
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर वैचारिक जंग ने हिंसक रूप ले लिया है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 की तड़के करीब 1:30 बजे विश्वविद्यालय परिसर में दो छात्र गुटों के बीच जबरदस्त झड़प हुई। इस संघर्ष में पत्थरबाजी और मारपीट की खबरें आई हैं, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
विवाद की जड़: क्यों शुरू हुआ ‘इक्वालिटी मार्च’?
दरअसल, JNU छात्र संघ (JNUSU) ने सोमवार रात को एक ‘इक्वालिटी मार्च’ का आह्वान किया था। यह मार्च विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के खिलाफ निकाला गया था।
छात्रों की मुख्य माँगें और आरोप:
-
जातिगत टिप्पणी का आरोप: छात्रों का दावा है कि कुलपति ने 16 फरवरी को एक पॉडकास्ट के दौरान दलितों, आरक्षण और UGC नियमों को लेकर आपत्तिजनक और ‘जातिवादी’ टिप्पणियां की थीं।
-
निलंबन रद्द करने की माँग: छात्र संघ उन चार पदाधिकारियों का निलंबन (Rustication) वापस लेने की माँग कर रहा था, जिन पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ का आरोप लगा था।
आधी रात का घटनाक्रम: आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति
हिंसा भड़कने के बाद दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला शुरू करने के आरोप लगाए हैं। परिसर में तनाव इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया पर इसे “खौफ की रात” बताया जा रहा है।
लेफ्ट विंग (वामपंथी) का दावा:
AISA जैसे वामपंथी संगठनों का कहना है कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकाल रहे थे, तब ABVP के सदस्यों ने उन पर हमला कर दिया। उनके अनुसार, निहत्थे छात्रों पर पत्थर फेंके गए और प्रशासन ने हमलावरों को रोकने के बजाय मूकदर्शक बने रहने का विकल्प चुना।
ABVP (दक्षिणपंथी) का पलटवार:
दूसरी ओर, ABVP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। JNU में ABVP सचिव प्रवीण कुमार पीयूष का आरोप है कि, “लगभग 400-500 नकाबपोश लोग हॉकी स्टिक, रॉड, लाठी और चाकुओं के साथ स्कूल एरिया में घुसे। उन्होंने रीडिंग रूम में पढ़ रहे सामान्य छात्रों को जबरन बाहर निकाला और उनके साथ मारपीट की।”
ABVP ने यह भी दावा किया कि उनके एक छात्र, प्रतीक भारद्वाज को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के पास घेर लिया गया। उसे पहले ‘फायर एक्सटिंगुइशर’ के पाउडर से अंधा करने की कोशिश की गई और फिर बेरहमी से पीटा गया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘जंग’
घटना के बाद ABVP ने सोशल मीडिया पर #LeftAttacksJNUAgain अभियान शुरू किया है। छात्रों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस कैंपस को “युद्ध का मैदान” बनते देखती रही और कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। फिलहाल घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और कैंपस में भारी सुरक्षा बल तैनात है।
निष्कर्ष: प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
JNU में बार-बार होने वाली ऐसी हिंसा न केवल शिक्षा के माहौल को खराब करती है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या प्रशासन समय रहते इस विवाद को सुलझा सकता था? यह सवाल अब हर छात्र के मन में है।



