराइली सांसदों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा:

  • एकजुटता का संदेश: उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “आतंकवाद कहीं भी हो, वह हर जगह की शांति के लिए खतरा है।”

  • गज़ा शांति पहल: पीएम ने गज़ा शांति पहल को क्षेत्र में “न्यायपूर्ण और स्थायी शांति” का मार्ग बताया।

  • भारत-इजराइल संबंध: उन्होंने याद दिलाया कि जिस दिन उनका जन्म हुआ (17 सितंबर 1950), उसी दिन भारत ने आधिकारिक तौर पर इजराइल को मान्यता दी थी।

कांग्रेस का पलटवार: जयराम रमेश ने याद दिलाया इतिहास

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी के भाषण की आलोचना करते हुए इसे एकतरफा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच हुए पत्राचार को साझा कर सरकार को घेरा।

नेहरू ने आइंस्टीन को क्या लिखा था?

जुलाई 1947 में, इजराइल के निर्माण के विषय पर आइंस्टीन के पत्र का जवाब देते हुए नेहरू ने लिखा था:

“मुझे यह स्वीकार करने में संकोच नहीं कि यहूदियों के प्रति मेरी गहरी सहानुभूति है, लेकिन अरबों की स्थिति को लेकर भी मेरा मन उतना ही संवेदनशील है। यह पूरा मामला दोनों पक्षों की ओर से गहरी भावनाओं और जुनून का बन चुका है।”

नेहरू ने सवाल उठाया था कि शानदार उपलब्धियों के बावजूद, क्या कारण है कि यहूदी अरबों का विश्वास जीतने में विफल रहे? उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि किसी भी पक्ष को दूसरे की इच्छा के विरुद्ध झुकने के लिए मजबूर करना समाधान नहीं, बल्कि संघर्ष को बढ़ावा देना है।

विवाद का केंद्र: गज़ा युद्ध और भारत का रुख

कांग्रेस का मानना है कि गज़ा युद्ध के कारण जब दुनिया भर में इजराइल की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, तब पीएम मोदी का यह दौरा और उनका भाषण भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति से मेल नहीं खाता। जयराम रमेश के अनुसार, नेहरू ने हमेशा न्यायपूर्ण समाधान की बात की थी, जबकि वर्तमान सरकार एक पक्ष की ओर झुकी हुई नजर आ रही है।


पीएम मोदी की इजराइल यात्रा: आज का कार्यक्रम

आज (गुरुवार) प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का दूसरा और अंतिम दिन है। उनके आज के मुख्य कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

  1. द्विपक्षीय वार्ता: पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच डेलिगेशन लेवल की बातचीत होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण एमओयू (MoUs) पर हस्ताक्षर होंगे।

  2. याद वाशेम का दौरा: पीएम मोदी होलोकॉस्ट (यहूदी नरसंहार) के पीड़ितों की याद में बने स्मारक ‘याद वाशेम’ जाएंगे।

  3. भारतीय समुदाय से संवाद: वे इजराइल में रहने वाले भारतीय प्रवासियों से मिलेंगे और वहां की नई तकनीकों व नवाचारों (Innovation) की प्रदर्शनी देखेंगे।


मुख्य बातें एक नज़र में:

पक्ष स्टैंड/बयान
पीएम मोदी इजराइल के साथ दोस्ती, सम्मान और साझेदारी का वादा।
कांग्रेस पीएम का भाषण मेजबान का बचाव है, नेहरू की संतुलित नीति का अनुसरण करना चाहिए।
ऐतिहासिक संदर्भ 1947 में नेहरू ने अरब और यहूदी दोनों के हितों की बात कही थी।
एजेंडा व्यापार, रक्षा और इनोवेशन में सहयोग बढ़ाना।

निष्कर्ष: पीएम मोदी की यह यात्रा भारत-इजराइल के बीच व्यापारिक और रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है, लेकिन घरेलू राजनीति में इसने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या भारत अपनी दशकों पुरानी मध्य-पूर्व नीति से दूर जा रहा है।

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