
नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल Chakravarti Rajagopalachari (राजाजी) की प्रतिमा स्थापित किए जाने के फैसले का कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने स्वागत किया है।
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि राजाजी को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते देख उन्हें खुशी है। उन्होंने याद दिलाया कि गणतंत्र बनने से पहले राजगोपालाचारी इस भवन के पहले भारतीय प्रमुख रहे और बाद में राष्ट्रपति को पदभार सौंपा।
छात्र जीवन से वैचारिक जुड़ाव
शशि थरूर ने अपने संदेश में बताया कि छात्र जीवन में वे राजाजी द्वारा स्थापित Swatantra Party के समर्थक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजगोपालाचारी के विचार—उदार आर्थिक नीतियां, मुक्त बाजार का समर्थन, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता, भारतीय सभ्यता में गहरी आस्था और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा—आज भी उनके लिए प्रेरणास्रोत हैं। थरूर ने यह भी कहा कि ऐसे मूल्यों का पालन करने वाले नेता अब कम दिखाई देते हैं।
राष्ट्रपति भवन में विशेष स्थान
राजगोपालाचारी की प्रतिमा राष्ट्रपति भवन के ग्रैंड ओपन सीढ़ियों के पास अशोक मंडप के निकट स्थापित की गई है, जो महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने स्थित है। इसे भारतीय परंपराओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को प्रमुखता देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतिमा का अनावरण ‘राजाजी उत्सव’ कार्यक्रम के दौरान हुआ। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संदेश
कार्यक्रम में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राजगोपालाचारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता के बाद देश में “मानसिक उपनिवेशवाद” से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने उल्लेख किया कि स्वतंत्रता के बाद जब वे गवर्नमेंट हाउस में रहने आए, तो उन्होंने अपने कक्ष में रामकृष्ण परमहंस और महात्मा गांधी के चित्र लगाए थे।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के संदेश में कहा गया कि जहां पहले वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा थी, वहां राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित करना मानसिक उपनिवेशवाद से बाहर निकलने की दिशा में अहम कदम है। उनके अनुसार, आज राष्ट्रपति भवन भारतीय लोकतांत्रिक आत्मविश्वास का प्रतीक है।
ब्रिटिश लेखक की प्रतिक्रिया
इस बदलाव पर ब्रिटिश लेखक Matt Ridley ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि उनके परदादा और नई दिल्ली के प्रमुख वास्तुकार Edwin Lutyens की प्रतिमा को हटा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष ही उन्होंने देखा था कि लुटियंस का नाम आधारशिला से हटाया जा चुका था।
ऐतिहासिक महत्व
सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्रता आंदोलन के वरिष्ठ नेता, प्रखर विचारक और स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल रहे। उनकी प्रतिमा का राष्ट्रपति भवन में स्थापित होना भारतीय ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को सम्मान देने की व्यापक पहल का हिस्सा माना जा रहा है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति भवन में राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापना को लेकर राजनीतिक और बौद्धिक जगत में चर्चा जारी है। जहां कई नेताओं ने इसे भारतीय विरासत को सम्मान देने वाला कदम बताया है, वहीं कुछ ने पूर्व वास्तुशिल्प विरासत में बदलाव पर खेद भी जताया है।
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