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Ramadan Dates 2026 in India | रमजान 2026 कब से शुरू होगा? पहला रोज़ा 19 या 20 फरवरी

Ramadan Dates 2026: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए रमजान का महीना सबसे पवित्र और अहम माना जाता है। साल 2026 में रमजान की शुरुआत को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता और भ्रम बना हुआ है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि पहला रोज़ा 19 फरवरी को होगा या 20 फरवरी को।

रमजान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जिसकी शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। इसी कारण हर साल इसकी तारीख थोड़ी आगे-पीछे हो जाती है। इस बार भी चांद देखने को लेकर सभी की निगाहें आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हुई हैं।

सऊदी अरब की घोषणा क्यों होती है अहम?

रमजान की शुरुआत को लेकर सबसे पहले नजर रहती है Saudi Arabia पर, क्योंकि यहां से की गई घोषणा को कई देश मान्यता देते हैं। आमतौर पर सऊदी अरब में रमजान भारत से एक दिन पहले शुरू होता है।

इस बार भी रमजान की तारीख तय करने के लिए Saudi Arabia Supreme Court ने नागरिकों और निवासियों से चांद देखने की अपील की है। अदालत ने कहा है कि जो लोग सक्षम हैं, वे चांद देखने वाली समितियों के साथ मिलकर इस कार्य में भाग लें और पुण्य प्राप्त करें।

इस बयान की जानकारी Saudi Press Agency के माध्यम से साझा की गई।

भारत में पहला रोज़ा 19 या 20 फरवरी?

अगर सऊदी अरब में 18 फरवरी की शाम को चांद नजर आ जाता है, तो वहां रमजान 19 फरवरी से शुरू हो जाएगा। ऐसी स्थिति में India में भी पहला रोज़ा 19 फरवरी को रखा जा सकता है।

लेकिन अगर 18 फरवरी को चांद नहीं दिखता है, तो शाबान का महीना 30 दिन का पूरा होगा और फिर भारत में पहला रोज़ा 20 फरवरी से शुरू होगा।

यानी साफ शब्दों में कहा जाए तो 2026 में रमजान की शुरुआत 19 या 20 फरवरी में से किसी एक दिन हो सकती है, जो पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करेगी।

भारत में रमजान की तारीख कैसे तय होती है?

भारत में रमजान की शुरुआत “हिलाल” यानी नए चांद को देखकर की जाती है। शाबान महीने की 29वीं रात को, मगरिब की नमाज के बाद, विभिन्न धार्मिक समितियां और इस्लामी विद्वान आसमान में चांद देखने का प्रयास करते हैं।

अगर उस दिन चांद नजर आ जाता है, तो अगले दिन से रमजान शुरू हो जाता है। अगर चांद नहीं दिखता, तो शाबान का महीना 30 दिन का पूरा किया जाता है और फिर उसके बाद रमजान शुरू होता है।

भारत में अधिकतर इस्लामी संगठन और उलेमा खगोलीय गणनाओं से ज्यादा प्रत्यक्ष चांद देखने को महत्व देते हैं, जिससे धार्मिक परंपराओं का पालन सही तरीके से हो सके।

रमजान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

रमजान इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस महीने में मुसलमान सुबह फज्र की नमाज से पहले से लेकर सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं।

रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, धैर्य, ईमानदारी और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। इस दौरान लोग बुरी आदतों से दूर रहते हैं और खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं।

रमजान का महीना आत्मचिंतन, इबादत और ईश्वर से जुड़ने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

तरावीह, कुरान और इबादत का विशेष महत्व

रमजान में नमाज और इबादत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दौरान लोग पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ रात में तरावीह की नमाज अदा करते हैं।

तरावीह के दौरान कुरान की तिलावत की जाती है और पूरे महीने में कुरान मुकम्मल करने की परंपरा भी निभाई जाती है। कई लोग रोज़ कुरान पढ़ने और समझने का प्रयास करते हैं।

इसके अलावा, दुआ, जिक्र और तस्बीह के जरिए लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और बेहतर जीवन की कामना करते हैं।

रमजान में दान और सामाजिक जिम्मेदारी

रमजान को सिर्फ इबादत का महीना ही नहीं, बल्कि इंसानियत और मदद का महीना भी माना जाता है। इस दौरान जकात, फितरा और सदका देने की परंपरा बहुत अहम होती है।

लोग गरीबों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद करते हैं, उन्हें खाना खिलाते हैं और रोज़ा इफ्तार करवाते हैं। इससे समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

रमजान हमें सिखाता है कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीना सीखें।

2026 में रमजान को लेकर क्या रखें ध्यान?

रमजान 2026 की तारीख को लेकर अभी अंतिम पुष्टि चांद दिखने के बाद ही होगी। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मस्जिदों, इस्लामी संगठनों और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें।

इसके अलावा, रोज़ा रखने से पहले सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और सही दिनचर्या अपनाकर रमजान को बेहतर तरीके से बिताया जा सकता है।

निष्कर्ष

रमजान 2026 की शुरुआत संभवतः 19 या 20 फरवरी से हो सकती है। यह पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करेगा। सऊदी अरब और भारत की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही अंतिम तारीख स्पष्ट होगी।

रमजान केवल उपवास का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इबादत, सेवा और इंसानियत का प्रतीक है। यह हमें बेहतर इंसान बनने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है।

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