
Income Tax Rules 2026: वित्तीय लेन-देन को पारदर्शी बनाने और काले धन पर रोक लगाने के लिए सरकार लगातार टैक्स नियमों में बदलाव कर रही है। इसी कड़ी में ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 के तहत फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और नकद जमा से जुड़े नए नियम सामने आए हैं।
इन प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक की नई फिक्स्ड डिपॉजिट करता है, तो इसकी जानकारी बैंक या पोस्ट ऑफिस को Income Tax Department को देनी होगी।
हालांकि, इन नियमों में कुछ छूट और विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। आइए जानते हैं इनकम टैक्स नियम 2026 से जुड़ी पूरी जानकारी आसान भाषा में।
इनकम टैक्स नियम 2026 क्या कहते हैं?
ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 के अनुसार, अब बड़े वित्तीय लेन-देन पर सरकार की पैनी नजर रहेगी। खासतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट और कैश डिपॉजिट से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग को अनिवार्य किया जा रहा है।
यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक की नई एफडी करता है, तो बैंक या पोस्ट ऑफिस को इसकी जानकारी सरकार को देनी होगी। यह नियम केवल नई एफडी पर लागू होगा, न कि पुरानी एफडी के नवीनीकरण (Renewal) पर।
इसका मकसद टैक्स चोरी पर रोक लगाना और संदिग्ध लेन-देन की पहचान करना है।
₹10 लाख से ज्यादा FD पर क्या होगा?
नए नियमों के तहत, अगर कोई व्यक्ति साल भर में ₹10 लाख या उससे अधिक की नई फिक्स्ड डिपॉजिट करता है, तो यह जानकारी “स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन” के तहत दर्ज की जाएगी।
इस रिपोर्ट में व्यक्ति का नाम, पैन नंबर, राशि और लेन-देन से जुड़ी अन्य जानकारियां शामिल होंगी। इसके बाद टैक्स विभाग यह जांच कर सकता है कि यह पैसा वैध स्रोत से आया है या नहीं।
हालांकि, यदि कोई व्यक्ति पुरानी एफडी को रिन्यू करता है, तो उसे इस सीमा में नहीं जोड़ा जाएगा।
PAN कार्ड वालों और बिना PAN वालों के लिए नियम
ड्राफ्ट नियमों में पैन कार्ड को लेकर भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
यदि किसी व्यक्ति के पास पैन कार्ड है, तो उसके फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट में ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा पर रिपोर्टिंग की जाएगी।
वहीं, जिन लोगों के पास पैन कार्ड नहीं है, उनके लिए यह सीमा ₹5 लाख तय की गई है। यानी अगर बिना पैन वाले व्यक्ति ने ₹5 लाख या उससे अधिक कैश जमा किया, तो उसकी जानकारी टैक्स विभाग तक पहुंचेगी।
इससे साफ है कि सरकार लोगों को पैन कार्ड से जोड़ने और टैक्स सिस्टम में लाने की कोशिश कर रही है।
किन खातों और लेन-देन पर होगी रिपोर्टिंग?
इनकम टैक्स नियम 2026 के तहत कुछ खास तरह के खातों और जमा पर रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
अगर कोई व्यक्ति अपने सेविंग अकाउंट या अन्य खातों में (करंट अकाउंट और टाइम डिपॉजिट को छोड़कर) बड़ी रकम जमा करता है, तो उसकी जानकारी दी जाएगी।
इसी तरह, अगर एक वित्तीय वर्ष में एक या अधिक टाइम डिपॉजिट मिलाकर ₹10 लाख से ज्यादा की राशि जमा होती है, तो वह भी रिपोर्टेबल होगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति बड़ी रकम को छिपाकर सिस्टम से बाहर न रख सके।
कब से लागू होंगे ये नियम?
फिलहाल ये नियम ड्राफ्ट स्टेज में हैं और इन्हें सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है। सरकार अभी लोगों और संस्थाओं से फीडबैक ले रही है।
संभावना है कि इनमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। अंतिम रूप मिलने के बाद ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाएंगे।
यानी नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से इनका असर दिखने लगेगा।
क्या ये नियम बिल्कुल नए हैं?
बहुत से लोगों को लग रहा है कि ये नियम पहली बार लाए गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
पहले से लागू इनकम टैक्स नियम 1962 में भी लगभग इसी तरह के प्रावधान मौजूद हैं। उनके अनुसार भी ₹10 लाख या उससे ज्यादा की एफडी और कैश डिपॉजिट की जानकारी टैक्स विभाग को दी जाती थी।
हालांकि, अब सरकार इसे और सख्ती से लागू करने और डिजिटल तरीके से मॉनिटर करने की तैयारी में है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
इन नए नियमों से आम करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, अगर उनकी आय और निवेश सही तरीके से दर्ज है।
जो लोग ईमानदारी से टैक्स भरते हैं और वैध स्रोत से निवेश करते हैं, उनके लिए यह नियम परेशानी नहीं बनेगा।
लेकिन जो लोग बिना हिसाब-किताब के बड़ी रकम जमा करते हैं, उन्हें अब सावधान रहना होगा। क्योंकि ऐसी गतिविधियां टैक्स जांच के दायरे में आ सकती हैं।
निवेश करने वालों के लिए जरूरी सलाह
अगर आप बड़ी एफडी या कैश डिपॉजिट करने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सबसे पहले अपना पैन कार्ड जरूर अपडेट रखें। सभी लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। अगर पैसा किसी बिजनेस, प्रॉपर्टी या अन्य स्रोत से आया है, तो उसके दस्तावेज भी संभालकर रखें।
इसके अलावा, टैक्स रिटर्न समय पर फाइल करें और अपनी आय की सही जानकारी दें। इससे भविष्य में किसी भी नोटिस या जांच से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
इनकम टैक्स नियम 2026 सरकार की उस नीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत वित्तीय सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाया जा रहा है। ₹10 लाख से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट और कैश जमा पर रिपोर्टिंग से टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी।
यह नियम ईमानदार करदाताओं के लिए नहीं, बल्कि अनियमित लेन-देन करने वालों के लिए चेतावनी है। अगर आप सही तरीके से निवेश करते हैं और टैक्स नियमों का पालन करते हैं, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।



