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Bank Strike Today: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हड़ताल

Bank Strike Today: देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मंगलवार को बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहने की पूरी संभावना है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल के चलते शाखाओं में लेन-देन, चेक क्लियरेंस, पासबुक अपडेट, ड्राफ्ट और अन्य जरूरी बैंकिंग सेवाएं बाधित हो सकती हैं। लगातार दो दिन पहले ही बैंक बंद रहने के कारण आम ग्राहकों की परेशानियां पहले से बढ़ी हुई हैं।

हड़ताल का समय क्यों बना चिंता का कारण

यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब बैंक पहले ही रविवार और सोमवार को बंद रहे। रविवार साप्ताहिक अवकाश था, जबकि सोमवार को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाया गया। ऐसे में लगातार तीन दिन तक बैंकिंग सेवाएं बाधित रहने से व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और पेंशनधारकों को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है। नकदी लेन-देन और जरूरी भुगतान अटकने की आशंका भी जताई जा रही है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस क्या है

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की नौ प्रमुख यूनियनों का साझा मंच है। यह संगठन बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। UFBU लंबे समय से बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। मौजूदा हड़ताल का मुख्य मुद्दा पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग है।

पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग क्यों

बैंक यूनियनों का कहना है कि सप्ताह में छह दिन काम करने की व्यवस्था अब व्यावहारिक नहीं रह गई है। निजी क्षेत्र, आईटी सेक्टर और कई सरकारी विभागों में पहले से ही पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है। ऐसे में सार्वजनिक बैंकों में भी यही व्यवस्था होनी चाहिए। यूनियनों के मुताबिक, इससे कर्मचारियों का कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होगा और वे ग्राहकों को अधिक प्रभावी सेवाएं दे सकेंगे।

सुलह बैठक विफल होने के बाद लिया गया फैसला

23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ बैंक यूनियनों की सुलह बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में बैंक कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद UFBU ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। यूनियनों का आरोप है कि उनकी जायज मांगों को लगातार टाला जा रहा है।

बैंक ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर

हड़ताल के चलते आम बैंक ग्राहकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। शाखाओं में नकद जमा और निकासी प्रभावित हो सकती है। चेक क्लियरेंस में देरी हो सकती है और लोन से जुड़े काम भी अटक सकते हैं। ग्रामीण इलाकों और बुजुर्ग ग्राहकों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, जो डिजिटल बैंकिंग पर कम निर्भर रहते हैं।

क्या डिजिटल बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालू

हालांकि हड़ताल के दौरान एटीएम, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से चालू रह सकती हैं, लेकिन किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में समाधान मिलने में समय लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हड़ताल के दिनों में डिजिटल माध्यमों का उपयोग करना ग्राहकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा।

अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हड़ताल का असर केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। छोटे कारोबारियों, व्यापारियों और उद्योगों को भुगतान अटकने से नुकसान हो सकता है। यदि हड़ताल लंबी चली तो बाजार में नकदी संकट जैसी स्थिति भी बन सकती है।

समाधान की उम्मीद और आगे की राह

बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंच सकते हैं। यूनियनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो भविष्य में इस तरह की हड़तालों से बचा जा सकता है।

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

बैंक ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले से निपटा लें और डिजिटल भुगतान माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करें। आने वाले दिनों में बैंक हड़ताल को लेकर सरकार और यूनियनों के रुख पर सबकी नजर बनी हुई है।

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