
जबलपुर/शहपुरा: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में रविवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। नेशनल हाईवे-45 (NH-45) पर शहपुरा के पास रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे एक ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया। गनीमत यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त मलबे के नीचे कोई वाहन या राहगीर नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
हालाँकि, इस घटना ने मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) और ठेकेदारों के काम करने के तरीके पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
घटना रविवार शाम करीब 4 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ओवरब्रिज का एक हिस्सा पहले से ही क्षतिग्रस्त था और वहां मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान पुल का दूसरा हिस्सा भी ढह गया। पुल के गिरते ही हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप
स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पुल महज 4 साल पहले बनकर तैयार हुआ था, लेकिन पहली बारिश में ही इसकी असलियत सामने आ गई थी।
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मिट्टी का भराव: स्थानीय निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिस हिस्से में मिट्टी भरी गई थी, वह एक तरफ का भार सह नहीं पाया और ढह गया।
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पुरानी चेतावनी को किया नजरअंदाज: करीब 3 महीने पहले मानसून के दौरान पुल का एक हिस्सा धंस गया था, जिसके बाद वहां वन-वे (एक तरफा) ट्रैफिक शुरू किया गया था। लेकिन समय रहते पुख्ता मरम्मत न होने के कारण रविवार को दूसरा हिस्सा भी गिर गया।
यातायात बुरी तरह प्रभावित, टोल फ्री किया गया
ब्रिज गिरने से जबलपुर-भोपाल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। यातायात को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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रूट डायवर्जन: नेशनल हाईवे बंद होने के कारण ट्रैफिक को पाटन और ग्रामीण वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट किया गया है।
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टोल फ्री: जाम को कम करने के लिए टोल प्लाजा प्रबंधन ने वाहनों को बिना टैक्स लिए गुजरने की अनुमति दी है।
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पुलिस बल: शहपुरा शहर के अंदर बढ़ते दबाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
MPRDC की कार्यप्रणाली पर सवाल
ब्रिज के रख-रखाव की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) की थी। गौरतलब है कि नवंबर में जब पुल का एक हिस्सा झुका था, तब अधिकारियों ने ठीक से जांच करने के बजाय ठेकेदार पर जिम्मेदारी डाल दी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम उठाए जाते, तो नेशनल हाईवे को इस तरह बंद करने की नौबत नहीं आती।
देर रात तक मौके पर वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और मलबे को हटाने का काम जारी था। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन जनता अब जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।



