
Sheikh Hasina Bangladesh: पूर्व बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश की मौजूदा स्थिति को लेकर अंतरिम सरकार पर बड़ा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश को “हिंसक अराजकता” में झोंक दिया है और आज देश में लोकतंत्र पूरी तरह “निर्वासन” में चला गया है। शेख हसीना के अनुसार, बांग्लादेश अपने इतिहास के सबसे अंधेरे दौर से गुजर रहा है।
दक्षिण एशिया के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब द्वारा आयोजित एक इंटरैक्टिव सत्र में उनका एक ऑडियो संदेश चलाया गया, जिसमें उन्होंने मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई। हसीना ने कहा कि जो बांग्लादेश कभी शांति, सौहार्द और समृद्धि के लिए जाना जाता था, वह आज हिंसा, भय और विनाश की चपेट में है। उनके शब्दों में, पूरा देश एक “खून से सना हुआ परिदृश्य” बन चुका है।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा और उन्होंने भारत में शरण ली। हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया, जिन पर अब देश को संभालने और चुनाव कराने की जिम्मेदारी है।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 की घटनाएं किसी जन आंदोलन का परिणाम नहीं थीं, बल्कि यह एक गहरी साजिश थी, जिसके तहत लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को हटाया गया। उन्होंने कहा कि उस साजिश के बाद से बांग्लादेश में लोकतंत्र को कुचल दिया गया है, नागरिक स्वतंत्रताएं खत्म कर दी गई हैं और हिंसा को खुली छूट मिल गई है।
अपने संदेश में शेख हसीना ने दावा किया कि देशभर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आम लोग अब सिर्फ जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हत्या, यातना, डर और असुरक्षा रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और यौन अपराधों पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि ऐसे मामलों पर सरकार आंखें मूंदे बैठी है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक और कट्टरपंथी ताकतों को खुली छूट दी जा रही है, जिससे देश का सामाजिक ताना-बाना टूट रहा है। हसीना ने दावा किया कि विदेशी ताकतों और चरमपंथी समूहों ने मिलकर बांग्लादेश को एक “विशाल जेल और फांसीघर” में बदल दिया है।
शेख हसीना ने मौजूदा सत्ता पर काबिज समूह को “हत्यारी और फासीवादी टोली” करार दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता की लालसा, धन की लूट और विश्वासघात से प्रेरित इस समूह ने साजिश के जरिए उनकी सरकार को गिराया और तभी से देश अराजकता की आग में जल रहा है। उनके अनुसार, यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेशी लोकतंत्र पर सीधा हमला था।
आने वाले फरवरी 12 के आम चुनावों को लेकर भी शेख हसीना ने गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित रखा गया, तो इन चुनावों की वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। हसीना का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में प्रमुख विपक्षी दल को बाहर रखकर कराए गए चुनाव न तो निष्पक्ष हो सकते हैं और न ही विश्वसनीय।
उन्होंने आरोप लगाया कि अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध और असहमति की आवाजों पर हो रही कार्रवाई लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। हसीना के समर्थकों का भी कहना है कि मौजूदा हालात में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं दिख रहे हैं। उनका दावा है कि डर और दमन के माहौल में जनता अपनी बात खुलकर नहीं रख पा रही है।
दूसरी ओर, अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली प्रशासनिक व्यवस्था का कहना है कि वह देश में शांति बहाल करने और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का दावा है कि कुछ कड़े फैसले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी थे और इन्हें तानाशाही के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, जमीनी हकीकत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने बांग्लादेश में सुरक्षा हालात और राजनीतिक स्वतंत्रता पर चिंता जताई है। शेख हसीना के ताजा बयान इन चिंताओं को और गहरा कर रहे हैं।
जैसे-जैसे बांग्लादेश फरवरी के चुनावों की ओर बढ़ रहा है, देश का राजनीतिक भविष्य और अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। शेख हसीना की टिप्पणियां साफ संकेत देती हैं कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी देश में स्थिरता नहीं आई है। सवाल यह है कि क्या यह संक्रमण काल बांग्लादेश को स्थिर लोकतंत्र की ओर ले जाएगा या फिर यह संकट और गहराएगा।
फिलहाल, शेख हसीना इसे एक ऐसे राष्ट्र की कहानी बता रही हैं जो खून बहा रहा है और जहां लोकतंत्र निर्वासन में है। आने वाले चुनाव और अंतरिम सरकार के कदम तय करेंगे कि बांग्लादेश इस अंधेरे दौर से बाहर निकल पाएगा या नहीं।



